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सैन्य सम्मान के साथ लांस नायक अशोक की अंत्येष्टि

Thu, 10 Aug 2017 10:29 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बागेश्वर।
ब्यूरो/अमर उजाला, बागेश्वर। Updated Thu, 10 Aug 2017 10:29 PM IST
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Lance hero Ashoka's funeral with military honors
अशोक खेतवाल (फाइल फोटो) - फोटो : amar ujala

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 बांबे इंजीनियरिंग में कार्यरत लांस नायक अशोक खेतवाल का पार्थिव शरीर सेना के विशेष वाहन से बृहस्पतिवार सुबह उनके गांव आरे पहुंचा। शव से लिपटकर परिजन फूट-फूटकर रोने लगे। उन्हें देखकर वहां मौजूद हर किसी की आंखें भी नम हो गईं।

बाद में सैनिक की बालीघाट स्थित सरयू और लाहुर नदी के संगम पर सैन्य सम्मान के साथ अंत्येष्टि की गई। इधर, परिजनों के मुताबिक अशोक ने मृत्यु से पहले अपनी आंखें दान करने की इच्छा जताई थी। इसके तहत दिल्ली में ही डॉक्टरों ने उसकी आंखों को सुरक्षित रख लिया है। 
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बता दें कि आरे गांव निवासी हीरा सिंह खेतवाल के पुत्र अशोक खेतवाल बांबे इंजीनियरिंग में लांस नायक के पद पर कार्यरत थे। उनका वहां कुछ समय पहले स्वास्थ्य खराब हो गया। इलाज के लिए उन्हें दिल्ली के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां मंगलवार को उनका निधन हो गया।
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बृहस्पतिवार को उनका पार्थिव शरीर उनके गांव आरे पहुंचा। अपने लाडले का पार्थिव शरीर देखते ही उनकी माता नंदी देवी, पिता, पत्नी मीनाक्षी, भाई धीरज और संजीव का रो-रोकर बुरा हो गया। दिवंगत सैनिक के दो बच्चे भी हैं। कौसानी से आई सिग्नल कोर के जवानों ने अपने शस्त्र उल्टे करके अंतिम सलामी दी।

चिता को मुखाग्नि सैनिक चचेरे भाई सुरेश और दिनेश खेतवाल ने दी। जिला पंचायत अध्यक्ष हरीश ऐठानी और प्रशासन की ओर से एसडीएम श्याम सिंह राणा आदि ने दिवंगत सैनिक के पार्थिव शरीर पर पुष्पांजलि अर्पित की। शवयात्रा में जिला युवक समिति के अध्यक्ष नरेंद्र खेतवाल, सुरेश खेतवाल, भगवत सिंह और कोतवाल टीआर वर्मा आदि शामिल हुए। 
 

इधर, अशोक के रिश्ते के भाई एवं छात्र नेता सुरेश खेतवाल ने बताया कि अशोक को हार्निया की बीमारी से ग्रस्त थे। तबियत खराब होने पर पिछले दिनों उन्हें दिल्ली के आर्मी रिसर्च एंड रेफरल हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। उनका स्वास्थ्य बिगड़ता चला गया और अचानक उनके कई अंगों ने काम करना बंद कर दिया।

सुरेश ने बताया कि शायद उन्हें अपने बचने की उम्मीद नहीं थी, इसलिए उन्होंने अपनी आंखें दान करने का निश्चय किया। उनके निधन के बाद डॉक्टरों ने उनकी आंखें सुरक्षित रख ली हैं।

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