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कपकोट में 14 साल पहले मिला था मंदिर का अवशेष
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कपकोट में 14 वर्ष पहले सरयू नदी के किनारे मिले मंदिर के अवशेष। संवाद न्यूज एजेंसी
- फोटो : BAGESHWAR
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बागेश्वर। कपकोट में सरयू नदी के किनारे 14 वर्ष पूर्व भी बुद्धेश्वर मंदिर के पास प्राचीन अवशेष मिले थे। मंदिर खंडित अवस्था मिलने के कारण पुरातत्व विभाग ने इसके संरक्षण का जिम्मा नहीं लिया था। हाल में मिली मूर्ति को प्रशासन ने एक व्यापारी की सौंप दिया है। पुरातत्व विभाग ने इस मूर्ति को देवता के उपासक की बताया है।
बुद्धेश्वर मंदिर के अवशेषों के पास पांच मार्च को कत्यूरी काल की एक प्राचीन मूर्ति मिली थी। मूर्ति मिलने से यह क्षेत्र एक बार फिर चर्चा में आ गया। कपकोट के एसडीएम प्रमोद कुमार ने बुधवार को हाल में मिली मूर्ति को देखा था। उन्होंने मूर्ति को कपकोट के व्यापारी गोविंद कपकोटी के संरक्षण में दे दिया है। कहा है कि मंदिर क्षेत्र का सर्वेक्षण कराया जाएगा। कपकोट के पूर्व प्रधान गणेश उपाध्याय और स्थानीय नागरिक गोविंद कपकोटी का कहना है कि 14 वर्ष पहले सरयू नदी के किनारे अवशेष मिले थे लेकिन तब मंदिर का दरवाजा आदि सुरक्षित था। इन अवशेषों को निकटवर्ती बुद्धेश्वर मंदिर का माना गया। क्षेत्र के लोगों ने इस स्थल की खुदाई की मांग की थी, ताकि मंदिर के रहस्य से पर्दा उठे लेकिन ऐसा नहीं हो नहीं सका।
वहीं क्षेत्रीय पुरातत्व इकाई अल्मोड़ा के प्रभारी चंद्र सिंह चौहान का कहना है कि हाल में मिली मूर्ति किसी बड़ी मूर्ति का परिकर खंड है। यह देवता की उपासक होती है। बताया कि वर्ष 2005-06 में मंदिर के अवशेष मिले थे, लेकिन मंदिर खंडित होने के कारण मंदिर के जीर्णोद्धार अथवा संरक्षण का फैसला नहीं लिया गया। कहा कि किसी आपदा से इस मंदिर के मलबे में दबने की आशंका है।
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बुद्धेश्वर मंदिर के अवशेषों के पास पांच मार्च को कत्यूरी काल की एक प्राचीन मूर्ति मिली थी। मूर्ति मिलने से यह क्षेत्र एक बार फिर चर्चा में आ गया। कपकोट के एसडीएम प्रमोद कुमार ने बुधवार को हाल में मिली मूर्ति को देखा था। उन्होंने मूर्ति को कपकोट के व्यापारी गोविंद कपकोटी के संरक्षण में दे दिया है। कहा है कि मंदिर क्षेत्र का सर्वेक्षण कराया जाएगा। कपकोट के पूर्व प्रधान गणेश उपाध्याय और स्थानीय नागरिक गोविंद कपकोटी का कहना है कि 14 वर्ष पहले सरयू नदी के किनारे अवशेष मिले थे लेकिन तब मंदिर का दरवाजा आदि सुरक्षित था। इन अवशेषों को निकटवर्ती बुद्धेश्वर मंदिर का माना गया। क्षेत्र के लोगों ने इस स्थल की खुदाई की मांग की थी, ताकि मंदिर के रहस्य से पर्दा उठे लेकिन ऐसा नहीं हो नहीं सका।
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वहीं क्षेत्रीय पुरातत्व इकाई अल्मोड़ा के प्रभारी चंद्र सिंह चौहान का कहना है कि हाल में मिली मूर्ति किसी बड़ी मूर्ति का परिकर खंड है। यह देवता की उपासक होती है। बताया कि वर्ष 2005-06 में मंदिर के अवशेष मिले थे, लेकिन मंदिर खंडित होने के कारण मंदिर के जीर्णोद्धार अथवा संरक्षण का फैसला नहीं लिया गया। कहा कि किसी आपदा से इस मंदिर के मलबे में दबने की आशंका है।
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