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सिंचित भूमि के किसानों की बल्ले-बल्ले
अमर उजाला ब्यूरो गरुड़ (बागेश्वर)।
Updated Sun, 22 Apr 2018 10:27 PM IST
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कत्यूर घाटी के असिंचित इलाकों में गेहूं का उत्पादन 25 फीसदी कम होने की आशंका है। कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक सर्दियों में पर्याप्त बारिश न होने के कारण यह स्थिति आई है। सिंचित क्षेत्रों में गेहूं का उत्पादन संतोषजनक होने की संभावना है।
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ब्लॉक के अंतर्गत 5,200 हेक्टेयर भूमि पर गेहूं की फसल बोई जाती है। ब्लॉक कृषि प्रभारी धन राम के मुताबिक गढ़सेर, टीट बाजार, राजसेरा, मन्यूड़ा, पुरुड़ा, देवनाई, डंगोली और पिंगलों इलाके में सिंचित भूमि में गेहूं की यूपी 2572 की प्रजाति अच्छी होने का अनुमान है। उनके अनुसार सिंचित इलाके में प्रति हेक्टेयर 15 क्विंटल गेहूं का उत्पादन होने का अनुमान है, जबकि 2017 में प्रति हेक्टेयर 14 क्विंटल गेहूं का उत्पादन ही हुआ था।
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उनका कहना है कि असिंचित इलाके में किसानों ने बीएल 892 प्रजाति का गेहूं बोया था। शीतकाल में पर्याप्त मात्रा में बारिश नहीं होने से असिंचित इलाके में गेेहूं का उत्पादन 25 फीसदी गिरने की संभावना है। किसान नवीन ममगई, किसान क्लब देवनाई के अध्यक्ष सुंदर बरोलिया, लौबांज के किसान बहादुर सिंह कोरंगा, कज्यूली के दिगपाल भंडारी, माल्दे की प्रधान कमला बिष्ट, तैलीहाट के तेज सिंह ने बताया कि सिंचित इलाके में गेहूं की फसल अच्छी हुई है।
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वहीं, असिंचित क्षेत्र के किसान दौलत सिंह किरमोलिया, पप्या के गोपाल सिंह परिहार, लखनी के माधो राम, लमचूला के मदन सिंह, गढ़खेत के भुवन चंद्र, गोपाल सिंह नेगी रतमटिया के मनोज बिष्ट ने बताया कि असिंचित इलाके में गेहूं का उत्पादन काफी कम होने की संभावना है।