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इस साल बागेश्वर में वनाग्नि की केवल चार घटनाएं हुई
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बागेश्वर। जिले में इस वर्ष का फायर सीजन वनाग्नि की घटनाओं के लिहाज से सुकून देने वाला रहा है। इस साल वनाग्नि की केवल चार घटना हुई हैं। इनमें केवल 5.25 हेक्टेयर क्षेत्रफल प्रभावित हुआ है, जबकि पिछले फायर सीजन में वनाग्नि की 104 घटनाएं हुईं, जिनमें 184.17 हेक्टेयर क्षेत्रफल प्रभावित हुआ था। वनाग्नि की कम घटनाओं के पीछे लॉकडाउन और लगातार हुई बारिश का अहम रोल रहा है।
जिले में आरक्षित वन 66236.0 हेक्टेयर और पंचायती वन 38781.54 हेक्टेयर है। पिछले वर्षों में वनाग्नि के लिहाज से जिला काफी संवेदनशील रहा है। वनाग्नि की घटनाओं से वन संपदा को भारी नुकसान पहुंचता है और कई बार आग बेकाबू होकर आबादी तक पहुंच जाती है। इससे निपटने के लिए वन विभाग को मशक्कत करनी पड़ती है। अधिक गर्मी और बारिश न होने से जंगल सूखने के कारण भी वनाग्नि की अधिक घटनाएं देखने को मिलती है। कोरोना के कारण मार्च, अप्रैल, मई में लोग घरों में कैद रहे। लोगों का जंगलों की ओर रुख कम रहा। लगातार हुई बारिश से भी आग की घटनाओं पर अंकुश लगा।
विभागीय आंकड़ों के मुताबिक इस फायर सीजन में बागेश्वर रेंज के आरक्षित क्षेत्र में वनाग्नि की एक घटना हुई। इसमें दो हेक्टेयर क्षेत्रफल प्रभावित हुआ। गढ़खेत रेंज के आरक्षित वन क्षेत्र में वनाग्नि की एक घटना हुई, जिसमें एक हेक्टेयर क्षेत्रफल प्रभावित हुआ। धरमघर रेंज के वन पंचायत क्षेत्र में वनाग्नि की एक घटना हुई। इसमें 0.25 हेक्टेयर क्षेत्रफल प्रभावित हुआ। कपकोट रेंज के आरक्षित वन क्षेत्र में एक घटना हुई, जिसमें दो हेक्टेयर क्षेत्रफल प्रभावित हुआ। जबकि ग्लेशियर और बैजनाथ रेंज में वनाग्नि की कोई घटना नहीं हुई।
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वनाग्नि की घटना वर्षवार
वर्ष घटना प्रभावित क्षेत्रफल (हेक्टेयर में)
2016 - 55- 219.35
2017 - 44- 88.30
2018 - 130- 297.25
2019 - 104- 184.17
2020 - 04- 5.25
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जिले में आरक्षित वन 66236.0 हेक्टेयर और पंचायती वन 38781.54 हेक्टेयर है। पिछले वर्षों में वनाग्नि के लिहाज से जिला काफी संवेदनशील रहा है। वनाग्नि की घटनाओं से वन संपदा को भारी नुकसान पहुंचता है और कई बार आग बेकाबू होकर आबादी तक पहुंच जाती है। इससे निपटने के लिए वन विभाग को मशक्कत करनी पड़ती है। अधिक गर्मी और बारिश न होने से जंगल सूखने के कारण भी वनाग्नि की अधिक घटनाएं देखने को मिलती है। कोरोना के कारण मार्च, अप्रैल, मई में लोग घरों में कैद रहे। लोगों का जंगलों की ओर रुख कम रहा। लगातार हुई बारिश से भी आग की घटनाओं पर अंकुश लगा।
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विभागीय आंकड़ों के मुताबिक इस फायर सीजन में बागेश्वर रेंज के आरक्षित क्षेत्र में वनाग्नि की एक घटना हुई। इसमें दो हेक्टेयर क्षेत्रफल प्रभावित हुआ। गढ़खेत रेंज के आरक्षित वन क्षेत्र में वनाग्नि की एक घटना हुई, जिसमें एक हेक्टेयर क्षेत्रफल प्रभावित हुआ। धरमघर रेंज के वन पंचायत क्षेत्र में वनाग्नि की एक घटना हुई। इसमें 0.25 हेक्टेयर क्षेत्रफल प्रभावित हुआ। कपकोट रेंज के आरक्षित वन क्षेत्र में एक घटना हुई, जिसमें दो हेक्टेयर क्षेत्रफल प्रभावित हुआ। जबकि ग्लेशियर और बैजनाथ रेंज में वनाग्नि की कोई घटना नहीं हुई।
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वनाग्नि की घटना वर्षवार
वर्ष घटना प्रभावित क्षेत्रफल (हेक्टेयर में)
2016 - 55- 219.35
2017 - 44- 88.30
2018 - 130- 297.25
2019 - 104- 184.17
2020 - 04- 5.25