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सीएम नहीं पहुंचे तो ईमेल से भेजे ज्ञापन
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बागेश्वर। दुग नाकुरी तहसील बनलेख के सनेती गांव में मां नंदा सुनंदा भगवती मेले के समापन पर प्रदेश के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के नहीं आने से ज्ञापन देने पहुंचे विभिन्न संगठन मायूस दिखे। सीएम के नहीं आने पर किसी ने विधायक को ज्ञापन सौंपे तो किसी ने ई मेल के जरिए ज्ञापन भेजे।
उत्तराखंड जनरल ओबीसी इंप्लाइज एसोसिएशन ने सीधी भर्ती में आरक्षण के प्रतिशत के त्रुटिपूर्ण अनुपालन को सही किए जाने संबंधी मंत्रिमंडल के निर्णय को लागू करने के लिए तत्काल शासनादेश जारी करने और पदोन्नति में आरक्षण व्यवस्था समाप्त करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में वर्ष 2001 में अनुसूचित जाति के पक्ष में अंतिम रुप से 29 प्रतिशत आरक्षण लागू किया गया था। इसके क्रियान्वयन के लिए जारी रोस्टर में सीधी भर्ती के संदर्भ में प्रत्येक रोस्टर बिंदु पर आरक्षण का प्रतिशत पचास से लेकर बीस तक बना रहता था जो कि विधि विपरीत था। इसका निराकरण करने के लिए मंत्रिमंडल ने 28 अगस्त 2019 में प्रथम रोस्टर बिंदु परिवर्तित किया है। मंत्रिमंडल का यह निर्णय आरक्षण का उचित प्रतिशत लागू करने में सहायक होगा। अनुसूचित जाति वर्ग के कर्मचारियों के एक संगठन द्वारा उत्तर प्रदेश से तुलना करते हुए इस विधिक त्रुटि सुधार का विरोध किया जा रहा है। यदि इस संबंध में उत्तर प्रदेश राज्य का दृष्टांत लिया जाता है तो उस व्यवस्था को समग्र रुप से लागू करते हुए उत्तर प्रदेश की ही तरह पदोन्नति में आरक्षण की व्यवस्था को 15 नवंबर से समाप्त किया जाए। मंत्रीमंडल द्वारा लिए गए निर्णय के क्रम में शासनादेश तत्काल जारी किया जाए। वहां रवि कुमार जोशी, केसी मिश्रा, संदीप कुमार जोशी, प्रकाश चंद्र जोशी, अरविंद कुमार पांडे, अनिल जोशी, कैलाश अंडोला, दामोदर जोशी, आलोक पांडे आदि थे। इधर प्राधिकरण हटाओ मोर्चा के कार्यकर्ता मुख्यमंत्री को ज्ञापन देने पहुंचे थे लेकिन उनके नहीं आने पर मोर्चा ने ई मेल के माध्यम से उन्हें ज्ञापन भेजा।
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उत्तराखंड जनरल ओबीसी इंप्लाइज एसोसिएशन ने सीधी भर्ती में आरक्षण के प्रतिशत के त्रुटिपूर्ण अनुपालन को सही किए जाने संबंधी मंत्रिमंडल के निर्णय को लागू करने के लिए तत्काल शासनादेश जारी करने और पदोन्नति में आरक्षण व्यवस्था समाप्त करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में वर्ष 2001 में अनुसूचित जाति के पक्ष में अंतिम रुप से 29 प्रतिशत आरक्षण लागू किया गया था। इसके क्रियान्वयन के लिए जारी रोस्टर में सीधी भर्ती के संदर्भ में प्रत्येक रोस्टर बिंदु पर आरक्षण का प्रतिशत पचास से लेकर बीस तक बना रहता था जो कि विधि विपरीत था। इसका निराकरण करने के लिए मंत्रिमंडल ने 28 अगस्त 2019 में प्रथम रोस्टर बिंदु परिवर्तित किया है। मंत्रिमंडल का यह निर्णय आरक्षण का उचित प्रतिशत लागू करने में सहायक होगा। अनुसूचित जाति वर्ग के कर्मचारियों के एक संगठन द्वारा उत्तर प्रदेश से तुलना करते हुए इस विधिक त्रुटि सुधार का विरोध किया जा रहा है। यदि इस संबंध में उत्तर प्रदेश राज्य का दृष्टांत लिया जाता है तो उस व्यवस्था को समग्र रुप से लागू करते हुए उत्तर प्रदेश की ही तरह पदोन्नति में आरक्षण की व्यवस्था को 15 नवंबर से समाप्त किया जाए। मंत्रीमंडल द्वारा लिए गए निर्णय के क्रम में शासनादेश तत्काल जारी किया जाए। वहां रवि कुमार जोशी, केसी मिश्रा, संदीप कुमार जोशी, प्रकाश चंद्र जोशी, अरविंद कुमार पांडे, अनिल जोशी, कैलाश अंडोला, दामोदर जोशी, आलोक पांडे आदि थे। इधर प्राधिकरण हटाओ मोर्चा के कार्यकर्ता मुख्यमंत्री को ज्ञापन देने पहुंचे थे लेकिन उनके नहीं आने पर मोर्चा ने ई मेल के माध्यम से उन्हें ज्ञापन भेजा।
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