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बागेश्वर के नामतीचेटाबगड़ में जंगल की आग से चार मकान जले
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लमगड़ा क्षेत्र में जंगल की आग बुझाते दमकल कर्मी
- फोटो : ALMORA
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बागेश्वर। जंगलों की आग अब आबादी की ओर बढ़ने लगी है। वन विभाग लाचार नजर आ रहा है। जंगल की आग की चपेट में आने से कपकोट ब्लॉक के नामतीचेटाबगड़ में पांच मकान जल गए। मकानों में रखा सारा सामान राख हो गया है। गनीमत यह रही कि यह मकान बरसात में रहने के लिए बनाए गए थे। इनमें वर्तमान में कोई रह नहीं रहा था। अन्यथा जानमाल का नुकसान हो सकता था।
मिली जानकारी के अनुसार नामतीचेटाबगड़ के जंगलों में मंगलवार की रात को भीषण आ लगी थी। देखते ही देखते आग आबादी की ओर बढ़ गई। आग ने नामतीचेटाबगड़ के तोक पोथियाधुरा में प्रहलाद सिंह कोश्यारी, जय सिंह कोश्यारी, गुलाब सिंह कोश्यारी, हयात सिंह कोश्यारी और पुष्कर सिंह कोश्यारी के मकानों को अपनी चपेट में ले लिया। आग से मकान जलने लगे। मकानों में रखा सारा सामान जल गया। मकानों की छतें पूरी तरह से जल गई हैं। नामतीचेटाबगड़ के ग्राम प्रधान नवीन कुमार ने बताया कि मकानों के भीतर गेहूं, धान के साथ ही अन्य अनाज रखा था। सब कुछ जल गया। प्रधान का कहना है कि इन मकानों में कभी-कभी लोग रहते भी थे। संयोग से मंगलवार की रात मकानों में कोई नहीं था। जंगल आग से झुलस रहे हैं। वन विभाग आग की रोकथाम के लिए पुख्ता इंतजाम नहीं कर पा रहा है। उन्होंने प्रभावितों को पर्याप्त आर्थिक मदद देने की मांग की है।
जंगल की आग से झिरौली मैग्नेसाइट के दो गोदाम जले
बागेश्वर। जंगल की आग से अल्मोड़ा मैग्नेसाइट झिरौली के दो गोदाम जल गए। फैक्टरी को करीब पांच लाख रुपये का नुकसान हुआ है।
मिली जानकारी के अनुसार बुधवार को झिरौली, नैणी के जंगलों में आग लगी हुई थी। अचानक जंगल की आग मैग्नेसाइट के गोदाम तक पहुंच गई। आग की चपेट में आने से दो गोदाम जलकर राख हो गए। गोदाम में जीआइ पाइप, रबर के पाइप, पुराना फर्नीचर. कबाड़ आदि रखा गया था। भवनों को भी काफी नुकसान हुआ है। थानाध्यक्ष कैलाश सिंह नेगी ने बताया कि आग को फैलने से रोक लिया गया था। मैग्नेसाइट प्रबंधन के अनुसार आग की रोकथाम के लिए फायर लाइन भी बनाई गई थी, लेकिन तेज हवा के कारण आग की लपटों ने गोदाम को अपनी चपेट में ले लिया। संवाद
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जंगलों में आग लगने का सिलसिला थम नहीं रहा
बागेश्वर। बुधवार को भी जंगलों में आग लगने का सिलसिला जारी रहा। जिले के घेटी के जंगल में आग लगने से वनस्पति को खासा नुकसान पहुंचा है। पर्यावरण प्रेमी बीबी जोशी ने वनों की आग की रोकथाम के लिए पुख्ता कदम उठाने की मांग वन विभाग से की है। जिला मुख्यालय में आरएफसी गोदाम के पास नई बस्ती के जंगल में लगी आग को अग्निशमन दल ने बमुश्किल बुझाया। संवाद
अल्मोड़ा में चार स्थानों पर जले जंगल
अल्मोड़ा। गर्मी के मौसम में जिले के जंगलों में लगातार आग लग रही है। बुधवार को भी जिले में चार स्थानों पर वन क्षेत्र में आग लगने से वन संपदा का नुकसान हुआ। जिले में बुुधवार को अल्मोड़ा, जागेश्वर, लमगड़ा और जौरासी वन क्षेत्र में वनाग्नि की घटनाएं हुई। इस फायर सीजन में जौरासी, जागेश्वर और लमगड़ा क्षेत्र में सबसे अधिक वनाग्नि की घटनाएं हुई हैं। जिसमें कई हेक्टेयर वन क्षेत्र जलने के साथ ही लाखों की वन संपदा का भी नुकसान हुआ है। दमकल विभाग और वन विभाग के फायर वॉचर अधिक से अधिक स्थानों पर पहुंचकर आग बुझाने का प्रयास कर रहे हैं लेकिन संसाधन पर्याप्त न होने के कारण सभी स्थानों पर आग बुझाने में समय लग रहा है। क्षेत्र में कुछ वन क्षेत्र ऐसे भी हैं जहां पर दमकल वाहनों का पहुंचना मुश्किल है ऐसे स्थानों पर आग बुझाना वन विभाग और दमकल विभाग के लिए चुनौती बना हुआ है। जिले में कई स्थानों पर आबादी क्षेत्र जंगल से सटे हैं। ऐसे में जंगल की आग को आबादी क्षेत्र में पहुंचने से रोकना वन विभाग के लिए चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।
