{"_id":"6a108ec98e2349a0cc01077d","slug":"non-payment-of-salaries-forces-employees-to-leave-the-company-bageshwar-news-c-231-1-shld1005-125090-2026-05-22","type":"story","status":"publish","title_hn":"Bageshwar News: वेतन नहीं मिलने से कर्मचारी कंपनी छोड़ने के लिए मजबूर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Bageshwar News: वेतन नहीं मिलने से कर्मचारी कंपनी छोड़ने के लिए मजबूर
Fri, 22 May 2026 10:43 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बागेश्वर
संवाद न्यूज एजेंसी, बागेश्वर
Updated Fri, 22 May 2026 10:43 PM IST
विज्ञापन
बागेश्वर। जिले के एकमात्र बड़े उद्योग मैग्नेसाइट कंपनी पर छाए संकट के बादल छंटने का नाम नहीं ले रहे हैं। एक साल तक बंद रहने के बाद विगत फरवरी में हाईकोर्ट के आदेश के बाद कंपनी में कामकाज शुरू हो गया था। बावजूद इसके कर्मचारियों काे अब भी वेतन नहीं मिल रहा है। आर्थिक मंदी का सामना कर टूट चुके कर्मचारी नौकरी छोड़ने लगे हैं।
1971 में खुली मैग्नेसाइट कंपनी से करीब 235 स्थायी और 225 अस्थायी कर्मचारियों को प्रत्यक्ष रोजगार मिलता है। क्षेत्र के सात-आठ गांवों के लोगों का जीवन परोक्ष रूप से कंपनी पर निर्भर है। पिछले साल जनवरी में खनन पर रोक लगने के कारण कंपनी का कामकाज भी बंद हो गया था। तब भी कंपनी के कर्मचारियों को तीन महीने का वेतन नहीं मिला था। कंपनी बंद होने के बाद दिक्कत अधिक बढ़ गई।
अब कंपनी को खुले चार महीने होने को हैं लेकिन कर्मचारियों की परेशानी बनी हुई है। हालात ये हैं कि अब तक 25 से अधिक कर्मचारी नौकरी छोड़ चुके हैं।
कोट
कंपनी में काम करने वाले कर्मचारियों को अक्तूबर 2024 से वेतन नहीं मिला है। आंदोलन के बाद कंपनी ने पीएफ और बोनस की राशि दी। होली के समय पांच हजार रुपये प्रत्येक कर्मचारी को वेतन मिला था। वेतन अभी बाकी है। आर्थिक तंगी के कारण कर्मचारी काम छोड़ने के लिए मजबूर हो रहे हैं। अब तक करीब 25 कर्मचारी और पांच अधिकारी नौकरी छोड़ चुके हैं। - शांति लाल, पूर्व उपाध्यक्ष/कर्मचारी, श्रमिक यूनियन
विज्ञापन
कोट
मैग्नेसाइट कंपनी में नियमित वेतन नहीं मिलने के कारण खर्चा चलाना मुश्किल हो गया था। हालात नहीं सुधरे तो पिछले साल जुलाई में काम छोड़कर जाना पड़ा। अब भी मेरा कंपनी में दो महीने का वेतन और प्रबंधक को मिलने वाले अन्य खर्चों का रुपया अब भी बाकी है। प्रबंधन को फोन, मैसेज और मेल करने पर भी भुगतान नहीं हो रहा है। - देवाशीष प्रतिहरि, पूर्व प्रबंधक, मयूरभंज, उड़ीसा
कोट
23 साल तक कंपनी में काम किया, जब परिवार का भरण-पोषण करना मुश्किल हो गया तो नौकरी छोड़नी पड़ी। क्षेत्र में रोजगार के साधन भी नहीं हैं। अब गांव छोड़कर बड़े शहरोंं की तरफ जाना मजबूरी हो गया है। दुख इस बात का है कि जिस कंपनी ने क्षेत्रवासियों को वर्षों रोजगार दिया, उस पर अस्तित्व का संकट गहरा रहा है। - मनोज तिवारी, पूर्व कर्मचारी, मैग्नेसाइट कंपनी, काफलीगैर
कोट
