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देवी, नंदकुंड की यात्रा पर निकला चार सदस्यीय दल
अमर उजाला ब्यूरो, कपकोट (बागेश्वर)।
Updated Fri, 21 Sep 2018 10:54 PM IST
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कपकोट के भराड़ी में देवी और नंदकुंड की यात्रा पर जाता दल।
- फोटो : अमर उजाला
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कपकोट ब्लॉक के उच्च हिमालयी क्षेत्र स्थित देवी और नंदकुंड की तीन दिवसीय यात्रा पर चार सदस्यीय दल शुक्रवार को रवाना हो गया है। यह दल उच्च हिमालयी क्षेत्र के पर्यावरण, पर्यटन, साहसिक और धार्मिक महत्व का अध्ययन करेेगा।
भद्रतुंग के महंत देवानंद दास की अगुवाई में दल भराड़ी बाजार से देवी और नंद कुंड की यात्रा पर निकला। यह दल सोंग, मुनार, पतियासार, भद्रतुंग से झूनी गांव होते हुए शाम को पंकुवा टॉप पहुुंचेगा। आम तौर में चार दिन में होने वाली इस यात्रा को पदयात्रियों ने तीन दिन में पूरा करने का लक्ष्य बनाया है।
22 सितंबर को यह पंकुवा टॉप से कुंडों के लिए रवाना होगा। कुंड में स्नान, पूजा अर्चना के बाद दल के रविवार को वापस लौटने की संभावना है। दल ने बताया कि सरमूल से नंदाकुंड जाने वाले रास्ते का अध्ययन होगा। पर्यटन की संभावना तलाशी जाएगी। यात्रा के बाद शासन-प्रशासन को क्षेत्र के विकास और पर्यटन को बढ़ावा देने संबंधी सुझाव भेजे जाएंगे।
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इस दल में सरमूल, सौधारा, भद्रतुंग विकास समिति के सलाहकार दयाल कुमल्टा, शिक्षक गोपाल सिंह भंडारी, अवकाश प्राप्त शिक्षक कुशल सिंह धानिक शामिल हैं। उच्च हिमालयी क्षेत्र पर स्थित इन पवित्र कुंडों से श्रद्धालु दुर्गा, भगवती पूजा के लिए पवित्र जल और ब्रह्मकमल लाते हैं।
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भद्रतुंग के महंत देवानंद दास की अगुवाई में दल भराड़ी बाजार से देवी और नंद कुंड की यात्रा पर निकला। यह दल सोंग, मुनार, पतियासार, भद्रतुंग से झूनी गांव होते हुए शाम को पंकुवा टॉप पहुुंचेगा। आम तौर में चार दिन में होने वाली इस यात्रा को पदयात्रियों ने तीन दिन में पूरा करने का लक्ष्य बनाया है।
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22 सितंबर को यह पंकुवा टॉप से कुंडों के लिए रवाना होगा। कुंड में स्नान, पूजा अर्चना के बाद दल के रविवार को वापस लौटने की संभावना है। दल ने बताया कि सरमूल से नंदाकुंड जाने वाले रास्ते का अध्ययन होगा। पर्यटन की संभावना तलाशी जाएगी। यात्रा के बाद शासन-प्रशासन को क्षेत्र के विकास और पर्यटन को बढ़ावा देने संबंधी सुझाव भेजे जाएंगे।
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इस दल में सरमूल, सौधारा, भद्रतुंग विकास समिति के सलाहकार दयाल कुमल्टा, शिक्षक गोपाल सिंह भंडारी, अवकाश प्राप्त शिक्षक कुशल सिंह धानिक शामिल हैं। उच्च हिमालयी क्षेत्र पर स्थित इन पवित्र कुंडों से श्रद्धालु दुर्गा, भगवती पूजा के लिए पवित्र जल और ब्रह्मकमल लाते हैं।