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Bageshwar News: एक साल में दो कद्दावर नेताओं का जाना गहरा झटका
Wed, 26 Apr 2023 10:12 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बागेश्वर
संवाद न्यूज एजेंसी, बागेश्वर
Updated Wed, 26 Apr 2023 10:12 PM IST
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स्व.राम प्रसाद टम्टा, फाइल फोटो
बागेश्वर। एक साल के भीतर जिले की राजनीति के दो मजबूत स्तंभ दुनिया छोड़ गए हैं। पहले राम प्रसाद टम्टा का निधन और अब चंदन राम दास की मृत्यु से जिले की राजनीति को गहरा झटका लगा है। विरोधी दल में होते हुए भी दोनों नेताओं में कई समानताएं थी। सरल व्यवहार, मृदु भाषी और जमीन से जुड़ा होने के चलते जिले की जनता के दिलों में दोनों नेता हमेशा राज करेंगे।
मूल रूप से बागेश्वर के खर्कटम्टा गांव निवासी राम प्रसाद टम्टा को गांधीवादी नेता माना जाता था। उन्होंने 1993 में पहली बार बागेश्वर सीट से विधानसभा का चुनाव जीता था। राज्य गठन के बाद 2002 में हुए पहले चुनाव में वह दोबारा बागेश्वर से विधायक बने और नारायण दत्त तिवारी के नेतृत्व में बनी कांग्रेस की सरकार में समाज कल्याण मंत्री बने। हालांकि 2007 और 2012 के चुनाव में उन्हें चंदन राम दास से हार मिली थी। 2017 में कांग्रेस से टिकट नहीं मिलने पर उन्होंने पार्टी छोड़ दी और भाजपा में शामिल हो गए थे। विगत वर्ष सात मई को उनका इलाज के दौरान निधन हो गया था।
चंदन राम दास ने चार बार विधायक सीट जीतने के बाद मंत्री पद प्राप्त किया और संयोग कहिए कि उन्हें भी समाज कल्याण मंत्री समेत अन्य विभाग मिले। अगर आम जनता की नजर से देखा जाए तो दोनों नेताओं की छवि सरल और बेदाग नेता की थी। जनता के बीच में रहकर उन्हें अपनेपन का अहसास कराना दोनों नेताओं को बखूबी आता था। ऐसे में जब दोनों नेता दुनिया छोड़ गए हैं तो उनकी कमी खलना स्वाभाविक है। फिलहाल दोनों दलों को इन दोनों के समान सर्वमान्य नेता मिलना भी आसान नहीं है।
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मूल रूप से बागेश्वर के खर्कटम्टा गांव निवासी राम प्रसाद टम्टा को गांधीवादी नेता माना जाता था। उन्होंने 1993 में पहली बार बागेश्वर सीट से विधानसभा का चुनाव जीता था। राज्य गठन के बाद 2002 में हुए पहले चुनाव में वह दोबारा बागेश्वर से विधायक बने और नारायण दत्त तिवारी के नेतृत्व में बनी कांग्रेस की सरकार में समाज कल्याण मंत्री बने। हालांकि 2007 और 2012 के चुनाव में उन्हें चंदन राम दास से हार मिली थी। 2017 में कांग्रेस से टिकट नहीं मिलने पर उन्होंने पार्टी छोड़ दी और भाजपा में शामिल हो गए थे। विगत वर्ष सात मई को उनका इलाज के दौरान निधन हो गया था।
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चंदन राम दास ने चार बार विधायक सीट जीतने के बाद मंत्री पद प्राप्त किया और संयोग कहिए कि उन्हें भी समाज कल्याण मंत्री समेत अन्य विभाग मिले। अगर आम जनता की नजर से देखा जाए तो दोनों नेताओं की छवि सरल और बेदाग नेता की थी। जनता के बीच में रहकर उन्हें अपनेपन का अहसास कराना दोनों नेताओं को बखूबी आता था। ऐसे में जब दोनों नेता दुनिया छोड़ गए हैं तो उनकी कमी खलना स्वाभाविक है। फिलहाल दोनों दलों को इन दोनों के समान सर्वमान्य नेता मिलना भी आसान नहीं है।
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