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मजाक बनकर रह गई है दुग नाकुरी तहसील
ब्यूरो/अमर उजाला, बागेश्वर।
Updated Wed, 09 Aug 2017 10:55 PM IST
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दुग नाकुरी
- फोटो : amar ujala
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शासन की उपेक्षापूर्ण नीति के चलते वर्ष 2014 में बनी दुग नाकुरी तहसील मजाक बनकर रह गई है। तहसील में अब तक एसडीएम का पद सृजित नहीं हो सका है और न ही यहां तहसीलदार, नायब तहसीलदार और कानूनगो ही तैनात हैं। एसडीएम के पद का दायित्व बागेश्वर के एसडीएम निभा रहे हैं तो तहसीलदार और नायब तहसीलदार का काम कपकोट के तहसीलदार देख रहे हैं। तहसील भवन का निर्माण पूरा नहीं होने के कारण वह आज भी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बनलेख के कमरों में ही चल रही है। लोगों का कहना है कि यदि इतनी ही उपेक्षा होनी थी तो पुरानी व्यवस्था क्या बुरी थी। लोगों ने तहसील के शीघ्र व्यवस्थित नहीं होने पर आंदोलन शुरू करने की चेतावनी दी है।
चार साल पहले एक कानूनगो और चार राजस्व उप निरीक्षक क्षेत्रों में दियाली, होराली, उडियार और बनलेख को मिलाकर दुग नाकुरी को अलग तहसील का ओहदा मिला था। लोगों को विश्वास था कि तहसील बन जाने से उन्हें छोटी प्रशासनिक इकाई का लाभ मिलेगा लेकिन तब से यहां एसडीएम का पद ही सृजित नहीं हो सका है। इस पद का दायित्व बागेश्वर के एसडीएम निभा रहे हैं। उनके पास भी अपने क्षेत्र का काम अधिक होने के कारण वह इस तहसील को पर्याप्त समय नहीं दे पाते हैं। यहां तहसीलदार और नायब तहसीलदार का पद भी लंबे समय से खाली पड़े हैं। इन पदों का दायित्व कपकोट के तहसीलदार को सौंपा गया है। उनके पास भी अपनी ही तहसील का अधिक काम होने के कारण वह इस तहसील को पर्याप्त समय नहीं दे पा रहे हैं। कानूनगो का पद भी लंबे समय से खाली पड़ा है। इस पद का दायित्व दियाली क्षेत्र के राजस्व उप निरीक्षक के पास है। यहां लिपिक के तीन पदों के सापेक्ष यहां दो पर ही तैनाती है। चतुर्थ श्रेणी कर्मी पीआरडी से तैनात किए गए हैं। वह भी बजट होने पर ही ड्यूटी पर रहते हैं। तहसील में अधिकतर पद खाली होने से क्षेत्र के लोगों को कई परेशानियां झेलनी पड़ रही है। दूरदराज क्षेत्र के लोगों को यहां आने पर निराशा ही हाथ लगती है। तहसील कार्यालय भवन का निर्माण नहीं होने कार्यालय आज भी प्राथमिक स्वास्थ्य केेंद्र बनलेख के कमरों में चल रहा है। दुग नाकुरी विकास संघर्ष समिति के अध्यक्ष गौरी दत्त जोशी ने शासन से रिक्त पदों पर तैनाती शीघ्र करने को कहा है। उन्होंने मांग पूरी नहीं होने पर जन सहयोग से आंदोलन शुरू करने की चेतावनी दी है।
खतौनी को छोड़ अन्य प्रमाण पत्रों के लिए बागेश्वर की दौड़
तमाम अव्यवस्थाओं से जूझ रही इस तहसील से लोगों को खतौनी की नकल तो मिल जाती है जबकि इंटरनेट सेवा नहीं होने के कारण क्षेत्र के लोगों को 10 से 55 किमी की जिला मुख्यालय की दौड़ लगानी पड़ती है। इसमें उनका काफी पैसा और समय बर्बाद हो जाता है।
