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Bageshwar News: किसानों की आय बढ़ाएगा ओक टसर रेशम
Mon, 27 Mar 2023 11:58 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बागेश्वर
संवाद न्यूज एजेंसी, बागेश्वर
Updated Mon, 27 Mar 2023 11:58 PM IST
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कपकोट के पनौरा में बने हैचिंग रूम में बांज के पत्तों पलते रेशम कीट। संवाद
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बागेश्वर। कपकोट के किसान पारंपरिक खेती के साथ आय बढ़ाने के वैकल्पिक साधनों का प्रयोग करने लगे हैं। कीवी, मशरूम, स्ट्रॉबेरी के बाद अब रेशम उत्पादन के प्रति किसानों की रुचि जाग रही है। क्षेत्र के कई किसान रेशम उत्पादन के लिए आगे आ रहे हैं। चार गांवों के दस किसान ओक (बांज) टसर रेशम का उत्पादन करने की तैयारी कर चुके हैं। किसानों के लिए रेशम विभाग ने भीमताल से 40,000 रेशम कीट मंगाए हैं।
कपकोट में रेशम उत्पादन के लिए स्थानीय बांज के साथ मणिपुरी बांज भी उपलब्ध है। खरसू और तिलम की पत्तियों से भी रेशम उत्पादन में मदद मिल रही है। कपकोट में रेशम विभाग ने वर्ष 2019 में ओक टसर रेशम के उत्पादन के लिए ट्रायल किया था। हालांकि कोविड काल में इसे आगे नहीं बढ़ाया जा सका। पिछले साल किसानों को मणिपुरी बांज के पौधे बांटने के साथ-साथ ओक टसर रेशम उत्पादन के लिए प्रेरित किया गया।
विभाग ने क्षेत्र के फरसाली, चौड़ा, हरकोट, मल्लादेश, मिखिला खलपट्टा, तिमलाबगड़, लाथी, गुलेर, कनौली, सिमगड़ी को रेशम उत्पादन के लिए चुना है। इन गांवों के 250 से अधिक किसान रेशम उत्पादन के प्रति रुचि दिखा चुके हैं हालांकि फिलहाल कुछ सक्रिय किसानों को ही रेशम उत्पादन के लिए चुना गया है। संवाद
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इनसेट
इस सीजन में रेशम उत्पादन करने वाले किसान
बागेश्वर। कपकोट के किसानों को उपलब्ध कराने के लिए भीमताल से दस दिन पूर्व 350 डीएफएल रेशम कीट के अंडे लाए गए थे। एक डीएफएल में 120 अंडे होते हैं। पनौरा में बने हैचिंग रूम में इन अंडों को रखा गया था, जहां इन दिनों कीट पल रहे हैं। इन कीटों को इस सीजन में कीट उत्पादन के लिए चयनित किसान फरसाली के सुरेश सिंह, नारायण सिंह, कैलाश सिंह, सिमगढ़ी की रेखा देवी, देवेश्वरी देवी, विमला देवी, मल्लादेश के सुरेश सिंह, विमला देवी और गुलेर के मनोहर सिंह, धाम सिंह को बांटा जाएगा। संवाद
इनसेट
बेहद सावधानी से होता है कीट पालन का कार्य
बागेश्वर। कपकोट में रेशम विभाग की सहयोगी संजीवनी संस्था रेशम उत्पादन को बढ़ाने के लिए कार्य कर रही है। संस्था के फील्ड सुपरवाइजर विनोद सिंह घुघत्याल ने बताया कि वसंत ऋतु (मार्च-अप्रैल) में टसर रेशम के कीट पालन का काम शुरू होता है। भीमताल से अंडे लाने से एक सप्ताह पूर्व हैचिंग रूम (अंडे रखने के कमरे) की चूने और रसायन से सफाई की जाती है। अंडे लाने के बाद उन्हें अधिकतम 30 और न्यूनतम 24 डिग्री तापमान में रखा जाता है। तीन दिन के भीतर अंडे से कीट (इल्ली) निकल आता है। कीट को बाहर आते ही तत्काल ताजे बांज के पत्ते खिलाए जाते हैं। आठ-दस दिन तक बीमारी से बचाते हुए बेहद सावधानी से कीटों का पालन करने के बाद किसानों को बांटे जाते हैं। वहां कीट पालन के लिए कमरा (कीटपालन घर) बनाया जाता है। इसी कमरे में कीटों को 40 से 45 दिन तक पाला जाता है। इस अवधि के बाद कीट से कोकून बन जाता है। यही कोकून किसानों से खरीदा जाता है। कुछ कोकून को बीज बनाने के लिए बीजागार में रखा जाता है बाकी को बेचा जाता है। संवाद
इनसेट
डेढ़ से ढाई रुपये प्रति कोकून होगी कीमत
बागेश्वर। रेशम कीट पालन के लिए किसान को केवल अपना समय देना है। कीट उपलब्ध कराने से लेकर बिक्री तक की जिम्मेदारी विभाग उठाता है। किसान को 40-45 दिन तक कीट का बेहद सावधानी से ख्याल रखना है। इस दौरान कीट जितना सेहतमंद रहेगा, किसान की आय भी उतनी ही अच्छी होगी। कीट अगर ए ग्रेड का निकला तो किसान को ढाई रुपया प्रति कोकून मिलेगा। अगर कोकून छोटा बना तो किसान को डेढ़ से दो रुपये में संतोष करना पड़ेगा। संवाद
