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आपदा ने बढ़ा दी हिमालयी ग्लेशियरों की दूरी
bageshwar
Updated Thu, 04 May 2017 11:02 PM IST
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पिंडारी ग्लेशियर।
- फोटो : अमर उजाला
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लगभग चार साल पहले केदारनाथ में आई भीषण आपदा ने हिमालय के विश्व प्रसिद्ध पिंडारी और कफनी ग्लेशियरों की दूरी बढ़ा दी है। चार साल बाद भी क्षतिग्रस्त ट्रैकिंग रूटों के ठीक नहीं होने से ट्रैकरों और माउंटेनियरों को साढ़े तीन किमी की अतिरिक्त दूरी पैदल तय करनी पड़ रही है। इसका बड़ा असर साहसिक पर्यटन पर पड़ा है। पर्यटन सीजन में जहां पहले प्रतिदिन लगभग 300 से 500 ट्रैकर इस रूट पर आवाजाही करते थे, वहीं अब वर्ष भर 2500 पर्यटक ही पहुंच रहे हैं।
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बागेश्वर के पिंडारी और कफनी ग्लेशियरों को देखने के लिए विदेशी पर्यटकों में विशेष क्रेज रहा है। इसके अलावा खूबसूरत सुंदरढुंगा बुग्याल भी पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र रहा है। लोहारखेत से लगभग 42 किमी लंबे इस ट्रैकिंग रूट में खाती से एक रूट द्वाली के लिए जबकि दूसरा मार्ग जैतोली से होते हुए सुंदरढुंगा बुग्याल को जाता है। द्वाली से पिंडारी और कफनी ग्लेशियरों के रूट भी अलग-अलग हो जाते हैं। वर्ष 2013 में आई आपदा से यह खाती-द्वाली ट्रैकिंग रूट पूरी तरह से ध्वस्त हो गया था। जहां पहले खाती से द्वाली तक 11 किमी पैदल चलना होता था, वहीं आपदा के बाद यह दूरी बढ़कर 14.5 किमी हो गई है।
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पर्यटकों को जानलेवा उबड़-खाबड़ रूटों से आवाजाही करनी पड़ रही है। कई नदियों पर पुल नहीं बन पाए हैं। कच्ची लकड़ियों के लट्ठे डालकर बनाए गए अस्थायी पुलों से पर्यटक आवाजाही कर रहे हैं। इस ट्रैकिंग रूट के सुधार का कार्य चल रहा है, लेकिन चार साल बाद भी यह विश्व प्रसिद्ध रूट सुधर नहीं पाया है। रूट की बदहाल स्थिति और मार्ग के सुधारीकरण में देरी होने का विपरीत असर साहसिक पर्यटन पर पड़ा है। आपदा से पहले इस ट्रैकिंग रूट को सुगम माने जाने से प्रतिवर्ष हजारों की संख्या में देसी-विदेशी ट्रैकर और माउंटेनियर आते थे, लेकिन पिछले चार सालों में ट्रैकरों की संख्या में भारी गिरावट आई है। हालात यह है कि वर्ष 2016 में पूरे सीजन में मात्र 2500 ट्रैकर ही आए।
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