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Bageshwar News: मैग्नेसाइट कंपनी में कारोबार ठप कर्मचारियों को वेतन के लाले
Mon, 14 Jul 2025 12:22 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बागेश्वर
संवाद न्यूज एजेंसी, बागेश्वर
Updated Mon, 14 Jul 2025 12:22 AM IST
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बागेश्वर। अल्मोड़ा मैग्नेसाइट कंपनी झिरौली के कर्मचारियों के सामने आर्थिक संकट पैदा हो गया है। जिले में खनन पर रोक लगने से कंपनी का कारोबार ठप हो गया है। 294 कर्मचारियों को पिछले छह महीने से वेतन नहीं मिला है। 150 दैनिक वेतन भोगियों का रोजगार भी बाधित हो गया है।
मैग्नेसाइट फैक्टरी में माइनिंग के साथ-साथ ब्रिक, टाइल्स, ब्लॉक आदि निर्माण कार्य किए जाते हैं। जिले और आसपास के क्षेत्रों में कंपनी से निर्माण कार्य के लिए रेता और कंकड़ सप्लाई किए जाते थे। विगत जनवरी में हाईकोर्ट ने जिले में खनन गतिविधियों पर रोक लगाई तो कंपनी का काम भी प्रभावित हो गया। वर्तमान में कंपनी की करीब सभी गतिविधियां बंद हैं। कंपनी में कार्यरत 224 स्थायी कर्मचारी, 70 मैनेजमेंट स्टाफ कार्यरत को वेतन नहीं मिल रहा है।
हर साल कंपनी 150 से अधिक दैनिक वेतन भोगियों को रोजगार प्रदान करती थी। जिन्हें समिति के माध्यम से रखा जाता था, अब उनका रोजगार भी ठप हो गया है। कर्मचारियों को वेतन नहीं मिलने का असर स्थानीय काफलीगैर बाजार पर भी पड़ रहा है।
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कर्मचारियों का कहना है कि व्यापारी अब उन्हें उधार देने की स्थिति में भी नहीं हैं। बच्चों की स्कूल फीस और घर का खर्च निकालना मुश्किल हो रहा है।
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मैग्नेसाइट फैक्टरी में माइनिंग के साथ-साथ ब्रिक, टाइल्स, ब्लॉक आदि निर्माण कार्य किए जाते हैं। जिले और आसपास के क्षेत्रों में कंपनी से निर्माण कार्य के लिए रेता और कंकड़ सप्लाई किए जाते थे। विगत जनवरी में हाईकोर्ट ने जिले में खनन गतिविधियों पर रोक लगाई तो कंपनी का काम भी प्रभावित हो गया। वर्तमान में कंपनी की करीब सभी गतिविधियां बंद हैं। कंपनी में कार्यरत 224 स्थायी कर्मचारी, 70 मैनेजमेंट स्टाफ कार्यरत को वेतन नहीं मिल रहा है।
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हर साल कंपनी 150 से अधिक दैनिक वेतन भोगियों को रोजगार प्रदान करती थी। जिन्हें समिति के माध्यम से रखा जाता था, अब उनका रोजगार भी ठप हो गया है। कर्मचारियों को वेतन नहीं मिलने का असर स्थानीय काफलीगैर बाजार पर भी पड़ रहा है।
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कर्मचारियों का कहना है कि व्यापारी अब उन्हें उधार देने की स्थिति में भी नहीं हैं। बच्चों की स्कूल फीस और घर का खर्च निकालना मुश्किल हो रहा है।