{"_id":"b20c575e10b33bc624e9173e16ebdbdf","slug":"gomti-was-unceasing-stream-of-dim-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"मंद पड़ी गोमती की अविरल धारा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मंद पड़ी गोमती की अविरल धारा
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, बागेश्वर।
Updated Wed, 13 Jan 2016 11:09 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बैजनाथ मंदिर समूह के पास गोमती नदी में बनी कृत्रिम झील में पानी रोकने के बाद गोमती की अविरल धार की रफ्तार कुछ कम हो गई है। मकर संक्रांति के दिन इस बार लोगों को बागेश्वर में गोमती का पानी कम दिखाई देगा।
बैजनाथ कृत्रिम झील निर्माण एजेंसी सिंचाई विभाग ने ग्यारह जनवरी से नवनिर्मित बैजनाथ झील में पानी रोकना शुरू कर दिया था। मंगलवार को झील में पानी पूरा भर गया है।
जिससे झील से नीचे को काफी कम पानी बह रहा हैं। सिंचाई विभाग के एई बीसी नैनवाल ने बताया कि झील के सभी गेट पूर्ण रूप से बंद नहीं किए हैं। झील के लोकार्पण के बाद नदी में और पानी छोड़ा जाएगा। उन्होंने बताया कि झील में पानी रूकने के बाद नदी से लगे जल स्रोत और विकसित होने के साथ-साथ नहरों की सिंचाई क्षमता बढ़ेगी। मान्यता है कि बागेश्वर में मकर संक्रांति के दिन स्नान का महत्व कुंभ स्नान के बराबर हैं। उल्लेखनीय है कि बागेश्वर में स्नान गोमती, सरयू और सरस्वती के संगम तट पर न होकर सरयू नदी में होता है। बागनाथ मंदिर के प्रधान पुजारी पूरन रावल ने बताया कि बैजनाथ झील में पानी रुकने के बाद बागेश्वर में गोमती में पानी की मात्रा कुछ ही कम हुई है। उन्होंने बताया कि संक्रांति के दिन स्नान सरयू में होता है।
विज्ञापन
विज्ञापन
बैजनाथ कृत्रिम झील निर्माण एजेंसी सिंचाई विभाग ने ग्यारह जनवरी से नवनिर्मित बैजनाथ झील में पानी रोकना शुरू कर दिया था। मंगलवार को झील में पानी पूरा भर गया है।
विज्ञापन
जिससे झील से नीचे को काफी कम पानी बह रहा हैं। सिंचाई विभाग के एई बीसी नैनवाल ने बताया कि झील के सभी गेट पूर्ण रूप से बंद नहीं किए हैं। झील के लोकार्पण के बाद नदी में और पानी छोड़ा जाएगा। उन्होंने बताया कि झील में पानी रूकने के बाद नदी से लगे जल स्रोत और विकसित होने के साथ-साथ नहरों की सिंचाई क्षमता बढ़ेगी। मान्यता है कि बागेश्वर में मकर संक्रांति के दिन स्नान का महत्व कुंभ स्नान के बराबर हैं। उल्लेखनीय है कि बागेश्वर में स्नान गोमती, सरयू और सरस्वती के संगम तट पर न होकर सरयू नदी में होता है। बागनाथ मंदिर के प्रधान पुजारी पूरन रावल ने बताया कि बैजनाथ झील में पानी रुकने के बाद बागेश्वर में गोमती में पानी की मात्रा कुछ ही कम हुई है। उन्होंने बताया कि संक्रांति के दिन स्नान सरयू में होता है।
विज्ञापन