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थाईलैंड की मोरिया बनीं उत्तराखंड की बहू: दुबई में मिलीं नजरें, हल्द्वानी में सात फेरे; अजब प्रेमी की गजब कहानी
Thu, 22 Oct 2026 03:48 PM IST
Heera
अमर उजाला नेटवर्क, बागेश्वर
अमर उजाला नेटवर्क, बागेश्वर
Published by: Heera
Updated Thu, 22 Oct 2026 03:48 PM IST
सार
बागेश्वर जिले के उडल गांव निवासी नवीन परिहार और थाईलैंड की मोरिया ने देश, संस्कृति और भाषा की दूरियां मिटाकर विजयादशमी पर कुमाउंनी रीति-रिवाजों के साथ सात फेरे लिए और एक-दूसरे के हो गए।
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नवीन और मोरिया की शादी
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
प्यार की कोई सरहद नहीं होती, यह बात एक बार फिर सच साबित कर दिखाई है बागेश्वर जिले के एक युवक और थाईलैंड की युवती ने। जिले के उडल गांव निवासी नवीन परिहार और थाईलैंड की रहने वाली मोरिया की प्रेम कहानी किसी फिल्मी स्क्रिप्ट जैसी है। अलग-अलग देशों, संस्कृतियों और भाषाओं की दूरियों को मिटाकर दोनों ने विजयादशमी के पावन अवसर पर कुमाउंनी रीति-रिवाजों के साथ सात फेरे लिए और हमेशा के लिए एक-दूसरे के हो गए।
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नवीन परिहार के पिता पूरन सिंह परिहार बीएसएफ से सेवानिवृत्त सैनिक हैं। इंटरमीडिएट तक की पढ़ाई जीआईसी रवाईंखाल से करने के बाद नवीन ने हल्द्वानी से होटल मैनेजमेंट का कोर्स किया और रोजगार की तलाश में दुबई चले गए। नवीन पिछले 11 वर्षों से दुबई में ही नौकरी कर रहे हैं और पेशे से शेफ हैं। करीब दो साल पहले दुबई में ही उनकी मुलाकात थाईलैंड की रहने वाली 27 वर्षीय मोरिया से हुई, जो वहां शेफ के रूप में नवीन के साथ करीब दो साल तक साथ काम कर चुकी हैं। शुरुआत में पेशेवर मुलाकातें धीरे-धीरे गहरी दोस्ती में बदलीं और फिर दोनों ने जीवनभर साथ निभाने का फैसला किया। नवीन पिछले करीब तीन महीने से हल्द्वानी में रह रहे थे।
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देवलचौड़ में पारिवारिक रस्में और शीतला देवी मंदिर में विवाह
नवीन की बहन बेबी धपोला हल्द्वानी के देवलचौड़ क्षेत्र में रहती हैं। परिवार की सुविधा और सहूलियत को ध्यान में रखते हुए विवाह हल्द्वानी में ही आयोजित करने का निर्णय लिया गया। सोमवार को देवलचौड़ स्थित बहन के आवास पर तमाम पारिवारिक रस्में हर्षोल्लास के साथ निभाई गईं। इसके बाद मंगलवार को विजयादशमी के अवसर पर हल्द्वानी के शीतला देवी मंदिर में कुमाउंनी पुरोहितों ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विवाह संपन्न कराया। विवाह की परंपराओं और भाषा से पूरी तरह अनजान होने के बावजूद मोरिया ने हर एक रस्म को सीखने और समझने में गहरी रुचि दिखाई। विवाह के दौरान एक अंग्रेजी अनुवादक ने उन्हें तमाम रीति-रिवाजों और उनकी धार्मिक मान्यताओं का अर्थ समझाया। इस अनूठे विवाह में शामिल होने के लिए मोरिया के पिता, भाई और भाभी विशेष तौर पर थाईलैंड से हल्द्वानी पहुंचे थे। मेहमानों ने भारतीय और कुमाउंनी संस्कृति में पूरा उत्साह दिखाया। यहां तक कि मोरिया के परिजनों ने कुमाउंनी परंपरा के अनुसार कन्यादान की रस्म भी पूरी श्रद्धा के साथ निभाई। विदेशी मेहमानों की मौजूदगी और पहाड़ी परंपराओं के इस अनूठे मेल ने इस शादी को बेहद खास और यादगार बना दिया।
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बेटे की पसंद से खुश है परिवार, पार्टी की चल रही हैं तैयारियां
सेवानिवृत्त सैनिक पिता पूरन सिंह परिहार और चाचा आरएस परिहार ने खुशी जताते हुए कहा कि पूरा परिवार बेटे की पसंद और इस रिश्ते से बेहद खुश है। कुछ पारिवारिक परिस्थितियों के कारण उनका परिवार विदेश नहीं जा सकता था, इसलिए विवाह हल्द्वानी में ही आयोजित किया गया। अब परिवार की योजना के अनुसार नवीन और मोरिया के पैतृक गांव पहुंचने पर पार्टी की तैयारियां की जा रही हैं। गांव में मोरिया को कुमाउंनी संस्कृति, लोक परंपराओं और पहाड़ की खूबसूरत जीवनशैली से रूबरू कराया जाएगा।