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Bageshwar News: कांडा के कुचौली में अंगूर की खेती... विदेशी किस्मों संग महकेगी लोकल वाइन
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बागेश्वर। जिले के कांडा तहसील अंतर्गत कुचौली गांव में कृषि और स्वरोजगार के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक और अनूठा प्रयोग शुरू हुआ है। रिवर्स माइग्रेशन (गांव वापसी) की मिसाल पेश करते हुए एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर ने महानगर की नौकरी छोड़ अपने गांव लौटकर पहली बार बड़े पैमाने पर अंगूर की व्यावसायिक खेती शुरू की है। इस अनूठी पहल से अब पूरे उत्तराखंड में वाइन टूरिज्म और फल पट्टी विकास की नई राहें खुलती नजर आ रही हैं।
कुचौली निवासी उत्पादक विवेक पंत पेशे से सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं। कोरोनाकाल के दौरान जब वह महानगर से अपने गांव लौटे तो उन्होंने पारंपरिक खेती से हटकर कुछ नया करने की ठानी। विवेक ने महाराष्ट्र के नासिक से करीब एक हजार अंगूर के पौधे मंगाकर परीक्षण शुरू किया। आज उनकी करीब एक एकड़ जमीन में कैबरनेट, शिराज और सोविग्नॉन ब्लांक जैसी बहुप्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय वाइन किस्मों के साथ स्थानीय अंगूर की बेलों को मिलाकर 1,200 से अधिक पेड़ पूरी तरह तैयार हो चुके हैं।
खुद की वाइन डिस्टिलरी स्थापित, जल्द होगी बॉटलिंग
अंगूर के मूल्य संवर्धन के लिए विवेक ने कुचौली में ही अपनी वाइन डिस्टिलरी भी स्थापित कर ली है। यहां उत्पादित अंगूरों से वाइन तैयार करने का सफल प्रयोग हो चुका है जिसकी जल्द ही बॉटलिंग की जानी प्रस्तावित है।
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महाराष्ट्र की वाइन से बेहतर होगी कांडा की वाइन : केवीके
कृषि विज्ञान केंद्र काफलीगैर के प्रभारी डॉ. राजकुमार ने इस प्रयोग को जिले के लिए मील का पत्थर बताया है। उन्होंने कहा कि अंगूर मूलतः शीतोष्ण वातावरण का फल है और कांडा की जलवायु इसके लिए बेहद अनुकूल है। कांडा के ठंडे वातावरण में तैयार होने वाले इन अंगूरों से बनी वाइन की गुणवत्ता और मिठास, महाराष्ट्र के गर्म इलाकों में बनने वाली वाइन से कहीं अधिक बेहतर होगी। इससे पर्वतीय क्षेत्रों में स्वरोजगार के अभूतपूर्व अवसर पैदा होंगे।
भविष्य की तैयारी, अब लगेंगे नाशपाती के क्लस्टर
कुचौली स्थित वाइनरी की भविष्य की खपत को देखते हुए उद्यान सचल केंद्र, कांडा की ओर से क्षेत्र में अब नाशपाती के क्लस्टर विकसित करने की योजना पर काम किया जा रहा है। केंद्र के प्रभारी कमल किशोर पंत ने बताया कि आगामी शीतकाल में पांच हेक्टेयर से अधिक भूमि पर नाशपाती के बगीचे लगाने का प्रस्ताव है। इससे वाइनरी के लिए कच्चा माल स्थानीय स्तर पर ही उपलब्ध हो जाएगा जिससे बाहरी राज्यों पर निर्भरता कम होगी और स्थानीय कृषकों की आजीविका में भारी सुधार होगा।
विभाग की तकनीकी मदद और मॉनिटरिंग
