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37 हजार महिलाओं के लिए सिर्फ एक डॉक्टर

Sun, 14 May 2017 01:32 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, बागेश्वर। 
अमर उजाला ब्यूरो, बागेश्वर।  Updated Sun, 14 May 2017 01:32 AM IST
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No doctor
92 base hospital - फोटो : File Photo

बागेश्वर। विकास खंड कपकोट की कुल आबादी में से आधी संख्या महिलाओं की है। सरकारें महिला सशक्तीकरण के तमाम दावे करती आ रही हैं। बावजूद इस ब्लॉक में महिलाओं की स्वास्थ्य सुविधा के लिए यहां सिर्फ एक ही महिला रोग विशेषज्ञ नहीं है।

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क्षेत्र में एक भी लेडी डॉक्टर नहीं है। इससे खास तौर पर गर्भवती और प्रसव पीड़िताओं को कई दिक्कतें झेलनी पड़ रही हैं। दूरस्थ क्षेत्र के अस्पतालों में महिला डॉक्टर न होने के कारण वहां की महिलाओं को 15 से 40 किमी दूर तहसील मुख्यालय स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कपकोट की दौड़ लगानी पड़ती है। 
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2011 की जनगणना के अनुसार कपकोट विकास खंड की जनसंख्या 74954 है। इसमें से आधी आबादी महिलाओं की है। महिलाओं की संख्या के हिसाब है। यहां अस्पतालों में महिला डॉक्टर की तैनाती नहीं है। सरकारें महिलाओं के स्वास्थ्य के प्रति कितनी संजीदा रही हैं इसका अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है।
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तहसील मुख्यालय पर स्थित पीपीपी मोड संचालित सीएचसी में ही महिला डॉक्टर तैनात हैं लेकिन वहां भी लेडी डॉक्टर नहीं है। शासन ने शामा, लोहारखेत, पोथिंग, बदिकयाकोट, फरसाली में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, उद्यमस्थल, जलमानी, खाती, लोहारखेत में एसएडी की स्थापना कर रखी है, लेकिन इनमें से किसी में भी महिला डॉक्टर की तैनाती नहीं है।

महिलाएं अपने रोगों को पुरुष डॉक्टर को बताने में हिचकिचाती हैं। संपन्न घरों की महिलाएं तो दूसरे जिले के अस्पतालों में जाकर अपना इलाज करा लाती हैं लेकिन गरीब घरों की महिलाएं अपने रोगों को दबाकर रखती हैं। ऐसी स्थिति में उनके छोटे-छोटे रोग कई बार लाइलाज हो जाते हैं।


विभिन्न संगठनों से जुड़े लोगों में हिमालय पर्यावरण समिति भराड़ी के सचिव प्रेम सिंह धर्मशक्तू, व्यापार मंडल कपकोट के अध्यक्ष तारा सिंह कपकोटी और मां भगवती सेवा समिति कपकोट के अध्यक्ष नंदन कपकोटी समेत कई अन्य लोगों ने शासन और स्वास्थ्य विभाग से अस्पतालों में पर्याप्त मात्रा में महिला डाक्टरों और गाइनी की तैनाती शीघ्र करने की मांग की है।
 

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