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बागेश्वर में इस साल एड्स के सात नए मामले, अब तक 30 लोगों की मौत
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बागेश्वर। जिले में हर वर्ष उपार्जित प्रतिरक्षी अपूूर्णता सहलक्षण (एड्स) के मरीजों की संख्या में इजाफा हो रहा है। इस साल जिले में सात लोगों में एड्स की पुष्टि हुई है। जिले में कुल 30 लोगों की मौत हो चुकी है।
जिला अस्पताल के आईसीटीसी केंद्र से मिली जानकारी के अनुसार 13 वर्ष में 106 लोग इस बीमारी से संक्रमित हो चुके हैं। इस बीमारी के कारण 30 लोगों की मौत हो चुकी है। जिले में इस साल एड्स के सात नए मामले आए हैं। इनके समेत जिला अस्पताल से 47 एचआईवी संक्रमितों का निशुल्क इलाज किया जा रहा है। अस्पताल में एचआईवी विषाणु का पता लगाने के लिए मरीज का एलाइजा, मैरीलाइन और सिग्नल टेस्ट किए जाते हैं। उक्त जांचों के पॉजिटिव मिलने पर एसटीएच हल्द्वानी में मरीज की आगे की जांच होती है। एड्स पीड़ित को छह माह तक एसटीएच से दवाइयां दी जाती हैं। इसके बाद जिला चिकित्सालय से एड्स रोगी का उपचार होता है। केंद्र के माध्यम से सयम-समय पर रोगियों की काउंसलिंग की जाती है। एड्स लाइलाज बीमारी है। सावधानी ही इसका बचाव है।
एड्स फैलने के कारण
असुरक्षित यौन संबंध, एचआईवी संक्रमित सिरिंज का इस्तेमाल, संक्रमित मां से शिशु को, संक्रमित के अंग प्रत्यारोपण, संक्रमित के रक्तदान से एड्स फैलता है।
एड्स के लक्षण
सप्ताहभर बुखार रहना, अकारण वजन घटते जाना, अतिसार घटते जाना, मुंह में घाव हो जाना, त्वचा पर दर्द भरे और खुजली वाले चकत्ते एचआईवी होने के प्रमुख लक्षण हैं। कई बार अन्य रोगों में भी ऐसे लक्षण महसूस होते हैं। जिला चिकित्सालय के डॉक्टरों के अनुसार ऐसे लक्षण महसूस होने पर रोगी खून की जांच अवश्य कराएं।
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एड्स से बचाव
यौन संबंध बनाते समय निरोध का इस्तेमाल करें। रक्त चढ़ाने की जरूरत पड़ने पर अनजान व्यक्ति का रक्त न लें। एचआईवी जांच किया रक्त ही प्रयोग करें। एड्स पीड़ित महिलाएं गर्भधारण से बचें।
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जिला अस्पताल के आईसीटीसी केंद्र से मिली जानकारी के अनुसार 13 वर्ष में 106 लोग इस बीमारी से संक्रमित हो चुके हैं। इस बीमारी के कारण 30 लोगों की मौत हो चुकी है। जिले में इस साल एड्स के सात नए मामले आए हैं। इनके समेत जिला अस्पताल से 47 एचआईवी संक्रमितों का निशुल्क इलाज किया जा रहा है। अस्पताल में एचआईवी विषाणु का पता लगाने के लिए मरीज का एलाइजा, मैरीलाइन और सिग्नल टेस्ट किए जाते हैं। उक्त जांचों के पॉजिटिव मिलने पर एसटीएच हल्द्वानी में मरीज की आगे की जांच होती है। एड्स पीड़ित को छह माह तक एसटीएच से दवाइयां दी जाती हैं। इसके बाद जिला चिकित्सालय से एड्स रोगी का उपचार होता है। केंद्र के माध्यम से सयम-समय पर रोगियों की काउंसलिंग की जाती है। एड्स लाइलाज बीमारी है। सावधानी ही इसका बचाव है।
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एड्स फैलने के कारण
असुरक्षित यौन संबंध, एचआईवी संक्रमित सिरिंज का इस्तेमाल, संक्रमित मां से शिशु को, संक्रमित के अंग प्रत्यारोपण, संक्रमित के रक्तदान से एड्स फैलता है।
एड्स के लक्षण
सप्ताहभर बुखार रहना, अकारण वजन घटते जाना, अतिसार घटते जाना, मुंह में घाव हो जाना, त्वचा पर दर्द भरे और खुजली वाले चकत्ते एचआईवी होने के प्रमुख लक्षण हैं। कई बार अन्य रोगों में भी ऐसे लक्षण महसूस होते हैं। जिला चिकित्सालय के डॉक्टरों के अनुसार ऐसे लक्षण महसूस होने पर रोगी खून की जांच अवश्य कराएं।
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एड्स से बचाव
यौन संबंध बनाते समय निरोध का इस्तेमाल करें। रक्त चढ़ाने की जरूरत पड़ने पर अनजान व्यक्ति का रक्त न लें। एचआईवी जांच किया रक्त ही प्रयोग करें। एड्स पीड़ित महिलाएं गर्भधारण से बचें।