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नंदा महोत्सव पर कोरोना भारी, साधारण तरीके से मनाने की हो रही तैयारी

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Sun, 26 Jul 2020 10:45 PM IST
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Nanda Festival  will be celebrated in a simple way
अल्मोड़ा में निकाला गया नंदा देवी का डोला। फाइल फोटो
बागेश्वर। कोरोना महामारी को देखते हुए इस वर्ष नंदा महोत्सव भी बेहद साधारण तरीके से मनाया जाएगा। रामलीला कमेटी ने तय किया कि इस बार जनता के प्रतिभाग करने पर पाबंदी रहेगी। इधर, रामलीला महोत्सव के आयोजन को लेकर अगली बैठक में निर्णय लिया जाएगा।
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रविवार को रामलीला कमेटी के अध्यक्ष मनोज पांडे के नेतृत्व में हुई बैठक में वर्ष 2020 में होने वाले मां नंदा देवी महोत्सव और रामलीला महोत्सव को लेकर चर्चा की गई। इसमें विचार विमर्श के बाद इस वर्ष मां नंदा देवी महोत्सव को कोरोना महामारी के चलते सामान्य तरीके से मनाने का निर्णय लिया गया। कमेटी के नवीन साह ने बताया कि 23 अगस्त से शुरू होने वाले महोत्सव में इस बार कोरोना के कारण नंदा देवी के डोले का नगर भ्रमण नहीं होगा। मूर्ति निर्माण के बाद 28 अगस्त को कोविड-19 की गाइडलाइन का पालन करते हुए रामलीला तालीम भवन में मां नंदा की पूजा की जाएगी। इसमें जनता के प्रतिभाग करने पर पाबंदी रहेगी।
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इसके बाद ब्रह्म कपाली पत्थर के पास डोले का विसर्जन किया जाएगा। महामारी को देखते हुए इस बार भंडारे और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के आयोजन को भी रद्द किया गया है। रामलीला महोत्सव के आयोजन को लेकर अगली बैठक में निर्णय लेने पर सहमति बनी। बैठक में पंकज पांडे, उमेश चंद्र साह, दीप लाल साह, हरीश सोनी, अमित साह, नवीन साह, भुवन चंद्र जोशी, कंचन साह, विजय रावत, पूरन सिंह पालनी, गाविंद जगाती, हेमंत साह आदि मौजूद थे।
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न सांस्कृतिक कार्यक्रम न भीड़-भाड़
अल्मोड़ा। अल्मोड़ा में प्रसिद्ध नंदादेवी मेला आगामी 23 अगस्त से सादगी के साथ मनाया जाएगा। ताकि अधिक भीड़ एकत्र नहीं हो सके। महोत्सव में इस साल सांस्कृतिक कार्यक्रम भी नहीं होंगे। नंदा देवी मेला और पूजन को लेकर बीते दिनों यहां हुई मां नंदा देवी मंदिर और नंदा गीता भवन कमेटी की बैठक में तय हुआ कि पूजा परंपरागत तरीके से होगी। बैठक में बताया गया कि 24 अगस्त को षष्ठी के दिन केले के खामों को शाम छह बजे मंदिर परिसर से आमंत्रण देने के लिए जाएंगे। 25 अगस्त की सुबह केले के खामों को मंदिर परिसर में लाया जाएगा। मां नंदा सुनंदा की मूर्ति का निर्माण और प्राण प्रतिष्ठा की जाएगी। 26 अगस्त को नंदाष्टमी मनाई जाएगी। 27 अगस्त को नवमी होगी। इस साल पांच सदस्यों की ही छोलिया टीम को बुलाया जाएगा। 28 अगस्त को शाम चार बजे मां नंदा सुनंदा की शोभा यात्रा निकलेगी। डोबानौला में मां नंदा सुनंदा की मूर्ति का विसर्जन किया जाएगा। इसमें कोरोना गाइडलाइन का पालन किया जाएगा।
कोरोना के चलते टले बड़े आयोजन
चंपावत में पूर्णागिरी मेला, नैनीताल में कैंची धाम का मेला, जागेश्वर में श्रावणी मेला, वायु रथ मेला, चैत्वला मेला और देवीधुरा की बग्वाल समेत कई छोटे-मोटे आयोजन इस वर्ष कोरोना की भेंट चढ़ गए। इन आयोजनों के नहीं जहां लाखों रुपये का कारोबार प्रभावित हुआ वहीं बड़ी संख्या में लोग खासतौर पर इन मेलों में भाग लेने के लिए दूसरे राज्यों से अपने गांव आते थे और एक दूसरे से मिलते जुलते थे।
देवीधुरा में बगवाल के दिन बंद रहेगा बाजार
बगवाल की परंपरा को निभाने को फर्रे के साथ मंदिर की परिक्रमा होगी
चंपावत। कोरोना महामारी के खतरे के मद्देनजर मां बाराही धाम देवीधुरा में पहली बार लोग बगवाल नहीं होगी। रक्षाबंधन के दिन तीन अगस्त को बगवाल की रस्म निभाई जाएगी। वहीं बगवाल वाले दिन देवीधुरा का बाजार भी नहीं खुलेगा। डीएम सुरेंद्र नारायण पांडेय का कहना है कि बाहरी लोगों की आवाजाही नहीं होने से दुकानों को खोले जाने का कोई औचित्य नहीं हैै। अलबत्ता इसे लेकर तीन दिन के भीतर मंदिर समिति के साथ प्रशासनिक अफसर बैठक कर बाजार के अलावा अन्य व्यवस्थाओं पर मंथन होगा।
मां पूर्णागिरि धाम में बंद है श्रद्धालुओं की आवाजाही
चंपावत। चारधाम यात्रा को शर्तों के साथ देशभर के श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया गया है। मगर जिले के सबसे बड़े मां पूर्णागिरि धाम में तीर्थ यात्रियों की आवाजाही एकदम बंद है। इस वक्त न तो जिले के और नहीं प्रदेश के किसी अन्य जगह के श्रद्धालु आ रहे हैं। मंदिर समिति के अध्यक्ष पंडित भुवन चंद्र पांडेय का कहना है कि बरसात में खतरे के मद्देनजर आवाजाही वैसे भी कम होती रही है, मगर इस बार कोरोना महामारी के अंदेशे के चलते श्रद्धालुओं की आमद एकदम बंद हो गई है।

अषाड़ी महोत्सव में नहीं होंगी सांस्कृतिक गतिविधियां
लोहाघाट (चंपावत)। चामी-चौमेल का पांच दिनी अषाड़ी महोत्सव कोरोना के चलते स्थगित कर दिया गया है। इस वर्ष महोत्सव में न देव रथ यात्राएं निकलेंगी और न ही शैक्षिक, सांस्कृतिक, खेलकूद गतिविधियां नहीं होंगी। रक्षाबंधन के दिन तीन अगस्त को परंपरा को पूरा करने के लिए मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना की जाएगी। रविवार को महोत्सव समिति के अध्यक्ष अशोक सिंह की अध्यक्षता में हुई बैठक में कोरोना के मद्देनजर पांच दिवसीय अषाड़ी महोत्सव के ज्यादातर कार्यक्रमों को स्थगित करने का निर्णय लिया गया।
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