{"_id":"fd500f5813204202c9d1fd52f25785cc","slug":"official-status-could-not-get-fair-uttarayani-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"उत्तरायणी मेले को नहीं मिल सका राजकीय दर्जा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
उत्तरायणी मेले को नहीं मिल सका राजकीय दर्जा
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, बागेश्वर।
Updated Tue, 05 Jan 2016 12:43 AM IST
विज्ञापन
भगवान बागनाथ की नगरी में 14 जनवरी से शुरू हो रहे उत्तरायणी मेले का धार्मिक, सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और व्यापारिक महत्व है। हर दृष्टि से महत्वपूर्ण इस मेले को राजकीय मेले का दर्जा देने के लिए चार मुख्यमंत्री घोषणा कर चुके हैं, लेकिन उनकी घोषणाएं आज तक रंग नहीं ला सकी हैं। शासन से मेले की व्यवस्थाओं के लिए सिर्फ पांच लाख रुपये ही मिलते हैं। कम धन से मेले को भव्य और आकर्षक बनाने की कसक रह ही जाती है।
विज्ञापन
मालूम हो अंग्रेजों ने अपने शासन में लोगों में जुल्म ढहाने के लिए कई कानून लादे। इनमें कुली उतार, बेगार और बर्दायश जैसे काले कानूनों को कूर्मांचल के लोग त्रस्त थे। 1921 इन काले काले कानूनों को जड़ से उखाड़ फेंकने के लिए इसी धरती से आंदोलन का आगाज हुआ था। कूर्मांचल केसरी बद्री दत्त पांडे नेतृत्व मेें मकर संक्रांति पर्व के मौके पर बड़ी संख्या में क्षेत्र के क्रांतिवीरों ने हाथ में पवित्र सरयू जल लिया और इन कानूनों से संबंधी रजिस्टरों को सरयू में बहा दिया। क्रांतिवीरों के इस निर्णय से अंग्रेज हुक्मरान भौचक्के रह गए थे।
विज्ञापन
इस निर्णय से कूर्मांचल में स्वाधीनता की ज्वाला और भी तेज हो गई। कूर्मांचल में मिली इस सफलता से राष्ट्रपिता महात्मा गांधी काफी प्रसन्न हुए और उन्होंने 28 जून 1929 को बागेश्वर की यात्रा करके क्षेत्र के लोगों की सराहना की। यह मेला धार्मिक दृष्टि से भी काफी महत्व है। सरयू और गोमती के संगम पर भगवान बागनाथ का पौराणिक मंदिर है।
विज्ञापन
मंदिर में दूर-दूर से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। मेले में दूर से व्यापारी अपने उत्पादों को लेकर आते हैं। मेले की महत्ता को देखते पूर्व सीएम बीसी खंडूरी, डा. रमेश पोखरियाल, विजय बहुगुणा ने मेले को राजकीय दर्जा देने की घोषणा की थी जबकि मौजूदा सीएम रावत ने गत वर्ष मेले के समापन के मौके पर मेले को राजकीय दर्जा देने की घोषणा की थी, लेकिन तब से इस घोषणा को मूर्तरूप नहीं मिल सका है।
हालांकि नगर पालिका परिषद और जिला प्रशासन अपने प्रयासों से मेले को भव्य बनाने के हर संभव प्रयास तो करती है। इस बार के उद्घाटन के लिए मुख्यमंत्री आ रहे हैं लोगों को उम्मीद है कि सीएम अपनी घोषणा को जल्द अमलीजामा पहना देेंगे। बागेश्वर के विधायक चंदन राम दास ने शासन पर उत्तरायणी मेले की उपेक्षा का आरोप लगाया है। उनके प्रयासों से तत्कालीन सीएम विजयु बहुगुणा ने मेले की व्यवस्थाओं के लिए 15 लाख रुपये दिए थे अब तो पांच लाख रुपये ही मिल रहे हैं। सीएम को अपनी घोषणा शीघ्र पूरी करनी चाहिए।
कपकोट के कांग्रेेसी विधायक ललित फर्स्वाण ने कहा कि शासन ने मेले को भव्य और आकर्षक बनाने के लिए प्रशासन को निर्देश दिए हैं। इस पर काम भी हो रहा है। मेले को राजकीय दर्जा दिलाने के लिए वह मुख्यमंत्री से फिर से बात करेंगे।