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Bageshwar News: नौ महीने बाद भी नहीं हो सकी झूला पुल की मरम्मत
Sat, 31 May 2025 12:46 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बागेश्वर
संवाद न्यूज एजेंसी, बागेश्वर
Updated Sat, 31 May 2025 12:46 AM IST
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अगस्त 2024 में रामगंगा नदी का जलस्तर बढ़ने से टूट गया था पुल का एप्रोच, 500 की आबादी की आवाजाही प्रभावित
कपकोट (बागेश्वर)। बिचला दानपुर के कालापैरकापड़ी गांव को पिथौरागढ़ जिले के भैंसखाल से जोड़ने वाले झूला पुल की नौ महीने बाद भी मरम्मत नहीं हो सकी है। पिछले साल नदी का जलस्तर बढ़ने के बाद एप्रोच टूटने से पुल एक तरफ झुक गया था। गांव में रहने वाली 500 की आबादी को नदी पार करने के लिए एक किमी दूर जाना पड़ रहा है।
अगस्त 2024 में भारी बारिश के बाद रामगंगा नदी के उफान में पुल को नुकसान हुआ था। एप्रोच टूटने के बाद पुल के किनारे लगी लोहे की सपोर्टिंग वायर नदी के साथ बहकर आए मलबे में दब गई थी। क्षतिग्रस्त होने के बाद पुल से आवाजाही बाधित हो गई। ग्रामीण दीपक कोरंगा, श्याम सिंह आदि ने बताया कि इस झूला पुल का निर्माण वर्ष 2018 में हुआ था। गांव के 45 परिवार इसी पुल से नाचनी बाजार जाते थे। पुल क्षतिग्रस्त होने के बाद से लोगों को भकुना तोक में बने पुल से आवाजाही करनी पड़ रही है। जहां तक आने-जाने में दो किमी की दूरी तय करनी पड़ती है।
पूर्व जिपं अध्यक्ष हरीश ऐठानी ने बताया कि क्षेत्र के गांवों की मुख्य बाजार पिथौरागढ़ जिले की नाचनी हैं। गांव के अधिकांश बच्चे पढ़ने भी वहीं जाते हैं। बावजूद इसके पुल की मरम्मत नहीं की जा रही। उन्होंने कहा कि मात्र छह साल में पुल कैसे गिरने के कगार पर पहुंच गया, इसकी भी जांच की जानी चाहिए।
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कोट-रामगंगा नदी पर बने 92 मीटर स्पान के झूला पुल एप्रोच वॉल टूटने के बाद दो लाख रुपये से प्रोटेक्शन का कार्य करवाया गया है। क्षतिग्रस्त हुए पुल का आकलन कर आगणना भी शासन को भेजा गया है। शासन के निर्देश पर पंतनगर विश्वविद्यालय की टेक्निकल टीम ने 20 मई 2025 को इसकी जांच की है। जांच रिपोर्ट के आने का इंतजार है। -एके पटेल, ईई लोनिवि कपकोट
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कपकोट (बागेश्वर)। बिचला दानपुर के कालापैरकापड़ी गांव को पिथौरागढ़ जिले के भैंसखाल से जोड़ने वाले झूला पुल की नौ महीने बाद भी मरम्मत नहीं हो सकी है। पिछले साल नदी का जलस्तर बढ़ने के बाद एप्रोच टूटने से पुल एक तरफ झुक गया था। गांव में रहने वाली 500 की आबादी को नदी पार करने के लिए एक किमी दूर जाना पड़ रहा है।
अगस्त 2024 में भारी बारिश के बाद रामगंगा नदी के उफान में पुल को नुकसान हुआ था। एप्रोच टूटने के बाद पुल के किनारे लगी लोहे की सपोर्टिंग वायर नदी के साथ बहकर आए मलबे में दब गई थी। क्षतिग्रस्त होने के बाद पुल से आवाजाही बाधित हो गई। ग्रामीण दीपक कोरंगा, श्याम सिंह आदि ने बताया कि इस झूला पुल का निर्माण वर्ष 2018 में हुआ था। गांव के 45 परिवार इसी पुल से नाचनी बाजार जाते थे। पुल क्षतिग्रस्त होने के बाद से लोगों को भकुना तोक में बने पुल से आवाजाही करनी पड़ रही है। जहां तक आने-जाने में दो किमी की दूरी तय करनी पड़ती है।
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पूर्व जिपं अध्यक्ष हरीश ऐठानी ने बताया कि क्षेत्र के गांवों की मुख्य बाजार पिथौरागढ़ जिले की नाचनी हैं। गांव के अधिकांश बच्चे पढ़ने भी वहीं जाते हैं। बावजूद इसके पुल की मरम्मत नहीं की जा रही। उन्होंने कहा कि मात्र छह साल में पुल कैसे गिरने के कगार पर पहुंच गया, इसकी भी जांच की जानी चाहिए।
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कोट-रामगंगा नदी पर बने 92 मीटर स्पान के झूला पुल एप्रोच वॉल टूटने के बाद दो लाख रुपये से प्रोटेक्शन का कार्य करवाया गया है। क्षतिग्रस्त हुए पुल का आकलन कर आगणना भी शासन को भेजा गया है। शासन के निर्देश पर पंतनगर विश्वविद्यालय की टेक्निकल टीम ने 20 मई 2025 को इसकी जांच की है। जांच रिपोर्ट के आने का इंतजार है। -एके पटेल, ईई लोनिवि कपकोट