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Hindi News ›   Uttarakhand ›   Bageshwar News ›   Ghatgaad Gadhera flowing in the foothills of bageshwar Kanda Gram Panchayat Khunauli became victim of mining

Bageshwar: कभी घटगाड़ गधेरे के पानी से चलते थे पांच घराट, अब सूखने के कगार पर, कुछ घरों को मिल चुके हैं जख्म

Sat, 11 Jan 2025 01:54 PM IST
हीरा मेहरा कमल कांडपाल, संवाद
कमल कांडपाल, संवाद Published by: हीरा मेहरा Updated Sat, 11 Jan 2025 01:54 PM IST
सार

कांडा के ग्राम पंचायत खुनौली की तलहटी में बहने वाला घटगाड़ गधेरा खनन की भेंट चढ़ गया है। पांच साल पहले तक गधेरे के पानी से दस से अधिक घराट चला करते थे। खड़िया खनन शुरू होने के बाद गधेरा सूखने के कगार पर पहुंच गया। अब गधेरे में नाममात्र का पानी है।

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Ghatgaad Gadhera flowing in the foothills of bageshwar Kanda Gram Panchayat Khunauli became victim of mining
घटगाड़ गधेरे के किनारे बंजर पड़ा घराट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

 

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बागेश्वर जिले के कांडा के ग्राम पंचायत खुनौली की तलहटी में बहने वाला घटगाड़ गधेरा खनन की भेंट चढ़ गया है। पांच साल पहले तक गधेरे के पानी से दस से अधिक घराट (पनचक्कियां) चला करते थे। खड़िया खनन शुरू होने के बाद गधेरा सूखने के कगार पर पहुंच गया। अब गधेरे में नाममात्र का पानी है।

घटगाड़ गधेरा ग्राम पंचायत बहाली, नाघरसाहू, मयूं, इड़ा, भैरूचौबट्टा, खुनौली, भतौड़ा, नायल धपोला की सरहद से होते हुए डुंगरी के समीप पुंगर नदी में मिलता है। खनन शुरू होने से पहले गधेरे में सालभर बहुत पानी रहता था। इसमें इतना पानी था कि एक साथ दस घराट आसानी से चलते थे।

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खानें बढ़ती गईं, पानी कम होता गया
करीब 20 साल पहले क्षेत्र में खड़िया की पहली खान लगी। तब मैन्युअली खनन होता था। पिछले सात-आठ साल तक भी गधेरे में पानी की मात्रा अच्छी थी। धीरे-धीरे खानों की संख्या बढ़ती गई और खनन के लिए मशीनों का उपयोग होने लगा। मशीन लगने और खान बढ़ने के बाद गधेरे का पानी भी कम होने लगा। पानी की कमी से धीरे-धीरे घराट बंद होने लगे। वर्तमान में क्षेत्र में एक भी घराट नहीं है। गधेरे का पानी भी बेहद कम हो गया है। 

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अब सिंचाई के लिए भी नहीं जल
घटगाड़ गधेरे से ग्रामीणों को खेतों की सिंचाई के लिए भी पानी मिलता था। मवेशियों के लिए भी ग्रामीण इसी गधेरे से पानी ले जाते थे। खड़िया खान खुलने के बाद गधेरा मलबे से पटता चला गया। जमीन से फूटने वाले पानी के स्रोत बंद हो गए। धीरे-धीरे मलबा गधेरे को पाटता चला गया। अब अधिकतर स्थानों पर गधेरा गूल की शक्ल ले चुका है। बेहद कम मात्रा में पानी बचा होने से गधेरे का अस्तित्व भी समाप्त होने लगा है। संवाद

 

 

खनन से मकानों में पड़ गईं दरारें
खड़िया खनन से मल्ला सन्यूड़ा के कुछ घरों में दरारें पड़ चुकी हैं। मशीनों के वाइब्रेशन के कारण कुछ मकानों में दरारें आईं हैं। भू-धंसाव से एक शौचालय भी झुक गया है। कुछ स्थानों पर जमीन पर भी दरारें पड़ने लगीं हैं।

पूर्वजों के जमाने का घर है। खनन शुरू होने के बाद हमारे घराट बंजर हो गए हैं। नदी के आसपास के चारागाह खोद दिए गए हैं। मकानों में दरारें पड़ने से बरसात के दिनों में भूस्सखलन का भय बना रहता है। - दमयंती कांडपाल, ग्रामीण मल्ला सन्यूड़ा

गांव की नींव में खनन होने से जलस्रोत सूखने लगे हैं। पर्यावरण को भारी नुकसान हो रहा है। घटगाड़ गधेरे के आसपास झाड़ियों में रहने वाले जंगली जानवरों की आबादी क्षेत्र में दस्तक बढ़ रही है। मकान और शौचालय खतरे की जद में आ गया है।


-मदन कांडपाल, ग्रामीण मल्ला सन्यूड़ा

उच्च न्यायालय के आदेश के बाद जिले की सभी खड़िया खानें बंद हैं। मल्ला सन्यूड़ा में लोगों के मकानों में आई दरारों की भूगर्भीय जांच कराई जाएगी। घटगाड़ गधेरे में खनन का मलबा डालने के मामले की जांच की जाएगी। - मोनिका, एसडीएम, बागेश्वर

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