फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Bageshwar News ›   Paddy transplantation started in irrigated areas

सिंचाई वाले क्षेत्रों में धान रोपाई शुरू

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Wed, 02 Jun 2021 07:28 PM IST
विज्ञापन
Paddy transplantation started in irrigated areas
बागेश्वर। कोरोना के चलते जहां बाजारों की रौनक गायब सी हो गई है, वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में महामारी के बीच खेतीबाड़ी का काम जोरशोर से चल रहा है। किसान पूरी मेहनत से खेतों में काम कर रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों के सिंचाई वाले इलाकों में धान की रोपाई शुरू हो गई है। हालांकि असिंचित क्षेत्रों में रोपाई के लिए किसानों को मानसून का इंतजार है।
विज्ञापन

जिले में 47218 हेक्टेयर जमीन में धान, गेहूं, मडुवा और अन्य अनाजों की खेती की जाती है। बागेश्वर, गरुड़, कांडा, कपकोट, काफलीगैर और दुग नाकुरी क्षेत्र के 15 हजार हेक्टेयर में धान की उपज होती है। जिले के कृषि क्षेत्रफल का मात्र 20 प्रतिशत ही सिंचित है, जबकि 80 प्रतिशत खेती बारिश के पानी पर निर्भर करती है।
विज्ञापन

गरुड़ या कत्यूर घाटी को मुख्य रूप से धान की पैदावार के लिए जाना जाता है। क्षेत्र के अधिकतर खेती वाले इलाकों में सिंचाई की सुविधा है। इस कारण यहां के किसान रोपाई अधिक करते हैं। माना जाता है कि रोपाई से धान की पैदावार बढ़ती है। गरुड़ के देवनाई क्षेत्र के तमाम गांवों में सिंचाई की सुविधा होने के चलते रोपाई का काम शुरू हो गया है। किसान सुबह से खेतों को तैयार करने में जुट रहे हैं तो महिलाएं भी धान की तैयार क्यारी से पौध निकालकर उनकी रोपाई कर रही हैं। क्षेत्र के सामाजिक कार्यकर्ता किशन सिंह राणा ने बताया कि मानसून शुरू होने के बाद रोपाई में तेजी आएगी। उन्होंने बताया कि कोविड महामारी के चलते वह खेतीबाड़ी में जुटे लोगों को मास्क का प्रयोग करने, सामाजिक दूरी का पालन करने के लिए भी प्रेरित कर रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

रोपाई से जुड़ी है हुड़किया बोल और पल्ट परंपरा
बागेश्वर। धान की रोपाई से जहां पैदावार अच्छी होती है, वहीं रोपाई संस्कृति और परंपराओं का संरक्षण भी करती है। ग्रामीण क्षेत्रों में रोपाई के दौरान एक दूसरे की मदद करने का चलन है। किसी किसान के यहां रोपाई होने पर पूरे गांव के महिला और पुरुष उसकी मदद करते हैं, बदले में वह किसान परिवार भी अन्य लोगों की रोपाई में मदद करने जाता है। हुड़किया बोल भी रोपाई का अभिन्न अंग है। रोपाई के दौरान धूप या बरसात के बीच पानी से लबालब भरे खेतों में जब महिलाएं धान की पौध रोपती हैं तो उनके मनोरंजन के लिए लोक कलाकार हुड़के की थाप पर न्योली, चांचरी और छपेली सुनाता है। संगीत के बीच कब रोपाई हो गई, इसका महिलाओं को आभास भी नहीं होता। हालांकि बदलते समय के साथ अब हुड़किया बोल की परंपरा सिमटती जा रही है, लेकिन कई गांवों में अब भी इसका चलन है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed