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जिला गठन के 22 साल बाद भी काफलीगैर तहसील को नहीं मिला सीएचसी
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बागेश्वर का कठपुड़ियाछीना कस्बा। विज्ञप्ति
- फोटो : BAGESHWAR
बागेश्वर। जिला गठन के 24 साल बीत जाने के बाद भी काफलीगैर तहसील क्षेत्र को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं की दरकार है। करीब 45 हजार की आबादी होने के बावजूद क्षेत्र में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) नहीं खुल सका है। धूराफाट, रीठागाड़, खरही मंडल, देवलधार क्षेत्र के लोगों को बेहतर इलाज के लिए बागेश्वर और अल्मोड़ा के अस्पतालों में जाना पड़ता है।
काफलीगैर तहसील क्षेत्र के बोहाला, असों, काफलीगैर, छानी, दाणोंछीना में चार प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) बने हैं, जबकि देवलधार क्षेत्र में एक पीएचसी बी टाइप स्थापित है। हालांकि इन स्वास्थ्य केंद्रों में इलाज की समुचित सुविधाएं नहीं मिलती हैं। क्षेत्रवासियों को खून की जांच कराने से लेकर एक्सरे कराने तक जिला मुुख्यालय की दौड़ लगानी पड़ती है। क्षेत्र के कई दूरस्थ गांवों से बागेश्वर आने तक मरीजों की हालत अधिक बिगड़ जाती है। सबसे अधिक परेशानी गर्भवती महिलाओं को उठानी पड़ती है। गर्भवती महिलाओं को स्वास्थ्य जांच से लेकर प्रसव कराने तक के लिए जिला अस्पताल आना पड़ता है।
जिला गठन के बाद से क्षेत्र में सीएचसी की मांग उठती रही है। क्षेत्रवासी काफलीगैर या छानी के पीएचसी के उच्चीकरण करने के लिए कई बार आवाज उठाते रहे हैं। हालांकि शासन-प्रशासन की ओर से इस पर कोई कार्यवाही नहीं की गई है। क्षेत्रवासियों का कहना है कि ऐसे समय में जब महामारी का प्रकोप है। जिलेभर में स्वास्थ्य सुविधाओं की बेहतरी के लिए कार्य किया जा रहा है। काफलीगैर तहसील क्षेत्र में भी एक सीएचसी खोलने का मार्ग प्रशस्त किया जाना चाहिए।
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काफलीगैर तहसील क्षेत्र के लोगों का दुर्भाग्य है कि राज्य निर्माण के 21 साल बीतने के बाद भी स्वास्थ्य सुविधाओं की मांग कर रहे हैं। क्षेत्र के पीएचसी सर्दी, जुकाम जैसी बीमारियों का इलाज तो कर सकते हैं, लेकिन जांच कराने के लिए जिला अस्पताल की दौड़ लगानी पड़ती है। कई बार समय पर स्वास्थ्य सुविधा न मिलने से अप्रिय घटनाएं भी घट चुकी हैं। - नवल किशोर भट्ट, सामाजिक कार्यकर्ता छानी।
काफलीगैर तहसील के देवलधार क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं के नाम पर मात्र एक बी टाइप प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बना है। पालड़ीछीना, जैनकरास आदि दूरस्थ गांवों से लोगों को जिला अस्पताल जाने तक काफी समय लगता है। अगर क्षेत्र में सीएचसी खुले और स्वास्थ्य सुविधाएं बेहतर हो जाएं तो लोगों को इलाज के लिए भटकना नहीं पड़ेगा। - कमल टम्टा, सामाजिक कार्यकर्ता, चौगांवछीना।
पीएचसी के सहारे लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया नहीं हो सकती है। शासन-प्रशासन को कांडा, कपकोट, गरुड़ तहसील की तर्ज पर काफलीगैर तहसील क्षेत्र में भी सीएचसी खुलवाना चाहिए। काफलीगैर के केंद्र में बने पीएचसी छानी, दाणोंछीना को अगर सीएचसी बना दिया जाए तो पूरे तहासील क्षेत्र को इसका लाभ मिल सकता है। - नरेंद्र सिंह रावत, सामाजिक कार्यकर्ता, कठपुड़ियाछीना।