24 साल तक कंपनी में सेवा देने के बाद आर्थिक दिक्कतों के कारण नौकरी छोड़नी पड़ी। बिना वेतन के काम करना, घर खर्च चलाना संभव ही नहीं था। अन्य खर्चों के लिए उधारी लेनी पड़ रही थी। - चंद्रशेखर भट्ट, पूर्व सुपरवाइजर, मैग्नेसाइट कंपनी, नैनीताल
कोट
कंपनी आर्थिक संकट के दौर से गुजर रही है। कुछ कर्मचारी काम छोड़कर भी जा चुके हैं। हालांकि अब स्थितियां धीरे-धीरे सामान्य होने लगी हैं, लेकिन अभी पहले की तरह रेवेन्यू हासिल करने में समय लगेगा। उपलब्ध बजट के अनुसार कर्मचारियों को वेतन दिया जा रहा है। - योगेश शर्मा, एमडी, मैग्नेसाइट कंपनी झिरौली
विज्ञापन
1971 में खुली मैग्नेसाइट कंपनी से करीब 235 स्थायी और 225 अस्थायी कर्मचारियों को प्रत्यक्ष रोजगार मिलता है। क्षेत्र के सात-आठ गांवों के लोगों का जीवन परोक्ष रूप से कंपनी पर निर्भर है। पिछले साल जनवरी में खनन पर रोक लगने के कारण कंपनी का कामकाज भी बंद हो गया था। तब भी कंपनी के कर्मचारियों को तीन महीने का वेतन नहीं मिला था। कंपनी बंद होने के बाद दिक्कत अधिक बढ़ गई।
विज्ञापन
अब कंपनी को खुले चार महीने होने को हैं लेकिन कर्मचारियों की परेशानी बनी हुई है। हालात ये हैं कि अब तक 25 से अधिक कर्मचारी नौकरी छोड़ चुके हैं।
कोट
कंपनी में काम करने वाले कर्मचारियों को अक्तूबर 2024 से वेतन नहीं मिला है। आंदोलन के बाद कंपनी ने पीएफ और बोनस की राशि दी। होली के समय पांच हजार रुपये प्रत्येक कर्मचारी को वेतन मिला था। वेतन अभी बाकी है। आर्थिक तंगी के कारण कर्मचारी काम छोड़ने के लिए मजबूर हो रहे हैं। अब तक करीब 25 कर्मचारी और पांच अधिकारी नौकरी छोड़ चुके हैं। - शांति लाल, पूर्व उपाध्यक्ष/कर्मचारी, श्रमिक यूनियन
विज्ञापन
कोट
मैग्नेसाइट कंपनी में नियमित वेतन नहीं मिलने के कारण खर्चा चलाना मुश्किल हो गया था। हालात नहीं सुधरे तो पिछले साल जुलाई में काम छोड़कर जाना पड़ा। अब भी मेरा कंपनी में दो महीने का वेतन और प्रबंधक को मिलने वाले अन्य खर्चों का रुपया अब भी बाकी है। प्रबंधन को फोन, मैसेज और मेल करने पर भी भुगतान नहीं हो रहा है। - देवाशीष प्रतिहरि, पूर्व प्रबंधक, मयूरभंज, उड़ीसा
कोट
23 साल तक कंपनी में काम किया, जब परिवार का भरण-पोषण करना मुश्किल हो गया तो नौकरी छोड़नी पड़ी। क्षेत्र में रोजगार के साधन भी नहीं हैं। अब गांव छोड़कर बड़े शहरोंं की तरफ जाना मजबूरी हो गया है। दुख इस बात का है कि जिस कंपनी ने क्षेत्रवासियों को वर्षों रोजगार दिया, उस पर अस्तित्व का संकट गहरा रहा है। - मनोज तिवारी, पूर्व कर्मचारी, मैग्नेसाइट कंपनी, काफलीगैर
कोट
24 साल तक कंपनी में सेवा देने के बाद आर्थिक दिक्कतों के कारण नौकरी छोड़नी पड़ी। बिना वेतन के काम करना, घर खर्च चलाना संभव ही नहीं था। अन्य खर्चों के लिए उधारी लेनी पड़ रही थी। - चंद्रशेखर भट्ट, पूर्व सुपरवाइजर, मैग्नेसाइट कंपनी, नैनीताल
कोट
कंपनी आर्थिक संकट के दौर से गुजर रही है। कुछ कर्मचारी काम छोड़कर भी जा चुके हैं। हालांकि अब स्थितियां धीरे-धीरे सामान्य होने लगी हैं, लेकिन अभी पहले की तरह रेवेन्यू हासिल करने में समय लगेगा। उपलब्ध बजट के अनुसार कर्मचारियों को वेतन दिया जा रहा है। - योगेश शर्मा, एमडी, मैग्नेसाइट कंपनी झिरौली