कोट
कपकोट में ओक टसर रेशम उत्पादन के लिए कई किसान रुचि दिखा रहे हैं। पूर्व में रेशम उत्पादन के लिए कराए गए ट्रायल से किसानों की संख्या बढ़ रही है। उम्मीद है जल्द ही क्षेत्र के कई गांवों में रेशम उत्पादन किसानों की आय का अहम जरिया बनेगा। - कमलेश कुमार, प्रभारी अधिकारी रेशम विभाग, बागेश्वर।
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कपकोट में रेशम उत्पादन के लिए स्थानीय बांज के साथ मणिपुरी बांज भी उपलब्ध है। खरसू और तिलम की पत्तियों से भी रेशम उत्पादन में मदद मिल रही है। कपकोट में रेशम विभाग ने वर्ष 2019 में ओक टसर रेशम के उत्पादन के लिए ट्रायल किया था। हालांकि कोविड काल में इसे आगे नहीं बढ़ाया जा सका। पिछले साल किसानों को मणिपुरी बांज के पौधे बांटने के साथ-साथ ओक टसर रेशम उत्पादन के लिए प्रेरित किया गया।
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विभाग ने क्षेत्र के फरसाली, चौड़ा, हरकोट, मल्लादेश, मिखिला खलपट्टा, तिमलाबगड़, लाथी, गुलेर, कनौली, सिमगड़ी को रेशम उत्पादन के लिए चुना है। इन गांवों के 250 से अधिक किसान रेशम उत्पादन के प्रति रुचि दिखा चुके हैं हालांकि फिलहाल कुछ सक्रिय किसानों को ही रेशम उत्पादन के लिए चुना गया है। संवाद
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इस सीजन में रेशम उत्पादन करने वाले किसान
बागेश्वर। कपकोट के किसानों को उपलब्ध कराने के लिए भीमताल से दस दिन पूर्व 350 डीएफएल रेशम कीट के अंडे लाए गए थे। एक डीएफएल में 120 अंडे होते हैं। पनौरा में बने हैचिंग रूम में इन अंडों को रखा गया था, जहां इन दिनों कीट पल रहे हैं। इन कीटों को इस सीजन में कीट उत्पादन के लिए चयनित किसान फरसाली के सुरेश सिंह, नारायण सिंह, कैलाश सिंह, सिमगढ़ी की रेखा देवी, देवेश्वरी देवी, विमला देवी, मल्लादेश के सुरेश सिंह, विमला देवी और गुलेर के मनोहर सिंह, धाम सिंह को बांटा जाएगा। संवाद
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बेहद सावधानी से होता है कीट पालन का कार्य
बागेश्वर। कपकोट में रेशम विभाग की सहयोगी संजीवनी संस्था रेशम उत्पादन को बढ़ाने के लिए कार्य कर रही है। संस्था के फील्ड सुपरवाइजर विनोद सिंह घुघत्याल ने बताया कि वसंत ऋतु (मार्च-अप्रैल) में टसर रेशम के कीट पालन का काम शुरू होता है। भीमताल से अंडे लाने से एक सप्ताह पूर्व हैचिंग रूम (अंडे रखने के कमरे) की चूने और रसायन से सफाई की जाती है। अंडे लाने के बाद उन्हें अधिकतम 30 और न्यूनतम 24 डिग्री तापमान में रखा जाता है। तीन दिन के भीतर अंडे से कीट (इल्ली) निकल आता है। कीट को बाहर आते ही तत्काल ताजे बांज के पत्ते खिलाए जाते हैं। आठ-दस दिन तक बीमारी से बचाते हुए बेहद सावधानी से कीटों का पालन करने के बाद किसानों को बांटे जाते हैं। वहां कीट पालन के लिए कमरा (कीटपालन घर) बनाया जाता है। इसी कमरे में कीटों को 40 से 45 दिन तक पाला जाता है। इस अवधि के बाद कीट से कोकून बन जाता है। यही कोकून किसानों से खरीदा जाता है। कुछ कोकून को बीज बनाने के लिए बीजागार में रखा जाता है बाकी को बेचा जाता है। संवाद
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डेढ़ से ढाई रुपये प्रति कोकून होगी कीमत
बागेश्वर। रेशम कीट पालन के लिए किसान को केवल अपना समय देना है। कीट उपलब्ध कराने से लेकर बिक्री तक की जिम्मेदारी विभाग उठाता है। किसान को 40-45 दिन तक कीट का बेहद सावधानी से ख्याल रखना है। इस दौरान कीट जितना सेहतमंद रहेगा, किसान की आय भी उतनी ही अच्छी होगी। कीट अगर ए ग्रेड का निकला तो किसान को ढाई रुपया प्रति कोकून मिलेगा। अगर कोकून छोटा बना तो किसान को डेढ़ से दो रुपये में संतोष करना पड़ेगा। संवाद
कोट
कपकोट में ओक टसर रेशम उत्पादन के लिए कई किसान रुचि दिखा रहे हैं। पूर्व में रेशम उत्पादन के लिए कराए गए ट्रायल से किसानों की संख्या बढ़ रही है। उम्मीद है जल्द ही क्षेत्र के कई गांवों में रेशम उत्पादन किसानों की आय का अहम जरिया बनेगा। - कमलेश कुमार, प्रभारी अधिकारी रेशम विभाग, बागेश्वर।