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कुंवारी गांव में बिना बारिश के ही दरकी पहाड़ियां
अमर उजाला ब्यूरो बागेश्वर।
Updated Sun, 11 Mar 2018 10:31 PM IST
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अति संवेदनशील गांवों की सूची में शामिल कपकोट तहसील के कुंवारी गांव में बिना बारिश के ही जबरदस्त भूस्खलन हो गया। पहाड़ी से विशाल चट्टानें और पेड़ उखड़कर खाई में समा गए। इससे गांव में अफरातफरी मच गई। क्षेत्र में जनहानि की कोई सूचना नहीं है। तहसील प्रशासन ने एसडीआरएफ की सात सदस्यीय टीम कुंवारी गांव भेज दी है।
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तहसील मुख्यालय से लगभग 95 किमी की दूरी पर स्थित कुंवारी गांव में शनिवार की शाम 7.30 बजे गांव की पहाड़ी में एकाएक भूस्खलन हो गया। पहाड़ी से विशालकाय बोल्डर और पेड़ों के गिरने से गांव में अफरा-तफरी मच गई। लोग घरों से बाहर निकल आए। पूरा गांव रात भर दहशत में रहा।
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सुबह होने पर गांव के एक व्यक्ति ने घटना की सूचना तहसील प्रशासन को दी। गांव में भूस्खलन की सूचना पर कपकोट के उपजिलाधिकारी रवींद्र सिंह बिष्ट ने एसडीआरएफ की सात सदस्यीय टीम कुंवारी गांव भेज दी। जिस क्षेत्र में भूस्खलन हुआ है उस हिस्से के खतरे में आने के कारण वहां से पहले ही गांव के सभी परिवारों को गांव के दूसरे सुरक्षित स्थान पर पुनर्वासित किया जा चुका है।
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अति संवेदनशील गांवों में शामिल है कुंवारी
जिले का कुंवारी गांव अतिसंवेदनशील गांवों की सूची में शामिल है। इस गांव में लगभग 64 परिवार रहते हैं। एक दशक पूर्व से इस गांव में जबरदस्त भूस्खलन हो रहा है। गांव के आगे से जमीन दरकने और पीछे की पहाड़ी से लगातार भूस्खलन के कारण वर्ष 2014 में गांव को पूरी तरह से दूसरे सुरक्षित भाग में विस्थापित कर दिया गया।कुंवारी गांव उत्तराखंड राज्य में पूर्ण विस्थापित होने वाला पहला गांव है।
भूस्खलन की सूचना के बाद एसडीआरएफ की टीम क्षेत्र में भेज दी है। गांव के जिस क्षेत्र में पहले घर थे वहां पर भूस्खलन की सूचना है। इस समय सभी पुनर्वासित परिवार दूसरे क्षेत्र में रहते हैं। एक-दो दिन के भीतर भू वैज्ञानिकों के साथ क्षेत्र में जाकर जांच की जाएगी। - आरएस बिष्ट, एसडीएम, कपकोट।