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गुरु की मदद से प्रमोद ने हस्तशिल्प को रोजगार का जरिया बनाया
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बागेश्वर। गुरु के मार्गदर्शन और आर्थिक सहयोग की मदद से प्रमोद शिवाशीष ने हस्तशिल्प को रोजगार का जरिया बना लिया है। इस बार राखी के त्योहार को स्पेशल बनाने के लिए प्रमोद ने चीड़ के छिलके से आकर्षक और मनमोहक राखी बनाई है। इसकी बाजार में काफी मांग है। छह महीने पहले तक आर्थिक समस्या का सामना कर रहे प्रमोद ने हस्तशिल्प के कौशल से तमाम प्रकार के उत्पादों को रोजगार का साधन बना लिया है।
जीआईसी सलानी के शिक्षक हरीश दफौटी ने बताया कि गरुड़ तहसील के लमचूला निवासी प्रमोद शिवाशीष दो साल पहले 12वीं की कक्षा में पढ़ाई करता था। युवक की घर की आर्थिक स्थिति काफी कमजोर है। युवक 12वीं की बोर्ड परीक्षा में फेल होने के बाद रोजगार की तलाश में दिल्ली चला गया। बताया कि दिल्ली में अच्छा काम न मिल पाने के कारण प्रमोद निराश हो गया। कुछ समय के बाद बीमार होने के कारण घर लौट आया। बताया कि उनका अपने पढ़ाए छात्र-छात्राओं से अच्छा संपर्क होने कारण प्रमोद ने उन्हें अपनी स्थिति बताई। साथी प्रमोद की हस्तकला की विशिष्टता जानते थे। उनके निर्देशन में प्रमोद ने कला उत्सव 2017 में राज्य स्तर पर शिल्पकला में दूसरा और वर्ष 2018 में राज्य स्तर में प्रथम स्थान प्राप्त किया। बताया कि इस वर्ष राष्ट्रीय कला उत्सव भोपाल में प्रमोद ने उत्तराखंड का प्रतिनिधित्व किया। जहां प्रमोद के कार्य की प्रसिद्ध चित्रकार राजीव लोचन ने काफी सराहना की। बताया कि उन्होंने प्रमोद को कालांजय कार्यशाला के माध्यम से बगेट शिल्प, पेंटिंग, टेराकोटा, पपरमैस्सी आदि का प्रशिक्षण दिया। प्रमोद अपनी कड़ी मेहनत और मजबूत इच्छाशक्ति से शिल्प कार्य में पारंगत हो गए। उन्होंने प्रमोद की आर्थिक सहायता कर स्वरोजगार के लिए प्रोत्साहित किया। इसके बाद प्रमोद ने हस्तशिल्प के कौशल से तमाम प्रकार के उत्पाद बनाना शुरू किया।
मंदिरों की बना रहे हैं आकर्षक प्रतिकृति
बागेश्वर। शिक्षक हरीश दफौटी ने बताया कि प्रमोद बगेट की घड़ी, वॉल पेंटिंग, बागनाथ और केदारनाथ समेत अन्य मंदिरों की प्रतिकृतियां आदि बना रहे हैं। इनकी बाजार में काफी मांग है। लॉकडाउन में मंदी के बावजूद प्रमोद आसानी से अपने घर का खर्च चला रहे हैं। प्रमोद ने बताया कि उन्होंने इस राखी को स्पेशल बनाने के लिए बगेट (चीड़ के छिलके) से राखी बनाई हैं। यह राखी देखने में काफी आकर्षक, मजबूत और सस्ती है। बताया कि गरीब बहनों को यह राखियां मुफ्त दी जा रहीं हैं। प्रमोद को कहना है कि वह घरों के आसपास की प्राकृतिक चीजों को उत्पाद बनाने में प्रयोग कर रहे हैं। इससे उन्हें महंगी लागत में कच्चा माल खरीदने से राहत मिल रही है। बताया कि पहाड़ों में पाई जाने वाली तमाम प्राकृतिक चीजों का उपयोग अपनी आजीविका के लिए किया जा सकता है।
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जीआईसी सलानी के शिक्षक हरीश दफौटी ने बताया कि गरुड़ तहसील के लमचूला निवासी प्रमोद शिवाशीष दो साल पहले 12वीं की कक्षा में पढ़ाई करता था। युवक की घर की आर्थिक स्थिति काफी कमजोर है। युवक 12वीं की बोर्ड परीक्षा में फेल होने के बाद रोजगार की तलाश में दिल्ली चला गया। बताया कि दिल्ली में अच्छा काम न मिल पाने के कारण प्रमोद निराश हो गया। कुछ समय के बाद बीमार होने के कारण घर लौट आया। बताया कि उनका अपने पढ़ाए छात्र-छात्राओं से अच्छा संपर्क होने कारण प्रमोद ने उन्हें अपनी स्थिति बताई। साथी प्रमोद की हस्तकला की विशिष्टता जानते थे। उनके निर्देशन में प्रमोद ने कला उत्सव 2017 में राज्य स्तर पर शिल्पकला में दूसरा और वर्ष 2018 में राज्य स्तर में प्रथम स्थान प्राप्त किया। बताया कि इस वर्ष राष्ट्रीय कला उत्सव भोपाल में प्रमोद ने उत्तराखंड का प्रतिनिधित्व किया। जहां प्रमोद के कार्य की प्रसिद्ध चित्रकार राजीव लोचन ने काफी सराहना की। बताया कि उन्होंने प्रमोद को कालांजय कार्यशाला के माध्यम से बगेट शिल्प, पेंटिंग, टेराकोटा, पपरमैस्सी आदि का प्रशिक्षण दिया। प्रमोद अपनी कड़ी मेहनत और मजबूत इच्छाशक्ति से शिल्प कार्य में पारंगत हो गए। उन्होंने प्रमोद की आर्थिक सहायता कर स्वरोजगार के लिए प्रोत्साहित किया। इसके बाद प्रमोद ने हस्तशिल्प के कौशल से तमाम प्रकार के उत्पाद बनाना शुरू किया।
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मंदिरों की बना रहे हैं आकर्षक प्रतिकृति
बागेश्वर। शिक्षक हरीश दफौटी ने बताया कि प्रमोद बगेट की घड़ी, वॉल पेंटिंग, बागनाथ और केदारनाथ समेत अन्य मंदिरों की प्रतिकृतियां आदि बना रहे हैं। इनकी बाजार में काफी मांग है। लॉकडाउन में मंदी के बावजूद प्रमोद आसानी से अपने घर का खर्च चला रहे हैं। प्रमोद ने बताया कि उन्होंने इस राखी को स्पेशल बनाने के लिए बगेट (चीड़ के छिलके) से राखी बनाई हैं। यह राखी देखने में काफी आकर्षक, मजबूत और सस्ती है। बताया कि गरीब बहनों को यह राखियां मुफ्त दी जा रहीं हैं। प्रमोद को कहना है कि वह घरों के आसपास की प्राकृतिक चीजों को उत्पाद बनाने में प्रयोग कर रहे हैं। इससे उन्हें महंगी लागत में कच्चा माल खरीदने से राहत मिल रही है। बताया कि पहाड़ों में पाई जाने वाली तमाम प्राकृतिक चीजों का उपयोग अपनी आजीविका के लिए किया जा सकता है।
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