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जरूरत का आधा पानी भी नहीं मिल रहा

Sat, 11 Feb 2017 12:28 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, बागेश्वर।
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, बागेश्वर। Updated Sat, 11 Feb 2017 12:28 AM IST
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Half of the need can not find water
water shimla

बागेश्वर। एक दर्जन से अधिक छोटी बड़ी नदियों के किनारे बसे बागेश्वर जिले की अधिकांश आबादी को जरूरत का आधा पानी भी नहीं मिल पाता है। ग्रामीण इलाकों से लेकर नगरीय क्षेत्रों की स्थिति बेहद खराब है। जिले के 50 प्रतिशत से अधिक प्राकृतिक जल स्रोत या तो सूख चुके हैं या फिर इनका पानी दूषित हो गया है। बागेश्वर शहर के लिए इनफिल्ट्रेशन वेल तो बना दिया है लेकिन वितरण सिस्टम पुराना ही है। 

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बागेश्वर जिले में सरयू, गोमती, गरुड़ गंगा, पिंडर, पूर्वी रामगंगा, खीरगंगा, कुलूर नदी, पुंगर नदी, कनलगढ़, जैंगनगाड़, रेवती, गासौं नदियां स्थित हैं। करीब 2.50 लाख की आबादी वाले इस जिले की अधिकांश आबादी इन्हीं नदियों के किनारे रहती है। जिले में कुल 178 पेयजल योजनाएं हैं। इनमें से दो पेयजल योजनाएं नगरीय, शेष 176 ग्रामीण हैं। जिलेभर में 524 हैंडपंप लगाए गए हैं।
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3.83 करोड़ की लागत से बागेश्वर की सरयू नदी में बनाया गया इनफिल्ट्रेशन वेल का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। पंप से ट्रायल में पानी की सप्लाई भी हो रही है, लेकिन अभी वितरण सिस्टम पुराना ही है। पूरे नगर की आबादी को इसका लाभ तभी मिलेगा जब नया वितरण टैंक बनाकर सभी क्षेत्रों के लिए नई पाइप लाइन बिछाई जाए। जिले के ग्रामीण क्षेत्रों की पेयजल व्यवस्था भी ठीक नहीं है।
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बागेश्वर, गरुड़ ब्लॉक में छह से सात एमएलडी पानी की जरूरत है। ग्रामीण आबादी को जरूरत का पानी नहीं मिल पाता है। अधिकांश ग्रामीण परंपरागत नौले, धारों पर निर्भर हैं, लेकिन 50 प्रतिशत धारे सूख गए हैं या फिर नौलों के आसपास भवन निर्माण होने से इनका पानी दूषित हो गया है। ग्रामीण क्षेत्रों में गर्मियों में हर साल हाहाकार मचा रहता है। पेयजल की बात तो हर चुनाव में होती है लेकिन जनता की प्यास कब बुझेगी, इसका जवाब किसी के पास नहीं है। 

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