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Bageshwar News: पहाड़ी कृषि उत्पाद के बाजारीकरण में मददगार होगा डॉ. चमन का शोध
Sat, 24 Feb 2024 11:28 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बागेश्वर
संवाद न्यूज एजेंसी, बागेश्वर
Updated Sat, 24 Feb 2024 11:28 PM IST
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कांडा (बागेश्वर)। कांडा महाविद्यालय के लिए अच्छी खबर है। महाविद्यालय के वाणिज्य विषय के सहायक प्राध्यापक डॉ. चमन कुमार के कृषि पर आधारित प्रस्ताव को सरकार की मंजूरी मिल गई है। शोध परियोजना के लिए 10,48,000 रुपये की स्वीकृति मिली है। दो साल के भीतर पूरा किए जाने वाले शोध कार्य से पहाड़ की कृषि उत्पादों को बाजार मुहैया कराने में मदद मिलेगी।
सहायक प्राध्यापक डॉ. कुमार ने बताया कि सरकार ने प्रदेश भर के महाविद्यालयों से मुख्यमंत्री उच्च शिक्षा शोध प्रोत्साहन योजना के तहत परियोजना शोध प्रस्ताव मांगे थे। करीब 500 प्रस्तावों के बीच अलग-अलग विषय के बीच 44 प्रस्ताव मंजूर हुए। डॉ. चमन के प्रस्ताव का विषय उत्तराखंड में सतत कृषि विकास : चुनौतियाँ, अवसर और नीति था। उनका प्रस्ताव वर्तमान समय में कृषि संबंधी समस्याओं और उनके निवारण के आवश्यक नीतियों के निर्माण में सहायक होगा। शोध कार्य पूरे प्रदेश पर केंद्रित रहेगा। इसके तहत पहाड़ में कम होती खेती को बचाने के लिए उसे बाजार मुहैया कराने पर कार्य किया जाएगा। उन्होंने बताया कि स्वीकृत धन की 50 प्रतिशत राशि उन्हें डीबीटी के माध्यम से भेज दी गई है। बाकी 50 प्रतिशत राशि दो किस्तों में हस्तांतरित होगी। महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. मधुलिका पाठक ने प्राध्यापक के शोध प्रस्ताव को स्वीकृत होने पर खुशी जताई। उन्होंने इसे कॉलेज के लिए बड़ी उपलब्धि बताया है।
समर्थ के नोडल रहे चुके हैं डॉ. चमन
कांडा। सहायक प्राध्यापक डॉ. चमन कुमार के पास एमकॉम, एमबीए, पीएचडी डिग्रीधारी हैं। मूल रूप से नैनीताल के रहने वाले डॉ. चमन पिछले साल जुलाई में कांडा डिग्री कॉलेज में तैनात हुए थे। इससे पहले वह सचिवालय में तैनात थे। इस दौरान वह डिग्री कॉलेजों में ऑनलाइन प्रवेश के लिए बने समर्थ पोर्टल निर्माण के नोडल अधिकारी थे।
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सहायक प्राध्यापक डॉ. कुमार ने बताया कि सरकार ने प्रदेश भर के महाविद्यालयों से मुख्यमंत्री उच्च शिक्षा शोध प्रोत्साहन योजना के तहत परियोजना शोध प्रस्ताव मांगे थे। करीब 500 प्रस्तावों के बीच अलग-अलग विषय के बीच 44 प्रस्ताव मंजूर हुए। डॉ. चमन के प्रस्ताव का विषय उत्तराखंड में सतत कृषि विकास : चुनौतियाँ, अवसर और नीति था। उनका प्रस्ताव वर्तमान समय में कृषि संबंधी समस्याओं और उनके निवारण के आवश्यक नीतियों के निर्माण में सहायक होगा। शोध कार्य पूरे प्रदेश पर केंद्रित रहेगा। इसके तहत पहाड़ में कम होती खेती को बचाने के लिए उसे बाजार मुहैया कराने पर कार्य किया जाएगा। उन्होंने बताया कि स्वीकृत धन की 50 प्रतिशत राशि उन्हें डीबीटी के माध्यम से भेज दी गई है। बाकी 50 प्रतिशत राशि दो किस्तों में हस्तांतरित होगी। महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. मधुलिका पाठक ने प्राध्यापक के शोध प्रस्ताव को स्वीकृत होने पर खुशी जताई। उन्होंने इसे कॉलेज के लिए बड़ी उपलब्धि बताया है।
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समर्थ के नोडल रहे चुके हैं डॉ. चमन
कांडा। सहायक प्राध्यापक डॉ. चमन कुमार के पास एमकॉम, एमबीए, पीएचडी डिग्रीधारी हैं। मूल रूप से नैनीताल के रहने वाले डॉ. चमन पिछले साल जुलाई में कांडा डिग्री कॉलेज में तैनात हुए थे। इससे पहले वह सचिवालय में तैनात थे। इस दौरान वह डिग्री कॉलेजों में ऑनलाइन प्रवेश के लिए बने समर्थ पोर्टल निर्माण के नोडल अधिकारी थे।
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