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प्रधानाचार्यों के 58 औ्रर प्रधानाध्यापकों के 23 पद रिक्त
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बागेश्वर। जिले के अधिकतर सरकारी इंटर कॉलेज और हाईस्कूल मुखिया विहीन हैं। मात्र तीन इंटर कॉलेेज और नौ हाईस्कूलों में ही स्थायी प्रधानाचार्य और प्रधानाध्यापक तैनात हैं। अन्य विद्यालयों की व्यवस्था प्रभारियों के सहारे चल रही है। प्रधानाचार्य का प्रभार शिक्षकों को देने से विद्यार्थियों की शिक्षा पर भी बुरा असर पड़ रहा है।
जिले के तीनों विकासखंडों में 61 सरकारी इंटर कॉलेज हैं। राइंका मंडलसेरा, राबाइंका बागेश्वर, राइंका रवांईखाल को छोड़कर बाकी 58 इंटर कॉलेजों में प्रधानाचार्य के पद खाली हैं। जिला मुख्यालय का इंटर कॉलेज भी जून से प्रधानाचार्य विहीन हो गया है। गरुड़ और कपकोट ब्लॉक के किसी भी विद्यालय में पूूूर्णकालिक प्रधानाचार्य नहीं हैं। पूर्णकालिक प्रधानाचार्य न होने के कारण विद्यालय के आहरण वितरण का कार्य दूसरे विद्यालय में तैनात स्थायी प्रधानाचार्य या प्रधानाध्यापक के पास रहता है।
प्रधानाचार्य विहीन विद्यालयों के बिल पास करवाने, वेतन निकलवाने, विकास कार्य के बजट की मांग के लिए प्रभारी प्रधानाचार्यों को अक्सर आहरण-वितरण अधिकारी के चक्कर काटने पड़ते हैं। प्रभारी प्रधानाचार्य की जिम्मेदारी निभा रहे शिक्षक कार्यालयी कामकाज में व्यस्त रहने के कारण अपने विषय की नियमित पढ़ाई भी नहीं करा पा रहे हैं जिसका नुकसान छात्र-छात्राओं को उठाना पड़ रहा है।
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कुछ ऐसा ही हाल जिले के सरकारी हाईस्कूलों का भी है। तीनों ब्लॉकों के 32 हाईस्कूल में से 23 में पूर्णकालिक प्रधानाध्यापकों के पद खाली हैं। प्रधानाध्यापक न होने से शिक्षकों के पास ही प्रभार है। जिले के इंटर कॉलेजों में प्रवक्ताओं के भी करीब 275 पद खाली हैं। कई विद्यालयों में अतिथि शिक्षक प्रवक्ताओं के खाली पदों पर सेवा दे रहे हैं लेकिन कुछ विद्यालयों में पद पूर्ण खाली होने से विद्यार्थियों की पढ़ाई बाधित हो रही है।
प्रधानाचार्य की सीधी भर्ती प्रक्रिया बंद है। पांच साल की सेवा वाले प्रधानाध्यापक को ही प्रधानाचार्य की जिम्मेदारी मिल सकती है। जिले के प्रधानाध्यापकों को कार्यवाहक प्रधानाचार्य बनाने की कवायद चल रही है। प्रवक्ताओं के पदों पर शासन से नई नियुक्तियों की प्रक्रिया चल रही है। - जीएस सौन, मुख्य शिक्षाधिकारी, बागेश्वर।
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जिले के तीनों विकासखंडों में 61 सरकारी इंटर कॉलेज हैं। राइंका मंडलसेरा, राबाइंका बागेश्वर, राइंका रवांईखाल को छोड़कर बाकी 58 इंटर कॉलेजों में प्रधानाचार्य के पद खाली हैं। जिला मुख्यालय का इंटर कॉलेज भी जून से प्रधानाचार्य विहीन हो गया है। गरुड़ और कपकोट ब्लॉक के किसी भी विद्यालय में पूूूर्णकालिक प्रधानाचार्य नहीं हैं। पूर्णकालिक प्रधानाचार्य न होने के कारण विद्यालय के आहरण वितरण का कार्य दूसरे विद्यालय में तैनात स्थायी प्रधानाचार्य या प्रधानाध्यापक के पास रहता है।
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प्रधानाचार्य विहीन विद्यालयों के बिल पास करवाने, वेतन निकलवाने, विकास कार्य के बजट की मांग के लिए प्रभारी प्रधानाचार्यों को अक्सर आहरण-वितरण अधिकारी के चक्कर काटने पड़ते हैं। प्रभारी प्रधानाचार्य की जिम्मेदारी निभा रहे शिक्षक कार्यालयी कामकाज में व्यस्त रहने के कारण अपने विषय की नियमित पढ़ाई भी नहीं करा पा रहे हैं जिसका नुकसान छात्र-छात्राओं को उठाना पड़ रहा है।
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कुछ ऐसा ही हाल जिले के सरकारी हाईस्कूलों का भी है। तीनों ब्लॉकों के 32 हाईस्कूल में से 23 में पूर्णकालिक प्रधानाध्यापकों के पद खाली हैं। प्रधानाध्यापक न होने से शिक्षकों के पास ही प्रभार है। जिले के इंटर कॉलेजों में प्रवक्ताओं के भी करीब 275 पद खाली हैं। कई विद्यालयों में अतिथि शिक्षक प्रवक्ताओं के खाली पदों पर सेवा दे रहे हैं लेकिन कुछ विद्यालयों में पद पूर्ण खाली होने से विद्यार्थियों की पढ़ाई बाधित हो रही है।
प्रधानाचार्य की सीधी भर्ती प्रक्रिया बंद है। पांच साल की सेवा वाले प्रधानाध्यापक को ही प्रधानाचार्य की जिम्मेदारी मिल सकती है। जिले के प्रधानाध्यापकों को कार्यवाहक प्रधानाचार्य बनाने की कवायद चल रही है। प्रवक्ताओं के पदों पर शासन से नई नियुक्तियों की प्रक्रिया चल रही है। - जीएस सौन, मुख्य शिक्षाधिकारी, बागेश्वर।