{"_id":"63276784fbdd5b2e9721d3ad","slug":"kiwi-farming-in-liti-and-shama-bageshwar-news-hld476149953","type":"story","status":"publish","title_hn":"शामा-लीती के कीवी का स्वाद लेने के लिए हो जाएं तैयार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
शामा-लीती के कीवी का स्वाद लेने के लिए हो जाएं तैयार
विज्ञापन
बागेश्वर के लीती में हरीश कोरंगा के बाग में तैयार होते लीती के फल। संवाद न्यूज एजेंसी
- फोटो : BAGESHWAR
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बागेश्वर। जिले में कीवी के हब के रूप में पहचान बना चुके शामा, लीती क्षेत्र में कीवी के हजारों बेल फलों से लदे हैं। अक्तूबर अंत तक शामा, लीती क्षेत्र का कीवी बाजार में आ जाएगा। शामा, लीती क्षेत्र का कीवी काफी सस्ता मिलता है, हाथोंहाथ बिक जाता है।
शामा, लीती क्षेत्र में कीवी फल उत्पादन का श्रेय शामा निवासी सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य भवान सिंह कोरंगा (मासाब) को जाता है। उन्होंने ही सबसे पहले वर्ष 2008 में कीवी उत्पादन के क्षेत्र में कदम रखा। आज वह जिले के प्रमुख कीवी उत्पादकों में शुमार है। वह अन्य किसानों को कीवी उत्पादन का प्रशिक्षण देते हैं। आज मासाब के पास कीवी के करीब 300 बेल हैं। हर साल कई क्विंटल कीवी बाजार में बेचते हैं। कीवी 50 क्वालिटी के हिसाब से 50 से 200 रुपये किलो तक क्षेत्र में ही बिक जाता है।
मासाब की देखादेखी शामा के साथ ही लीती में लोग कीवी का उत्पादन करने लगे। लीती के प्रमुख कीवी उत्पादकों में शुमार हरीश कोरंगा के बागान में करीब 150 कीवी के बेल हैं। लीती की धना कोरंगा के बाग में 70 बेल हैं। कीवी उत्पादक भवान सिंह कोरंगा बताते हैं कि शामा में लगभग 80 अन्य लोग कीवी उत्पादन से जुड़े हुए हैं। लीती में 40 परिवार कीवी उत्पादन कर रहे हैं। क्षेत्र के अन्य गांवों में 25 परिवार कीवी की पैदावार कर रहे हैं।
विज्ञापन
कीवी के पौधों से हो रहे मालामाल
बागेश्वर। शामा के भवान सिंह कोरंगा (मासाब) की नर्सरी में दस हजार कीवी के पौधे हैं। लीती के कीवी उत्पादक हरीश कोरंगा की नर्सरी में करीब 11,000 पौधे हैं। लीती की धना कोरंगा की नर्सरी में हजार से अधिक पौधे हैं। मासाब बताते हैं कि कलम चढ़ाया हुआ (ग्राफ्टेट) पौधा 275 रुपये में बिकता है। सामान्य तरीके से तैयार पौधे 225 रुपये का बिकता है। इस हिसाब से लाखों रुपयों की कमाई कीवी के पौधों से हो जाती है।
विज्ञापन
शामा, लीती क्षेत्र में कीवी फल उत्पादन का श्रेय शामा निवासी सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य भवान सिंह कोरंगा (मासाब) को जाता है। उन्होंने ही सबसे पहले वर्ष 2008 में कीवी उत्पादन के क्षेत्र में कदम रखा। आज वह जिले के प्रमुख कीवी उत्पादकों में शुमार है। वह अन्य किसानों को कीवी उत्पादन का प्रशिक्षण देते हैं। आज मासाब के पास कीवी के करीब 300 बेल हैं। हर साल कई क्विंटल कीवी बाजार में बेचते हैं। कीवी 50 क्वालिटी के हिसाब से 50 से 200 रुपये किलो तक क्षेत्र में ही बिक जाता है।
विज्ञापन
मासाब की देखादेखी शामा के साथ ही लीती में लोग कीवी का उत्पादन करने लगे। लीती के प्रमुख कीवी उत्पादकों में शुमार हरीश कोरंगा के बागान में करीब 150 कीवी के बेल हैं। लीती की धना कोरंगा के बाग में 70 बेल हैं। कीवी उत्पादक भवान सिंह कोरंगा बताते हैं कि शामा में लगभग 80 अन्य लोग कीवी उत्पादन से जुड़े हुए हैं। लीती में 40 परिवार कीवी उत्पादन कर रहे हैं। क्षेत्र के अन्य गांवों में 25 परिवार कीवी की पैदावार कर रहे हैं।
विज्ञापन
कीवी के पौधों से हो रहे मालामाल
बागेश्वर। शामा के भवान सिंह कोरंगा (मासाब) की नर्सरी में दस हजार कीवी के पौधे हैं। लीती के कीवी उत्पादक हरीश कोरंगा की नर्सरी में करीब 11,000 पौधे हैं। लीती की धना कोरंगा की नर्सरी में हजार से अधिक पौधे हैं। मासाब बताते हैं कि कलम चढ़ाया हुआ (ग्राफ्टेट) पौधा 275 रुपये में बिकता है। सामान्य तरीके से तैयार पौधे 225 रुपये का बिकता है। इस हिसाब से लाखों रुपयों की कमाई कीवी के पौधों से हो जाती है।