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मुख्यमंत्री से बात करूंगा : भौर्याल
कपकोट के विधायक बलवंत भौर्याल ने कहा कि कांग्रेस ने तहसील की स्थापना का श्रेय लेने के लिए खूब शोर मचाया लेकिन व्यवस्था के नाम पर कुछ भी नहीं किया। तहसील की समस्याएं संज्ञान में हैं। वह रिक्त पदों पर तैनाती के लिए मुख्यमंत्री और राजस्व मंत्री से बात करेंगे।
चार साल पहले एक कानूनगो और चार राजस्व उप निरीक्षक क्षेत्रों में दियाली, होराली, उडियार और बनलेख को मिलाकर दुग नाकुरी को अलग तहसील का ओहदा मिला था। लोगों को विश्वास था कि तहसील बन जाने से उन्हें छोटी प्रशासनिक इकाई का लाभ मिलेगा लेकिन तब से यहां एसडीएम का पद ही सृजित नहीं हो सका है। इस पद का दायित्व बागेश्वर के एसडीएम निभा रहे हैं। उनके पास भी अपने क्षेत्र का काम अधिक होने के कारण वह इस तहसील को पर्याप्त समय नहीं दे पाते हैं। यहां तहसीलदार और नायब तहसीलदार का पद भी लंबे समय से खाली पड़े हैं। इन पदों का दायित्व कपकोट के तहसीलदार को सौंपा गया है। उनके पास भी अपनी ही तहसील का अधिक काम होने के कारण वह इस तहसील को पर्याप्त समय नहीं दे पा रहे हैं। कानूनगो का पद भी लंबे समय से खाली पड़ा है। इस पद का दायित्व दियाली क्षेत्र के राजस्व उप निरीक्षक के पास है। यहां लिपिक के तीन पदों के सापेक्ष यहां दो पर ही तैनाती है। चतुर्थ श्रेणी कर्मी पीआरडी से तैनात किए गए हैं। वह भी बजट होने पर ही ड्यूटी पर रहते हैं। तहसील में अधिकतर पद खाली होने से क्षेत्र के लोगों को कई परेशानियां झेलनी पड़ रही है। दूरदराज क्षेत्र के लोगों को यहां आने पर निराशा ही हाथ लगती है। तहसील कार्यालय भवन का निर्माण नहीं होने कार्यालय आज भी प्राथमिक स्वास्थ्य केेंद्र बनलेख के कमरों में चल रहा है। दुग नाकुरी विकास संघर्ष समिति के अध्यक्ष गौरी दत्त जोशी ने शासन से रिक्त पदों पर तैनाती शीघ्र करने को कहा है। उन्होंने मांग पूरी नहीं होने पर जन सहयोग से आंदोलन शुरू करने की चेतावनी दी है।
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खतौनी को छोड़ अन्य प्रमाण पत्रों के लिए बागेश्वर की दौड़
तमाम अव्यवस्थाओं से जूझ रही इस तहसील से लोगों को खतौनी की नकल तो मिल जाती है जबकि इंटरनेट सेवा नहीं होने के कारण क्षेत्र के लोगों को 10 से 55 किमी की जिला मुख्यालय की दौड़ लगानी पड़ती है। इसमें उनका काफी पैसा और समय बर्बाद हो जाता है।
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मुख्यमंत्री से बात करूंगा : भौर्याल
कपकोट के विधायक बलवंत भौर्याल ने कहा कि कांग्रेस ने तहसील की स्थापना का श्रेय लेने के लिए खूब शोर मचाया लेकिन व्यवस्था के नाम पर कुछ भी नहीं किया। तहसील की समस्याएं संज्ञान में हैं। वह रिक्त पदों पर तैनाती के लिए मुख्यमंत्री और राजस्व मंत्री से बात करेंगे।