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Hindi News ›   Uttarakhand ›   Bageshwar News ›   Never have the system been able to overcome the weather, the farmers

कभी सिस्टम तो कभी मौसम नहीं उबरने दे रहा किसानों को 

Thu, 22 Jun 2017 10:33 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो  बागेश्वर।
अमर उजाला ब्यूरो  बागेश्वर। Updated Thu, 22 Jun 2017 10:33 PM IST
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हाड़ तोड़ मेहनत कर फसल उगाने वाले किसानों की माली हालत मैदान से लेकर पहाड़ तक समान है। सरकार की ओर से किसानों को आर्थिक संकट से उबारने के लिए तमाम ऋण योजनाएं चलाई जा रही हैं, लेकिन कभी सिस्टम तो कभी मौसम की मार किसानों को ऋण से उबरने नहीं होने देती। यही कारण है कि बागेश्वर जिले में करीब 54 हजार किसानों में से महज पांच प्रतिशत किसान ऐसे हैं, जिनकी गुजर खेती से होती है। बागेश्वर जिला कृषि और उद्यानीकरण के लिए मुफीद है। यहां के घाटी वाले क्षेत्रों में धान और गेहूं तो ऊंचाई वाले इलाकों में आलू, राजमा की अच्छी पैदावार होती है। इसके बावजूद किसानों को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार की ओर से सिंचाई और विपणन जैसी व्यवस्थाओं पर कोई ध्यान नहीं दिया गया।

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जिले की पांच नहरों का अस्तित्व समाप्त हो गया है। अधिकांश नहरें वर्षभर सूखी पड़ी रहती हैं। ज्यादातर हाइड्रम योजनाओं का लाभ किसानों को नहीं मिल रहा है। हाल के वर्षों में मौसम में आई तब्दीली ने किसानों को काफी निराश किया है। जिले में पिछले तीन साल से रबी की फसल पर सूखे की मार पड़ रही है। जबकि, ऊंचाई वाले क्षेत्रों में ओलावृष्टि से आलू और राजमा की खेती को भारी नुकसान पहुंच रहा है। कभी सूखा तो कभी अतिवृष्टि की मार से बचने वाली फसलों को जंगली जानवर बर्बाद कर रहे हैं। बंदर और सुअरों द्वारा फसलों को उजाड़ने की आवाज विधानसभा तक में गूंजने के बाद भी कोई ठोस उपाय नहीं किए गए हैं। चकबंदी की कोशिशें भी कामयाब नहीं हो सकी हैं।
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अच्छा उत्पादन होने की उम्मीद में किसान हर साल ऋण लेते हैं, लेकिन फसलों का उत्पादन प्रभावित होने से यह कर्ज उनके लिए परेशानी का सबब बन जाता है। जिले के गरुड़ में धान की और कपकोट में आलू की पैदावार कर करीब पांच प्रतिशत किसान अपनी आजीविका चलाते हैं। धीरज चंद्र जोशी और बहादुर सिंह ने बताया कि बंदर और सुअर खेती को उजाड़ रहे हैं। लाखों की नहरें बनी हैं, लेकिन खेतों तक पानी नहीं पहुंच पाता है। ऐसे में ऋण लेकर फसलें बोते भी हैं तो वह बर्बाद हो जाती हैं। सरकार को किसानों को खाद और बीज की निशुल्क व्यवस्था करनी चाहिए। 
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बागेश्वर जिले में 3847 किसानों ने लिया है ऋण 
जिले में वर्ष 2016-17 में 3847 किसानों ने 18 समितियों के माध्यम से 1576.23 लाख का ऋण लिया। समय पर लोन चुकता नहीं करने से यह ऋण बढ़कर 1687.01 लाख पहुंच गया है। सहायक निबंधक देवेंद्र जोशी ने बताया कि समितियों के माध्यम से किसानों को धान, गेहूं, आलू, अदरक आदि के लिए फसली ऋण दिए जाते हैं। इस वर्ष दिए गए ऋण के लक्ष्य के विपरीत अभी तक 1146.80 लाख के ऋण की वसूली हो चुकी है। करीब 541 लाख रुपये ऋण की धनराशि अभी वसूली जानी शेष है। सचिवों के माध्यम से इसकी वसूली की जा रही है। समय पर ऋण जमा नहीं करने पर नोटिस जारी किए जाते हैं। 


किसानों को सरकारी योजनाओं का लाभ देने के लिए विभिन्न योजनाएं चलाई जा रही हैं। जिले में अधिकांश किसानों के पास छोटी जोत है। 50 नाली या इससे अधिक भूमि वाले किसानों की संख्या सीमित है। छोटी जोत होने के कारण किसान कॉमर्शियल नहीं हो सकते हैं। ऋण लेकर खेती करने वाले किसानों को मौसम या अन्य कारणों से यदि फसलों का नुकसान होता है तो इसके लिए बीमा योजना शुरू की गई है। इसका प्रचार-प्रसार भी किया जा रहा है। 
- विजय प्रकाश मौर्य, मुख्य कृषि अधिकारी, बागेश्वर। 

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