काफलीगैर तहसील क्षेत्र की आबादी सीएचसी के मानकों को पूरा नहीं करती है। पूर्व में सीएचसी बनाने का प्रस्ताव विभाग के पास आया था, जिसमें क्षेत्र की आबादी सीएचसी के तय मानक 30 हजार से कम थी। अगर क्षेत्रवासी 30 हजार से अधिक आबादी का प्रमाण उपलब्ध कराएं तो विभाग काफलीगैर क्षेत्र में सीएचसी खुलवाने का प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजेगा। - डॉ. सुनीता टम्टा, सीएमओ, बागेश्वर।
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काफलीगैर तहसील क्षेत्र के बोहाला, असों, काफलीगैर, छानी, दाणोंछीना में चार प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) बने हैं, जबकि देवलधार क्षेत्र में एक पीएचसी बी टाइप स्थापित है। हालांकि इन स्वास्थ्य केंद्रों में इलाज की समुचित सुविधाएं नहीं मिलती हैं। क्षेत्रवासियों को खून की जांच कराने से लेकर एक्सरे कराने तक जिला मुुख्यालय की दौड़ लगानी पड़ती है। क्षेत्र के कई दूरस्थ गांवों से बागेश्वर आने तक मरीजों की हालत अधिक बिगड़ जाती है। सबसे अधिक परेशानी गर्भवती महिलाओं को उठानी पड़ती है। गर्भवती महिलाओं को स्वास्थ्य जांच से लेकर प्रसव कराने तक के लिए जिला अस्पताल आना पड़ता है।
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जिला गठन के बाद से क्षेत्र में सीएचसी की मांग उठती रही है। क्षेत्रवासी काफलीगैर या छानी के पीएचसी के उच्चीकरण करने के लिए कई बार आवाज उठाते रहे हैं। हालांकि शासन-प्रशासन की ओर से इस पर कोई कार्यवाही नहीं की गई है। क्षेत्रवासियों का कहना है कि ऐसे समय में जब महामारी का प्रकोप है। जिलेभर में स्वास्थ्य सुविधाओं की बेहतरी के लिए कार्य किया जा रहा है। काफलीगैर तहसील क्षेत्र में भी एक सीएचसी खोलने का मार्ग प्रशस्त किया जाना चाहिए।
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काफलीगैर तहसील क्षेत्र के लोगों का दुर्भाग्य है कि राज्य निर्माण के 21 साल बीतने के बाद भी स्वास्थ्य सुविधाओं की मांग कर रहे हैं। क्षेत्र के पीएचसी सर्दी, जुकाम जैसी बीमारियों का इलाज तो कर सकते हैं, लेकिन जांच कराने के लिए जिला अस्पताल की दौड़ लगानी पड़ती है। कई बार समय पर स्वास्थ्य सुविधा न मिलने से अप्रिय घटनाएं भी घट चुकी हैं। - नवल किशोर भट्ट, सामाजिक कार्यकर्ता छानी।
काफलीगैर तहसील के देवलधार क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं के नाम पर मात्र एक बी टाइप प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बना है। पालड़ीछीना, जैनकरास आदि दूरस्थ गांवों से लोगों को जिला अस्पताल जाने तक काफी समय लगता है। अगर क्षेत्र में सीएचसी खुले और स्वास्थ्य सुविधाएं बेहतर हो जाएं तो लोगों को इलाज के लिए भटकना नहीं पड़ेगा। - कमल टम्टा, सामाजिक कार्यकर्ता, चौगांवछीना।
पीएचसी के सहारे लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया नहीं हो सकती है। शासन-प्रशासन को कांडा, कपकोट, गरुड़ तहसील की तर्ज पर काफलीगैर तहसील क्षेत्र में भी सीएचसी खुलवाना चाहिए। काफलीगैर के केंद्र में बने पीएचसी छानी, दाणोंछीना को अगर सीएचसी बना दिया जाए तो पूरे तहासील क्षेत्र को इसका लाभ मिल सकता है। - नरेंद्र सिंह रावत, सामाजिक कार्यकर्ता, कठपुड़ियाछीना।
काफलीगैर तहसील क्षेत्र की आबादी सीएचसी के मानकों को पूरा नहीं करती है। पूर्व में सीएचसी बनाने का प्रस्ताव विभाग के पास आया था, जिसमें क्षेत्र की आबादी सीएचसी के तय मानक 30 हजार से कम थी। अगर क्षेत्रवासी 30 हजार से अधिक आबादी का प्रमाण उपलब्ध कराएं तो विभाग काफलीगैर क्षेत्र में सीएचसी खुलवाने का प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजेगा। - डॉ. सुनीता टम्टा, सीएमओ, बागेश्वर।