फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Bageshwar News ›   National conference started in SSJ campus.

पहचान और अस्मिता से जुड़ी होती है मातृभाषा: डॉ. बिष्ट

Fri, 10 Mar 2023 11:53 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बागेश्वर
संवाद न्यूज एजेंसी, बागेश्वर Updated Fri, 10 Mar 2023 11:53 PM IST
विज्ञापन
National conference started in SSJ campus.
बागेश्वर के डायट में आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी में उपस्थित बुद्धिजीवी और शोधार्थी। संवाद
बागेश्वर। जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान में दो दिनी राष्ट्रीय संगोष्ठी का आगाज हुआ। संगोष्ठी में देशभर के कई प्रांतों से आए शोधार्थी अपने शोध पत्र प्रस्तुत करेंगे और बुद्धिजीवी संगोष्ठी के विषय शिक्षा में मातृभाषा: अवसर एवं चुनौतियां पर चिंतन-मनन कर रहे हैं।
विज्ञापन

शुक्रवार को राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ मुख्य अतिथि सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. जेएस बिष्ट किया। उन्होंने कहा कि जन्म से हम जिस भाषा का प्रयोग करते हैं वही हमारी मातृभाषा होती है। इसी भाषा के माध्यम से हमें सभी संस्कार और व्यवहार प्राप्त होते हैं। यही भाषा हमारी पहचान और अस्मिता से जुड़ी होती है। डायट प्राचार्य डॉ. शैलेंद्र धपोला ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत लुप्त होती क्षेत्रीय भाषाओं को बचाने में मदद मिलेगी और मातृभाषा को अधिक महत्व मिलेगा।
विज्ञापन

मुख्य वक्ता दिल्ली विवि में हिंदी विभाग के प्रोफेसर आशुतोष कुमार ने कहा कि बच्चे अन्य भाषा की बजाय अपनी मातृभाषा में विषय को बेहतर ढंग से समझ सकते हैं। मातृभाषा मौलिक लेखन, चिंतन या रचनात्मकता को पैदा करती है और विश्व में मौलिकता का विशेष महत्व है। उन्होंने राजकाज और सभी प्रकार के शासकीय कार्यों में अंग्रेजी के उपयोग पर चिंता जताई। कार्यक्रम समन्वयक डॉ. केएस रावत और डॉ. राजीव जोशी ने बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का उद्देश्य समग्र, बहु विषयक और बहुभाषिक दृष्टिकोण के माध्यम से भारतीय शिक्षा प्रणाली में एक विशिष्ट परिवर्तन लाना है। गोष्ठी में मातृ भाषा शिक्षण और मातृभाषा में शिक्षण के स्तर पर हिंदी के अलावा अन्य देशी भाषा या स्थानीय बोली भाषा का शिक्षा में कैसे प्रयोग हो रहा है, इस पर मंथन किया जा रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन

गोष्ठी में एससीईआरटी उत्तराखंड के अपर निदेशक आरडी शर्मा, सीसीआरटी के पूर्व निदेशक गिरीश चंद्र जोशी, प्रभारी सीईओ चक्षुष्पति अवस्थी ने भी विचार रखे। कार्यक्रम का संचालन रवि कुमार जोशी, डॉ. प्रेम सिंह मावड़ी, संदीप कुमार जोशी और डॉ. बीडी पांडेय ने किया। इस मौके पर डॉ. सीएम जोशी, डॉ. हरीश जोशी, डॉ. मनोज कुमार, डॉ. मनोज पांडे, पूजा तिवारी, तनुजा जोशी, दीप चंद्र जोशी, चंद्र प्रकाश मिश्रा आदि मौजूद रहे।


17 शोधार्थियों ने प्रस्तुत किए शोध पत्र
बागेश्वर। संगोष्ठी के पहले दिन जम्मू कश्मीर, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, गुजरात आदि प्रदेशों के डॉ. शंकर सिंह, डॉ. केएन बिजलवान, डॉ. पिंकी पांडे, डॉ. रोहिताश कुमार, डॉ. डीएन भट्ट, मदन सुयाल, डॉ. नेहा भाकुनी, डॉ. कृपाल सिंह, डॉ. केएन कांडपाल, प्रमोद कुमार, जगदीश दफौटी, अनुराग पलड़िया, संगीता फरासी, डॉ. कृपाल सिंह समेत 17 शोधार्थियों ने शोध पत्र प्रस्तुत किए।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed