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गढ़िया समुदाय अगले महीने मनाएगा भैय्यादूज और गोबर्द्धन पूजा का त्यौहार
अमर उजाला ब्यूरो, बागेश्वर।
Updated Wed, 18 Oct 2017 09:56 PM IST
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उत्तराखंड में मनाए जाने वाले अधिकतर त्यौहार कृषि से संबंधित ही हैं। इन्हीं में से हैं दीपावली पर्व के साथ मनाए जाने वाले गोवर्धन पूजा और भैय्यादूज त्यौहार। इन त्यौहारों को लोग दीपावली पर्व पर ही जहां धूमधाम से मनाते हैं वहीं कपकोट ब्लॉक के पोथिंग समेत कई गांवों में रह रहा गढ़िया समुदाय इन्हें दीपावली पर्व पर नहीं मनाता है। इन त्यौहारों को वह अगले महीने की 18 और 19 तारीख को मनाएंगे।
इस पर्व को दीपावली के साथ नहीं मनाने के पीछे ग्रामीणों के अपने-अपने तर्क हैं, जिनमें पशुओं को खोजने में अधिक समय लगना भी एक कारण बताया जाता है। समुदाय में इन त्यौहारों को गढ़िया बग्वाल के नाम से भी जाना जाता है। दीपावली पर्व के दूसरे दिन गोवर्धन पूजा और तीसरे दिन भैय्यादूज का पर्व मनाया जाता है। इस दिन लोग धान को भिगोकर उसे आग में भूनते हैं। इसके बाद ओखली में मोशली से कूटकर उससे च्यूड़े बनाते हैं।
बहिनें भाईयों के सिर पर च्यूड़े रखकर उनके दीर्घ और सुखमय जीवन की कामना करती हैं। स्थानीय भाषा में इस पर्व को च्यूड़ी बग्वाल या द्वितीया का पर्व कहा जाता है। वैसे तो इस बार गोवर्धन का त्यौहार 20 और भैय्यादूज का त्यौहार 21 अक्तूबर को पड़ रहा है, लेकिन पोथिंग, तोली, लीली, गडेरा, डौ, लखमारा, छुरिया, कन्यालीकोट, बीथी, पन्याती कपकोट, फरसाली आदि गांवों में रहने वाले गढ़िया जाति के सैकड़ों परिवार इस दिन यह त्यौहार न मनाकर अगले महीने के 18 और 19 नवंबर को मनाएंगे।
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इन त्यौहारों को दिवाली पर्व के साथ नहीं मनाए जाने के पीछे ग्रामीणों के अपने-अपने तर्क हैं। सामाजिक कार्यकर्ता विनोद गढ़िया बताते हैं कि उनके बुजुर्गों के अनुसार सदियों पूर्व भैय्यादूज पर्व के पहले दिन उनके बैल खो गए, जिन्हें ढूंढने में एक महीने का समय लग गया इसलिए वह दीपावली पर्व के साथ गोवर्धन पूजा और भैय्यादूज का त्यौहार नहीं मना सके।
कुछ अन्य बुजुर्गों के अनुसार धान मड़ाई का काम पूरा नहीं होने से वह च्यूड़े नहीं बना सके, जिस कारण भैय्यादूज देर से मनाया गया। उन्होंने बताया कि मार्गशीर्ष महीने की चतुर्दशी की शाम और दूसरे दिन गढ़िया बग्वाल मनाया जाएगा यानी त्यौहार 18 और 19 नवंबर को मनाया जाएगा।
-नए अंदाज में मनाया जाएगा गढ़िया बग्वाल
सुकुंडा युवा ग्रुप पोथिंग के संयोजक भूपेश गढ़िया का कहना है कि इस बार गढ़िया बग्वाल कुछ नए अंदाज में मनाने का विचार है। इसके लिए 25 अक्तूबर सुबह 11 बजे से पोथिंग गांव स्थित भगवती मंदिर की तिबारी में ग्रामीणों की आम बैठक होगी। कहा कि बैठक में आए सुझावों पर ही कार्यक्रम तय किए जाएंगे।
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इस पर्व को दीपावली के साथ नहीं मनाने के पीछे ग्रामीणों के अपने-अपने तर्क हैं, जिनमें पशुओं को खोजने में अधिक समय लगना भी एक कारण बताया जाता है। समुदाय में इन त्यौहारों को गढ़िया बग्वाल के नाम से भी जाना जाता है। दीपावली पर्व के दूसरे दिन गोवर्धन पूजा और तीसरे दिन भैय्यादूज का पर्व मनाया जाता है। इस दिन लोग धान को भिगोकर उसे आग में भूनते हैं। इसके बाद ओखली में मोशली से कूटकर उससे च्यूड़े बनाते हैं।
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बहिनें भाईयों के सिर पर च्यूड़े रखकर उनके दीर्घ और सुखमय जीवन की कामना करती हैं। स्थानीय भाषा में इस पर्व को च्यूड़ी बग्वाल या द्वितीया का पर्व कहा जाता है। वैसे तो इस बार गोवर्धन का त्यौहार 20 और भैय्यादूज का त्यौहार 21 अक्तूबर को पड़ रहा है, लेकिन पोथिंग, तोली, लीली, गडेरा, डौ, लखमारा, छुरिया, कन्यालीकोट, बीथी, पन्याती कपकोट, फरसाली आदि गांवों में रहने वाले गढ़िया जाति के सैकड़ों परिवार इस दिन यह त्यौहार न मनाकर अगले महीने के 18 और 19 नवंबर को मनाएंगे।
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इन त्यौहारों को दिवाली पर्व के साथ नहीं मनाए जाने के पीछे ग्रामीणों के अपने-अपने तर्क हैं। सामाजिक कार्यकर्ता विनोद गढ़िया बताते हैं कि उनके बुजुर्गों के अनुसार सदियों पूर्व भैय्यादूज पर्व के पहले दिन उनके बैल खो गए, जिन्हें ढूंढने में एक महीने का समय लग गया इसलिए वह दीपावली पर्व के साथ गोवर्धन पूजा और भैय्यादूज का त्यौहार नहीं मना सके।
कुछ अन्य बुजुर्गों के अनुसार धान मड़ाई का काम पूरा नहीं होने से वह च्यूड़े नहीं बना सके, जिस कारण भैय्यादूज देर से मनाया गया। उन्होंने बताया कि मार्गशीर्ष महीने की चतुर्दशी की शाम और दूसरे दिन गढ़िया बग्वाल मनाया जाएगा यानी त्यौहार 18 और 19 नवंबर को मनाया जाएगा।
-नए अंदाज में मनाया जाएगा गढ़िया बग्वाल
सुकुंडा युवा ग्रुप पोथिंग के संयोजक भूपेश गढ़िया का कहना है कि इस बार गढ़िया बग्वाल कुछ नए अंदाज में मनाने का विचार है। इसके लिए 25 अक्तूबर सुबह 11 बजे से पोथिंग गांव स्थित भगवती मंदिर की तिबारी में ग्रामीणों की आम बैठक होगी। कहा कि बैठक में आए सुझावों पर ही कार्यक्रम तय किए जाएंगे।