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एक किलो आम की कीमत एक रुपये से भी कम
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बागेश्वर। आम की अच्छी पैदावार का भी किसानों को लाभ नहीं मिल रहा है। बाजार में आम पचास रुपये किलो से नीचे नहीं आ रहा है। वहीं किसानों से 30 किलो आम का कट्टा 20 से 25 रुपये में खरीदा जा रहा है। आम के दाम कम मिलने से किसान मायूस हैं। पेड़ों पर लदा आम बर्बाद हो रहा है।
बागेश्वर में हर साल आम की अच्छी पैदावार होती है। फल उत्पादक आम बेचकर मुनाफा कमाते हैं। इस बार भी आम की पैदावार ठीक है, लेकिन कोरोना काल में किसानों को आम का उचित भाव नहीं मिल पा रहा है। कोरोना से आम की बिक्री प्रभावित हुई है। हल्द्वानी मंडी तक आम पहुंचाना आसान नहीं है। इस कारण अधिकतर लोग ठेकेदारों को आम बेच रहे हैं। लोकल में आम बेचने से किसानों को उचित दाम नहीं मिल रहा है। इससे आम उत्पादक आर्थिक नुकसान भी झेल रहे हैं। वहीं ठेकेदारों का तर्क है कि मंडी में भाव कम मिलने से वह किसानों को उचित भाव नहीं दे पा रहे हैं।
चार सालों में आम की पैदावार
वर्ष क्षेत्रफल पैदावार
2019-20 1011.80 हेक्टेयर 3757.05 मिट्रिक टन
2018-19 3727.22 हेक्टेयर 995.05 मिट्रिक टन
2017-18 993 .74 हेक्टेयर 3726.46 मिट्रिक टन
2016-17 992 .45 हेक्टेयर 3725.85 मिट्रिक टन
आम की गुणवत्ता के अनुसार मंडी में भाव मिलते हैं। अधिकतर किसान फल लगने से पहले और बाद में आम की देखरेख ठीक प्रकार नहीं करते हैं। इस कारण आम की गुणवत्ता खराब हो जाती है। इसका प्रभाव आम के दामों पर पड़ता है। - आरके सिंह, जिला उद्यान अधिकारी बागेश्वर
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बागेश्वर में हर साल आम की अच्छी पैदावार होती है। फल उत्पादक आम बेचकर मुनाफा कमाते हैं। इस बार भी आम की पैदावार ठीक है, लेकिन कोरोना काल में किसानों को आम का उचित भाव नहीं मिल पा रहा है। कोरोना से आम की बिक्री प्रभावित हुई है। हल्द्वानी मंडी तक आम पहुंचाना आसान नहीं है। इस कारण अधिकतर लोग ठेकेदारों को आम बेच रहे हैं। लोकल में आम बेचने से किसानों को उचित दाम नहीं मिल रहा है। इससे आम उत्पादक आर्थिक नुकसान भी झेल रहे हैं। वहीं ठेकेदारों का तर्क है कि मंडी में भाव कम मिलने से वह किसानों को उचित भाव नहीं दे पा रहे हैं।
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चार सालों में आम की पैदावार
वर्ष क्षेत्रफल पैदावार
2019-20 1011.80 हेक्टेयर 3757.05 मिट्रिक टन
2018-19 3727.22 हेक्टेयर 995.05 मिट्रिक टन
2017-18 993 .74 हेक्टेयर 3726.46 मिट्रिक टन
2016-17 992 .45 हेक्टेयर 3725.85 मिट्रिक टन
आम की गुणवत्ता के अनुसार मंडी में भाव मिलते हैं। अधिकतर किसान फल लगने से पहले और बाद में आम की देखरेख ठीक प्रकार नहीं करते हैं। इस कारण आम की गुणवत्ता खराब हो जाती है। इसका प्रभाव आम के दामों पर पड़ता है। - आरके सिंह, जिला उद्यान अधिकारी बागेश्वर
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