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कोविड जांच के लिए इंतजार करते रह गए लोग, नहीं पहुंची टीम
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बागेश्वर। कोरोना के बढ़ते प्रकोप को रोकने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने गांवों में जाकर सैंपलिंग करने का निर्णय लिया है लेकिन कार्यक्रम को सही से अमलीजामा नहीं पहनाया जा रहा है। इस कारण ग्रामीणों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बुधवार को डोबा और चौहना के ग्रामीण दोपहर तक कोविड जांच कराने के लिए इंतजार करते रहे लेकिन विभाग की टीम नहीं पहुंची।
डोबा और चौहना ग्राम पंचायतों की कुल आबादी एक हजार से अधिक है। आधी आबादी डोबा और चौहना में रहती है। बाकी घौताड़ी, सीमी नरगोल, इकहतिया और गढ़िया तोक में निवास करती है। ग्राम प्रधान ने स्वास्थ्य विभाग से मिली सूचना के बाद बुधवार को स्वास्थ्य केंद्र में जांच कराने की सूचना सोशल मीडिया से दी। लोगों को फोन के माध्यम से भी सुबह आठ बजे से जांच कराने के लिए आने को कहा।
सूचना के अनुसार बुधवार को सुबह से ही लोग स्वास्थ्य केंद्र में उमड़ने लगे। धीरे-धीरे समय बीतता रहा, लेकिन स्वास्थ्य विभाग का कोई कर्मचारी जांच को नहीं पहुंचा। ग्राम प्रधान भुवन सिंह टंगड़िया और सामाजिक कार्यकर्ता चंद्रशेखर पांडेय ने विभाग की टीम को फोन किया तो मालूम हुआ कि धारी गांव में कोविड जांच की जा रही है। इसके बाद टीम के पहुंचने की बात कही गई। दोपहर होने तक लोग इंतजार करते रहे, आखिरकार बिना जांच कराए ही घरों को लौट गए।
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सामाजिक कार्यकर्ता पांडेय ने कहा कि इन दिनों गांव में लोग बुखार की चपेट में हैं। जांच कराने आए अधिकांश लोग भी बुखार से ग्रसित थे। स्वास्थ्य विभाग के इस लापरवाही वाले रवैये से संक्रमण अधिक फैल सकता है। उन्होंने इस तरह की लापरवाही की जांच करने की मांग की।
दूर गांव से आए बुजुर्ग रहे परेशान
बागेश्वर। कोविड जांच कराने के लिए पांच से सात किमी दूर से आए लोगों को निराशा हुई। गढ़िया गांव के 68 वर्षीय दीवान सिंह ने बताया कि वह पांच किमी पैदल चलकर सुबह ही पहुंच गए थे। दो बजे तक भी टीम नहीं पहुंची है। अब तेज धूप में बिना जांच कराए लौटना पड़ रहा है।
भूखे पेट दोपहर तक किया इंतजार
बागेश्वर। गढ़िया गांव की तुलसी देवी ने बताया कि वह सुबह सात बजे यहां पहंच गई थी। सोचा पहले जांच हो जाएगी तो जल्दी घर पहुंच जाएगी। जिसके चलते सुबह खाना भी नहीं खाया था। अब दो बजने को है, लेकिन कोई जांच करने वाला नहीं आया है। पूरा दिन भी बर्बाद हुआ और जांच भी नहीं हुई।
धारी गांव में ट्रूनेट जांच के चलते हुई देरी
बागेश्वर। कोविड जांच कर रही टीम और ग्राम निगरानी समिति के सदस्य ग्राम पंचायत विकास अधिकारी यशवीर सिंह असवाल ने बताया कि अन्य स्थानों पर आरटी-पीसीआर कराई जा रही थी। इसके चलते जांच जल्द हो जाती थी। धारी में ट्रूनेट जांच कराई जा रही है। इस जांच में रिपोर्ट भी तत्काल देनी होती है। एक व्यक्ति की जांच में 15 से 20 मिनट का समय लग रहा है। जांच टीम में केवल दो लोग हैं। जांच कराने वालों की संख्या अधिक होने से टीम डोबा और चौहना नहीं जा सकी। उन्होंने बताया कि धारी में दो बजे 59 लोगों की जांच की गई। इनमें से 7 में कोरोना संक्रमण की पुष्टि हुई है।