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मिली जानकारी के अनुसार नामतीचेटाबगड़ के जंगलों में मंगलवार की रात को भीषण आ लगी थी। देखते ही देखते आग आबादी की ओर बढ़ गई। आग ने नामतीचेटाबगड़ के तोक पोथियाधुरा में प्रहलाद सिंह कोश्यारी, जय सिंह कोश्यारी, गुलाब सिंह कोश्यारी, हयात सिंह कोश्यारी और पुष्कर सिंह कोश्यारी के मकानों को अपनी चपेट में ले लिया। आग से मकान जलने लगे। मकानों में रखा सारा सामान जल गया। मकानों की छतें पूरी तरह से जल गई हैं। नामतीचेटाबगड़ के ग्राम प्रधान नवीन कुमार ने बताया कि मकानों के भीतर गेहूं, धान के साथ ही अन्य अनाज रखा था। सब कुछ जल गया। प्रधान का कहना है कि इन मकानों में कभी-कभी लोग रहते भी थे। संयोग से मंगलवार की रात मकानों में कोई नहीं था। जंगल आग से झुलस रहे हैं। वन विभाग आग की रोकथाम के लिए पुख्ता इंतजाम नहीं कर पा रहा है। उन्होंने प्रभावितों को पर्याप्त आर्थिक मदद देने की मांग की है।
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जंगल की आग से झिरौली मैग्नेसाइट के दो गोदाम जले
बागेश्वर। जंगल की आग से अल्मोड़ा मैग्नेसाइट झिरौली के दो गोदाम जल गए। फैक्टरी को करीब पांच लाख रुपये का नुकसान हुआ है।
मिली जानकारी के अनुसार बुधवार को झिरौली, नैणी के जंगलों में आग लगी हुई थी। अचानक जंगल की आग मैग्नेसाइट के गोदाम तक पहुंच गई। आग की चपेट में आने से दो गोदाम जलकर राख हो गए। गोदाम में जीआइ पाइप, रबर के पाइप, पुराना फर्नीचर. कबाड़ आदि रखा गया था। भवनों को भी काफी नुकसान हुआ है। थानाध्यक्ष कैलाश सिंह नेगी ने बताया कि आग को फैलने से रोक लिया गया था। मैग्नेसाइट प्रबंधन के अनुसार आग की रोकथाम के लिए फायर लाइन भी बनाई गई थी, लेकिन तेज हवा के कारण आग की लपटों ने गोदाम को अपनी चपेट में ले लिया। संवाद
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जंगलों में आग लगने का सिलसिला थम नहीं रहा
बागेश्वर। बुधवार को भी जंगलों में आग लगने का सिलसिला जारी रहा। जिले के घेटी के जंगल में आग लगने से वनस्पति को खासा नुकसान पहुंचा है। पर्यावरण प्रेमी बीबी जोशी ने वनों की आग की रोकथाम के लिए पुख्ता कदम उठाने की मांग वन विभाग से की है। जिला मुख्यालय में आरएफसी गोदाम के पास नई बस्ती के जंगल में लगी आग को अग्निशमन दल ने बमुश्किल बुझाया। संवाद
अल्मोड़ा में चार स्थानों पर जले जंगल
अल्मोड़ा। गर्मी के मौसम में जिले के जंगलों में लगातार आग लग रही है। बुधवार को भी जिले में चार स्थानों पर वन क्षेत्र में आग लगने से वन संपदा का नुकसान हुआ। जिले में बुुधवार को अल्मोड़ा, जागेश्वर, लमगड़ा और जौरासी वन क्षेत्र में वनाग्नि की घटनाएं हुई। इस फायर सीजन में जौरासी, जागेश्वर और लमगड़ा क्षेत्र में सबसे अधिक वनाग्नि की घटनाएं हुई हैं। जिसमें कई हेक्टेयर वन क्षेत्र जलने के साथ ही लाखों की वन संपदा का भी नुकसान हुआ है। दमकल विभाग और वन विभाग के फायर वॉचर अधिक से अधिक स्थानों पर पहुंचकर आग बुझाने का प्रयास कर रहे हैं लेकिन संसाधन पर्याप्त न होने के कारण सभी स्थानों पर आग बुझाने में समय लग रहा है। क्षेत्र में कुछ वन क्षेत्र ऐसे भी हैं जहां पर दमकल वाहनों का पहुंचना मुश्किल है ऐसे स्थानों पर आग बुझाना वन विभाग और दमकल विभाग के लिए चुनौती बना हुआ है। जिले में कई स्थानों पर आबादी क्षेत्र जंगल से सटे हैं। ऐसे में जंगल की आग को आबादी क्षेत्र में पहुंचने से रोकना वन विभाग के लिए चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।

अल्मोड़ा, जागेश्वर क्षेत्र जंगल में लगी आग- फोटो : ALMORA

बागेश्वर के नामतीचेटाबगड़ में मकानों में लगी आग बुझाते ग्रामीण। विज्ञप्ति- फोटो : BAGESHWAR