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मोहन की बांसुरी की धुन में खोए लोग
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बागेश्वर डायट में वाद्ययंत्र कार्यशाला के समापन पर हुड़का बजाते प्रतिभागी। विज्ञप्ति
- फोटो : BAGESHWAR
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बागेश्वर। संस्कृति विभाग उत्तराखंड की ओर से आयोजित लोकवाद्य यंत्र की कार्यशाला के समापन दिवस पर प्रशिक्षु डीएलएड छात्रों को बांसुरी और हुड़के के बारे में जानकारी दी गई। प्रख्यात बांसुरी वादक मोहन चंद्र जोशी ने बांसुरी वादन की प्रक्रिया बताई और शानदार बांसुरी वादन भी किया।
डायट में आयोजित कार्यशाला के समापन पर ईजा सोसाइटी के अध्यक्ष और मुख्य संदर्भदाता बांसुरी वादक मोहन चंद्र जोशी ने बताया कि भावी पीढ़ी और डीएलएड प्रशिक्षुओं में उत्तराखंड के लोक वाद्य यंत्रों की समझ विकसित करने के उद्देश्य से संस्कृति विभाग ने तीन दिनी कार्यशाला का आयोजन किया। कार्यशाला में प्रशिक्षुओं को हुड़का और बांसुरी की बनावट, इतिहास, लोक संगीत में बांसुरी और हुड़का की उपयोगिता के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई।
कार्यशाला के समापन दिवस पर बांसुरीवादक मोहन चंद्र जोशी ने बांसुरी की उत्पत्ति, इतिहास, निर्माण, लोक संगीत में बांसुरी का महत्व और उपयोगिता पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बांसुरी की कर्णप्रिय धुन से कार्यशाला का माहौल संगीतमय कर दिया। मोहन जोशी ने हिंदी, पहाड़ी गीतों के साथ साथ भजन की प्रस्तुति दी और खूब तालियां बटोरी। समापन अवसर पर डायट प्राचार्य शैलेंद्र धपोला, प्रशिक्षक हरीश चंद्र उपाध्याय, ऋचा जोशी, मोहित जोशी, रवि कुमार जोशी, प्रेम सिंह मेवाड़ी, कैलाश चंदोला, संजय गुरुरानी आदि मौजूद थे।
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डायट में आयोजित कार्यशाला के समापन पर ईजा सोसाइटी के अध्यक्ष और मुख्य संदर्भदाता बांसुरी वादक मोहन चंद्र जोशी ने बताया कि भावी पीढ़ी और डीएलएड प्रशिक्षुओं में उत्तराखंड के लोक वाद्य यंत्रों की समझ विकसित करने के उद्देश्य से संस्कृति विभाग ने तीन दिनी कार्यशाला का आयोजन किया। कार्यशाला में प्रशिक्षुओं को हुड़का और बांसुरी की बनावट, इतिहास, लोक संगीत में बांसुरी और हुड़का की उपयोगिता के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई।
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कार्यशाला के समापन दिवस पर बांसुरीवादक मोहन चंद्र जोशी ने बांसुरी की उत्पत्ति, इतिहास, निर्माण, लोक संगीत में बांसुरी का महत्व और उपयोगिता पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बांसुरी की कर्णप्रिय धुन से कार्यशाला का माहौल संगीतमय कर दिया। मोहन जोशी ने हिंदी, पहाड़ी गीतों के साथ साथ भजन की प्रस्तुति दी और खूब तालियां बटोरी। समापन अवसर पर डायट प्राचार्य शैलेंद्र धपोला, प्रशिक्षक हरीश चंद्र उपाध्याय, ऋचा जोशी, मोहित जोशी, रवि कुमार जोशी, प्रेम सिंह मेवाड़ी, कैलाश चंदोला, संजय गुरुरानी आदि मौजूद थे।
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