फरसाली के तीन गांवों में पीने को पानी को लेकर मचा हाहाकार
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बीते पांच दिन पहले हुई भारी बारिश से फरसाली क्षेत्र की तीन ग्राम पंचायतों के लिए बनी दो पेयजल लाइनें क्षतिग्रस्त हो गई थी। तब से लाइनों के सुचारू नहीं होने से ग्रामीणों को पीने के पानी के लिए कई परेशानियां झेलनी पड़ रही हैं। नजदीक में पीने के पानी के अन्य स्रोत नहीं होने के कारण ग्रामीणों को स्थानीय गधेरों के दूषित पानी का सहारा लेने को मजबूर होना पड़ रहा है। गंदा पानी पीने के कारण गांव में बीमारी फैलने की आशंका बनी है। पानी की आपूर्ति नहीं होने से गांव की पांच हजार की आबादी प्यासी हो गई है। ग्रामीणों ने पेयजल संस्थान से लाइनों को शीघ्र दुरुस्त करने को कहा है।
सामाजिक कार्यकर्ता दान सिंह पुतलिया ने बताया कि गत 29 और 30 जून को हुई भीषण बारिश से फरसाली वल्ली, पल्ली और मल्लादेश की करीब चार हजार की आबादी के लिए पंगराणी जलस्रोत से पेयजल संस्थान और स्वजल परियोजना की बनी पेयजल लाइन क्षतिग्रस्त हो गई थी। तब से लाइनों के सुचारु नहीं की गई हैं। गांवों में पानी के अन्य स्रोत नहीं होने के कारण ग्रामीण और मवेशी एक ही गधेरे से पानी पीने को मजबूर हैं। इन्हीं लाइनों से इंटर कालेज, प्राइमरी स्कूल और शिशु मंदिर के बच्चे भी लाभांवित होते हैं। योजनाओं से पानी की आपूर्ति नहीं होने के कारण स्कूलों में बच्चों के लिए मध्याह्न भोजन बनाने के लिए भोजन माताओं को कई परेशानियां झेलनी पड़ रही हैं।
उन्होंने पेयजल संस्थान से लाइनों को शीघ्र दुरुस्त करने की मांग की है। इधर पेयजल संस्थान के ईई केएस खाती ने कहा कि विभाग की लाइनों को ठीक करने के प्रयास किए जा रहे हैं। मौसम के अनुकूल रहने पर लाइनों को शीघ्र ही दुरुस्त हो जाएगी। इधर गरुड़ क्षेत्र के अणां बानणा द्वितीय पेयजल योजना द्वितीय का हेड एक जुलाई को बारिश से बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया था। तब से गरुड़ बाजार, टीट बाजार, टानीखेत, भकूनखोला, गोलू मार्केट, गढ़सेर सहित आधा दर्जन से अधिक गांवों में पेयजल संकट गहरा गया है। पेयजल संकट के दौर से गुजर रहे ग्रामीण नदी नालों का प्रदूषित पानी पीने को मजबूर है।