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बागनाथ मंदिर परिसर के एक कमरे में धूल फांक रही दुलर्भ मूर्तियां
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बागेश्वर में बागनाथ मंदिर के कमरे में रखी दुर्लभ मूर्तियां। संवाद न्यूज एजेंसी
- फोटो : BAGESHWAR
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बागेश्वर। नगर के बागनाथ मंदिर परिसर में मौजूद 8वीं से 18वीं सदी की दुर्लभ मूर्तियां स्थान के अभाव में एक बंद कमरे में धूल फांक रही हैं। मूर्तियों पर मकड़ी के जाले लगे हैं। मूर्तियों की ऐसी हालत देख श्रद्धालुओं की भावनाओं को ठेस पहुंच रही है।
बागनाथ मंदिर का निर्माण चंदवंशी राजा लक्ष्मी चंद ने वर्ष 1502 में कराया था। मंदिर परिसर में वाणेश्वर, काल भैरव समेत कई मंदिर हैं। भव्य नक्काशी वाले मंदिरों के साथ ही इन मंदिरों में रखी गईं दुर्लभ मूर्तियां भी दर्शनीय हैं। बागनाथ मंदिर परिसर के एक कमरे में पुरातत्व विभाग ने 69 प्राचीन मूर्तियां रखी हैं। इनमें उमा-महेश्वर, महिषासुर मर्दिनी, गणेश, विष्णु समेत आदि देवी, देवताओं की मूर्तियां शामिल हैं। सुरक्षा की दृष्टि से कमरे के दरवाजे पर ताला लगा रहता है। इस कारण यह दुर्लभ मूर्तियां लोगों की पहुंच से दूर हैं। इन दिनों बागनाथ मंदिर परिसर में संग्रहालय का निर्माण हो रहा है। संग्रहालय बनने के बाद मूर्तियों को संग्रहालय में रखा जाएगा। संग्रहालय बनने के बाद भी लोग इन पुरातन मूर्तियों के दीदार कर पाएंगे।
मूर्तियों के संरक्षण के प्रति विभाग गंभीर है। अगले साल की शुरुआत तक बागनाथ मंदिर परिसर में संग्रहालय बन जाएगा। संग्रहालय में इन 69 मूर्तियों के साथ ही कालभैरव मंदिर समेत अन्य स्थानों की 12 अन्य मूर्तियों को भी रखा जाएगा।
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- चंद्र सिंह चौहान, क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी, अल्मोड़ा।
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बागनाथ मंदिर का निर्माण चंदवंशी राजा लक्ष्मी चंद ने वर्ष 1502 में कराया था। मंदिर परिसर में वाणेश्वर, काल भैरव समेत कई मंदिर हैं। भव्य नक्काशी वाले मंदिरों के साथ ही इन मंदिरों में रखी गईं दुर्लभ मूर्तियां भी दर्शनीय हैं। बागनाथ मंदिर परिसर के एक कमरे में पुरातत्व विभाग ने 69 प्राचीन मूर्तियां रखी हैं। इनमें उमा-महेश्वर, महिषासुर मर्दिनी, गणेश, विष्णु समेत आदि देवी, देवताओं की मूर्तियां शामिल हैं। सुरक्षा की दृष्टि से कमरे के दरवाजे पर ताला लगा रहता है। इस कारण यह दुर्लभ मूर्तियां लोगों की पहुंच से दूर हैं। इन दिनों बागनाथ मंदिर परिसर में संग्रहालय का निर्माण हो रहा है। संग्रहालय बनने के बाद मूर्तियों को संग्रहालय में रखा जाएगा। संग्रहालय बनने के बाद भी लोग इन पुरातन मूर्तियों के दीदार कर पाएंगे।
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मूर्तियों के संरक्षण के प्रति विभाग गंभीर है। अगले साल की शुरुआत तक बागनाथ मंदिर परिसर में संग्रहालय बन जाएगा। संग्रहालय में इन 69 मूर्तियों के साथ ही कालभैरव मंदिर समेत अन्य स्थानों की 12 अन्य मूर्तियों को भी रखा जाएगा।
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- चंद्र सिंह चौहान, क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी, अल्मोड़ा।