कांडा के कुचौली में अंगूर की व्यावसायिक खेती और वाइनरी का यह प्रयोग पूरे जिले के लिए अनूठा है। उद्यान विभाग सचल केंद्र के माध्यम से इस बगीचे की लगातार मॉनिटरिंग कर रहा है। कीट प्रबंधन और तकनीकी बारीकियों के लिए विशेषज्ञ जरूरी सलाह दे रहे हैं। उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए वहां पॉलीहाउस भी स्थापित कराए गए हैं। आगामी शीतकाल में प्रस्तावित नाशपाती के क्लस्टरों में भी स्थानीय काश्तकारों को जोड़कर विभाग हर संभव सहायता प्रदान करेगा। - हरीश चंद्र आर्या, डीएचओ, बागेश्वर
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कुचौली निवासी उत्पादक विवेक पंत पेशे से सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं। कोरोनाकाल के दौरान जब वह महानगर से अपने गांव लौटे तो उन्होंने पारंपरिक खेती से हटकर कुछ नया करने की ठानी। विवेक ने महाराष्ट्र के नासिक से करीब एक हजार अंगूर के पौधे मंगाकर परीक्षण शुरू किया। आज उनकी करीब एक एकड़ जमीन में कैबरनेट, शिराज और सोविग्नॉन ब्लांक जैसी बहुप्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय वाइन किस्मों के साथ स्थानीय अंगूर की बेलों को मिलाकर 1,200 से अधिक पेड़ पूरी तरह तैयार हो चुके हैं।
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खुद की वाइन डिस्टिलरी स्थापित, जल्द होगी बॉटलिंग
अंगूर के मूल्य संवर्धन के लिए विवेक ने कुचौली में ही अपनी वाइन डिस्टिलरी भी स्थापित कर ली है। यहां उत्पादित अंगूरों से वाइन तैयार करने का सफल प्रयोग हो चुका है जिसकी जल्द ही बॉटलिंग की जानी प्रस्तावित है।
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महाराष्ट्र की वाइन से बेहतर होगी कांडा की वाइन : केवीके
कृषि विज्ञान केंद्र काफलीगैर के प्रभारी डॉ. राजकुमार ने इस प्रयोग को जिले के लिए मील का पत्थर बताया है। उन्होंने कहा कि अंगूर मूलतः शीतोष्ण वातावरण का फल है और कांडा की जलवायु इसके लिए बेहद अनुकूल है। कांडा के ठंडे वातावरण में तैयार होने वाले इन अंगूरों से बनी वाइन की गुणवत्ता और मिठास, महाराष्ट्र के गर्म इलाकों में बनने वाली वाइन से कहीं अधिक बेहतर होगी। इससे पर्वतीय क्षेत्रों में स्वरोजगार के अभूतपूर्व अवसर पैदा होंगे।
भविष्य की तैयारी, अब लगेंगे नाशपाती के क्लस्टर
कुचौली स्थित वाइनरी की भविष्य की खपत को देखते हुए उद्यान सचल केंद्र, कांडा की ओर से क्षेत्र में अब नाशपाती के क्लस्टर विकसित करने की योजना पर काम किया जा रहा है। केंद्र के प्रभारी कमल किशोर पंत ने बताया कि आगामी शीतकाल में पांच हेक्टेयर से अधिक भूमि पर नाशपाती के बगीचे लगाने का प्रस्ताव है। इससे वाइनरी के लिए कच्चा माल स्थानीय स्तर पर ही उपलब्ध हो जाएगा जिससे बाहरी राज्यों पर निर्भरता कम होगी और स्थानीय कृषकों की आजीविका में भारी सुधार होगा।
विभाग की तकनीकी मदद और मॉनिटरिंग
कांडा के कुचौली में अंगूर की व्यावसायिक खेती और वाइनरी का यह प्रयोग पूरे जिले के लिए अनूठा है। उद्यान विभाग सचल केंद्र के माध्यम से इस बगीचे की लगातार मॉनिटरिंग कर रहा है। कीट प्रबंधन और तकनीकी बारीकियों के लिए विशेषज्ञ जरूरी सलाह दे रहे हैं। उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए वहां पॉलीहाउस भी स्थापित कराए गए हैं। आगामी शीतकाल में प्रस्तावित नाशपाती के क्लस्टरों में भी स्थानीय काश्तकारों को जोड़कर विभाग हर संभव सहायता प्रदान करेगा। - हरीश चंद्र आर्या, डीएचओ, बागेश्वर