डोबा और चौहना में कोविड सैंपल लेने जाने वाली टीम को समय पर रवाना कर दिया था, लेकिन धारी गांव में भी कोविड जांच की जानी थी। जहां पूरे दिन जांच होती रही। इसके चलते टीम डोबा नहीं पहुंच सकी। वहां के लोगों की जांच अब दूसरे दिन की जाएगी। - डॉ. एनएस टोलिया, नोडल अधिकारी
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डोबा और चौहना ग्राम पंचायतों की कुल आबादी एक हजार से अधिक है। आधी आबादी डोबा और चौहना में रहती है। बाकी घौताड़ी, सीमी नरगोल, इकहतिया और गढ़िया तोक में निवास करती है। ग्राम प्रधान ने स्वास्थ्य विभाग से मिली सूचना के बाद बुधवार को स्वास्थ्य केंद्र में जांच कराने की सूचना सोशल मीडिया से दी। लोगों को फोन के माध्यम से भी सुबह आठ बजे से जांच कराने के लिए आने को कहा।
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सूचना के अनुसार बुधवार को सुबह से ही लोग स्वास्थ्य केंद्र में उमड़ने लगे। धीरे-धीरे समय बीतता रहा, लेकिन स्वास्थ्य विभाग का कोई कर्मचारी जांच को नहीं पहुंचा। ग्राम प्रधान भुवन सिंह टंगड़िया और सामाजिक कार्यकर्ता चंद्रशेखर पांडेय ने विभाग की टीम को फोन किया तो मालूम हुआ कि धारी गांव में कोविड जांच की जा रही है। इसके बाद टीम के पहुंचने की बात कही गई। दोपहर होने तक लोग इंतजार करते रहे, आखिरकार बिना जांच कराए ही घरों को लौट गए।
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सामाजिक कार्यकर्ता पांडेय ने कहा कि इन दिनों गांव में लोग बुखार की चपेट में हैं। जांच कराने आए अधिकांश लोग भी बुखार से ग्रसित थे। स्वास्थ्य विभाग के इस लापरवाही वाले रवैये से संक्रमण अधिक फैल सकता है। उन्होंने इस तरह की लापरवाही की जांच करने की मांग की।
दूर गांव से आए बुजुर्ग रहे परेशान
बागेश्वर। कोविड जांच कराने के लिए पांच से सात किमी दूर से आए लोगों को निराशा हुई। गढ़िया गांव के 68 वर्षीय दीवान सिंह ने बताया कि वह पांच किमी पैदल चलकर सुबह ही पहुंच गए थे। दो बजे तक भी टीम नहीं पहुंची है। अब तेज धूप में बिना जांच कराए लौटना पड़ रहा है।
भूखे पेट दोपहर तक किया इंतजार
बागेश्वर। गढ़िया गांव की तुलसी देवी ने बताया कि वह सुबह सात बजे यहां पहंच गई थी। सोचा पहले जांच हो जाएगी तो जल्दी घर पहुंच जाएगी। जिसके चलते सुबह खाना भी नहीं खाया था। अब दो बजने को है, लेकिन कोई जांच करने वाला नहीं आया है। पूरा दिन भी बर्बाद हुआ और जांच भी नहीं हुई।
धारी गांव में ट्रूनेट जांच के चलते हुई देरी
बागेश्वर। कोविड जांच कर रही टीम और ग्राम निगरानी समिति के सदस्य ग्राम पंचायत विकास अधिकारी यशवीर सिंह असवाल ने बताया कि अन्य स्थानों पर आरटी-पीसीआर कराई जा रही थी। इसके चलते जांच जल्द हो जाती थी। धारी में ट्रूनेट जांच कराई जा रही है। इस जांच में रिपोर्ट भी तत्काल देनी होती है। एक व्यक्ति की जांच में 15 से 20 मिनट का समय लग रहा है। जांच टीम में केवल दो लोग हैं। जांच कराने वालों की संख्या अधिक होने से टीम डोबा और चौहना नहीं जा सकी। उन्होंने बताया कि धारी में दो बजे 59 लोगों की जांच की गई। इनमें से 7 में कोरोना संक्रमण की पुष्टि हुई है।
डोबा और चौहना में कोविड सैंपल लेने जाने वाली टीम को समय पर रवाना कर दिया था, लेकिन धारी गांव में भी कोविड जांच की जानी थी। जहां पूरे दिन जांच होती रही। इसके चलते टीम डोबा नहीं पहुंच सकी। वहां के लोगों की जांच अब दूसरे दिन की जाएगी। - डॉ. एनएस टोलिया, नोडल अधिकारी