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दानवीरों की कृपा से चल रहा दुगनाकुरी डिग्री कॉलेज
प्रेम प्रकाश्ा कांडपाल/अमर उजाला ब्यूरो,दुगनाकुरी (बागेश्वर)।
Updated Sat, 20 Feb 2016 11:24 PM IST
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इंटर कालेज की ओर से दिए गए दो कमरे, छात्रों के लिए 20 कुर्सियां पब्लिक स्कूल की, प्राध्यापकों के बैठने के लिए दो कुर्सियां और टेबल ग्रामीणों के दिए जबकि ऑफिस के लिए एक अलमारी अभियंता की दान दी हुई।
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यह तस्वीर है उच्च शिक्षा प्रदान करने वाले राजकीय महाविद्यालय दुगनाकुरी की। 20 छात्र संख्या वाले इस महाविद्यालय में चार प्रवक्ता संविदा पर कार्यरत हैं।
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छात्र-छात्राओं को उच्च शिक्षा प्रदान करने के लिए हाल में खोले गए महाविद्यालय बदहाल हैं। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि बागेश्वर जिले का दुगनाकुरी राजकीय महाविद्यालय लोगों की ओर से दिए गए दान के सामान से चल रहा है।
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वर्ष 2012 में महाविद्यालय खोलने की घोषणा के बाद इसी वर्ष चार फरवरी से दुगनाकुरी महाविद्यालय का संचालन शुरू किया गया। लेकिन इस महाविद्यालय का संचालन पूरी तरह से लोगों की दया पर हो रहा है। हालात यह हैं कि राइंका बनलेख के दो कमरों में संचालित हो रहे महाविद्यालय के छात्रों के बैठने के लिए मूलनारायण पब्लिक स्कूल ने 20 कुर्सियां दी है।
सिंचाई विभाग के अभियंता बलवंत सिंह की दी हुई अलमारी में कार्यालय के अभिलेख रखे जाते हैं। संविदा में कार्यरत तीन प्रवक्ताओं से लेकर प्रभारी प्राचार्य राजेश प्रसाद के बैठने के लिए भी पूर्व शिक्षक प्रेम सिंह सहित स्थानीय लोगों ने ही कुर्सी और मेज उपलब्ध कराए हैं।
बागेश्वर महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. एएसी पंत इसके नोडल अधिकारी हैं। महाविद्यालय में हिंदी, संस्कृत, अंग्रेजी, राजनीतिशास्त्र, समाजशास्त्र और अर्थशास्त्र विषय स्वीकृत हैं।
इन विषयों में प्रवेश के लिए पहले साल 40 छात्र-छात्राएं आए थे, लेकिन स्थान और संसाधन नहीं होने के कारण केवल 20 छात्र-छात्राओं को ही प्रवेश मिल सका। महाविद्यालय का संसाधनों के बगैर संचालन करने से स्थानीय लोगों में नाराजगी है।
ढूंढना पड़ता है महाविद्यालय
दुगनाकुरी के राइंका बनलेख के दो कमरों में चल रहे महाविद्यालय में कोई बोर्ड भी नहीं लगा है। यहां जाने वाले लोगों को कई बार पूछकर कॉलेज तक पहुंचने का रास्ता पता चलता है। ऐसे में सहज ही अनुमान लगाया जा सकता है संसाधन विहीन इन महाविद्यालयों में किस तरह की उच्च शिक्षा छात्र-छात्रा ग्रहण करेंगे।
दुगनाकुरी में महाविद्यालय के संचालन के लिए संविदा पर चार प्राध्यापकों की व्यवस्था की गई है। शीघ्र ही फर्नीचर और अन्य संसाधनों के लिए विधायक निधि से धनराशि उपलब्ध कराऊंगा। महाविद्यालय को सभी संसाधन मुहैया कराए जाएंगे।
- ललित फर्स्वाण, विधायक कपकोट।