मैल से मुक्ति को छटपटा रहीं जीवनदायिनी नदियां
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बागेश्वर में लाखों लोगों की प्यास बुझाने वाली नदियों को ही कचराघर बना दिया गया है। हालात यह है कि नदियों में मीलों तक कूड़े के ढेर लगे हुए हैं। प्रतिदिन टनों कूड़ा डालने के कारण लोगों के पाप धोने वाली नदियां स्वयं मैल से मुक्ति के लिए छटपटा रही हैं।
बागेश्वर जिले की सरयू और गोमती नदियां न केवल लाखों लोगों की प्यास बुझाती हैं, बल्कि घाटी के खेतों की फसलें भी इन्हीं नदियों के पानी से लहलहाती हैं। इतना ही नहीं सदानीरा सरयू का बड़ा धार्मिक महत्व भी है। इसी आस्था के कारण बागनाथ मंदिर के निकट सरयू-गोमती नदी के संगम पर लोग पापों से मुक्ति के लिए विभिन्न पर्वों पर स्नान करते हैं। हर साल उत्तरायणी पर्व पर नदी में डुबकी लगाने के लिए विभिन्न स्थानों से हजारों लोग यहां पहुंचते हैं। इतने महत्व की नदियां होने के बावजूद लोगों ने इन्हीं नदियों को कूड़ाघर बना दिया है। हालात यह हैं कि कपकोट से लेकर बागेश्वर के बिलौना तक नदियों के किनारे कूड़ा ही कूड़ा पड़ा है। गोमती नदी का भी यही हाल है। गरुड़ नगर का पूरा कूड़ा इसी नदी में समाता है। कचरे के निस्तारण की व्यवस्था नहीं होने से हर साल हजारों टन कूड़ा इस नदी में डाला जा रहा है। ऐसे में पानी के प्रदूषित होने से मानव स्वास्थ्य तो प्रभावित होता ही है पर्यावरण को भी गंभीर खतरा पैदा हो रहा है।
नदियों में सबसे अधिक प्लास्टिक कचरा
सरयू, गोमती नदियों में फेंके जा रहे कूड़े में सबसे अधिक मात्रा प्लास्टिक कचरे की है। पॉलिथीन की थैलियों के जल्दी नष्ट नहीं होने के कारण यह कूड़ा वर्षों तक नदियों में पड़ा रहकर प्रदूषण फैलाता है। प्लास्टिक कचरे से पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य को तो नुकसान पहुंच ही रहा है, यह जलीय जीवों के लिए भी हानिकारक होता है।