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घरों से लेकर स्कूल की चहारदीवारी तक बंदरों का ही खौफ 

Sun, 03 Apr 2016 11:15 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो बागेश्वर
अमर उजाला ब्यूरो बागेश्वर Updated Sun, 03 Apr 2016 11:15 PM IST
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Homes to the four walls of the school, from the fear of monkeys
जयमाला - फोटो : अमर उजाला

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बागेश्वर में कटखने बंदर बड़ी समस्या बन चुके हैं। आबादी में रहने के आदि हो चुके बंदरों की सुबह होते ही घरों की छतों में धमाचौकड़ी शुरू हो जाती है। सबसे बड़ी समस्या छोटे स्कूली बच्चों की है। बंदरों के कारण बच्चों को हर समय खतरा बना रहता है। घरों में भी बच्चों को कटखने बंदरों के काटने के डर से दरवाजा बंद कर बैठना पड़ता है। हालात यह हैं कि स्कूली बच्चों के लिए तो घर से लेकर स्कूल की चहारदीवारी तक बंदरों का ही खौफ ही रहता है। 

बंदरों के डर से अकेले स्कूल आना और फिर घर जाना सोचकर भी डर लगता है। रोज मम्मी के साथ ही स्कूल आता हूं और स्कूल से लौटने पर भी घर का किसी बड़े सदस्य के साथ ही घर जाता हूं। बंदरों से निजात मिलना बहुत जरूरी है। 
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 - सार्थक पांडेय। 


बंदरों से रास्ते में तो डर लगता ही है, घर में भी इनके डर से बाहर नहीं खेल सकते हैं। सुबह ही बंदर घरों में घुस जाते हैं। इन बंदरों को घरों से दूर भगाया जाना चाहिए। ताकि वह खेल सकें।
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- गौरव लोहनी। 


बंदर सुबह से शाम तक घरों की छतों और पेड़ों में रहते हैं। रास्ते में आने-जाने पर झपटते हैं। स्कूल अकेले जाने में डर लगता है। बंदरों के डर से घर में दरवाजा बंद करके बैठना पड़ता है। 
- हिमांशु शाह। 

बंदरों के डर से कहीं भी अकेले आती-जाती नहीं हूं। स्कूल या बाजार आने-जाने के लिए किसी बड़े का साथ जरूरी होता है। बंदरों को भगाने पर काटने के लिए आते हैं। स्कूल भी दोस्तों के साथ ही जाते हैं।
- जयमाला। 


बंदरों से सुरक्षा के लिए चारदीवारी बनाई गई है। लेकिन बंदरों ने परिसर के पेड़ों को बसेरा बना लिया है। बच्चों पर हमले का खतरा बना रहता है। उम्मीद है हाईकोर्ट के फैसले के बाद पालिका प्रशासन और वन विभाग कोई ठोस कदम अवश्य उठाएंगे।
- ललित मोहन जोशी, प्रधानाचार्य ग्रीन वैली स्कूल।


पहाड़ों में पहले बंदर आबादी में नहीं होते थे। लेकिन अब बंदरों ने आबादी को ही स्थायी निवास बना लिया है। लोगों के साथ ही खेती के लिए भी खतरा बनते जा रहे हैं। नगर के लोग परेशान हैं।
- रंजना जोशी, शिक्षिका।

बंदरों की बढ़ती तादात को देखते हुए कुछ समय पूर्व 31 बंदर पकड़े थे। बंदरों को पकड़ने के बाद मेल-फीमेल का स्टरलाइजेशन किया जाता है। यहां पर फिलहाल कोई व्यवस्था नहीं है। अल्मोड़ा में सेंटर बन रहा है। वहां पर काम शुरू हुआ तो यहां से बंदरों को पकड़कर सेंटर में भेजा जाएगा। 

- एमबी सिंह, डीएफओ, बागेश्वर। 
 

अभी तक नगर में बंदरों को पकड़ने के लिए कोई अभियान नहीं चलाया गया है। बंदर वास्तव में शहरवासियों के लिए समस्या बन चुके हैं। अगली बोर्ड बैठक में इस समस्या पर गंभीरता से विचार  किया जाएगा। बंदरों को पकड़ने के लिए जितना भी खर्चा आएगा उसके लिए  बजट  रखा जाएगा। 
- गीता रावल, अध्यक्ष, नगरपालिका। 
 
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