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खतरे के मुहाने पर बसे गांवों में सुरक्षा की मांग
अमर उजाला ब्यूरो बागेश्वर।
Updated Sat, 09 Dec 2017 10:37 PM IST
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डेढ़ दशक से जिले के दो दर्जन से भी अधिक गांवों को भू-स्खलन ने काफी नुकसान पहुंचाया है। लेकिन, वहां सुरक्षा के नाम पर आज तक एक भी पत्थर नहीं लग सका है। सुरक्षा के कोई उपाय नहीं होने से क्षेत्र के लोगों में रोष है।
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बता दें कि सुडिंग, बघर, झूनी, कर्मी, खाती, बदियाकोट, गुलेर, नरगड़ा, जगथाना, पुड़कुनी समेत कई अन्य गांवों में बरसात में हुए भू-स्खलन से काफी नुकसान होता आया है। क्षेत्र के लोग सुरक्षा के लिए तटबंध और पहाड़ ट्रीटमेंट की मांग कई बार कर चुके हैं, लेकिन आज कोई सुनवाई नहीं हुई। प्रभावित क्षेत्र के ग्रामीणों का कहना है कि वह अपनी व्यथा को हर साल शासन और प्रशासन के समक्ष रखते हैं, लेकिन सुरक्षा के नाम पर सिर्फ आश्वासन ही मिलते हैं।
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ग्रामीणों ने कहा कि अब राज्य में भाजपा की डबल इंजन वाली सरकार है। प्रदेश सरकार को चाहिए कि वह बरसात से पहले सुरक्षा के शीघ्र ठोस इंतजाम करे। मांग करने वालों में मल्ला दानपुर विकास समिति के अध्यक्ष स्वरूप सिंह कर्म्याल, उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी कल्याण संगठन के कपकोट ब्लॉक के अध्यक्ष विशन गढ़िया, पूरन राम, जमन सिंह, अमर सिंह, केदार सिंह आदि शामिल हैं।
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