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देवकीनंदन ने नहीं किया था नक्शे की स्वीकृति के लिए आवेदन
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बागेश्वर में पत्रकारों से वार्ता करते एडीएम राहुल गोयल, एसडीएम राकेश तिवारी।
- फोटो : BAGESHWAR
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बागेश्वर। जिला विकास प्राधिकरण (डीडीए) के सचिव के नाते एडीएम राहुल गोयल और एसडीएम राकेश तिवारी ने शुक्रवार को कलक्ट्रेट में प्रेसवार्ता की। इस दौरान उन्होंने सोशल मीडिया पर वायरल पूर्व सैनिक की आत्महत्या के मामले में प्रशासन का पक्ष रखा। कहा कि मोहल्ला कठायतबाड़ा निवासी देवकीनंदन भट्ट की आत्महत्या मामले को नक्शे पास कराने की प्रक्रिया से जोड़ना गलत है क्योंकि उन्होंने नक्शे की स्वीकृति के लिए आवेदन नहीं किया था। काबिज जमीन पर भी उनका कानूनी स्वामित्व नहीं है। इसी कारण 31 जुलाई 2018 को क्षेत्र के ही कुछ लोगों ने अवैध निर्माण की लिखित शिकायत की थी। विभागीय जेई की जांच आख्या के आधार पर चार अगस्त 2018 को प्राधिकरण ने देवकी को नोटिस भेजा। उसी शिकायती पत्र के आधार पर कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
शुक्रवार को हुई प्रेसवार्ता में एडीएम ने कहा कि अवैध निर्माण तो तोड़ने ही पड़ेंगे। इसीलिए डीडीए नियमानुसार कार्रवाई कर रहा है। बताया कि कुल 125 नक्शे पास हुए हैं। तय प्रक्रिया पूरी न होने के कारण 93 आवेदन पत्र निरस्त हुए जबकि 29 मामले विचाराधीन हैं। ध्वस्तीकरण के लिए 14 आदेश जारी हुए हैं। इसमें भवन स्वामियों से खुद अतिक्रमण हटाकर माहभर में इसकी सूचना देने को कहा गया है। ऐसा नहीं करने पर प्रशासन के स्तर से अतिक्रमण हटाया जाएगा तो उसका खर्च भी आरोपी से ही वसूला जाएगा।
एडीएम ने बताया कि जिले में 14 नवंबर 2017 से डीडीए का कानून लागू हुआ है। तब से डीडीए के कार्यक्षेत्र में भवन बनाने और मकान सुधारने के लिए नक्शे पास कराए जाने हैं। लेकिन, नदी और हाइटेंशन बिजली लाइन से निकटता, कम चौड़े रास्तों के कारण आवेदन निरस्त हो रहे हैं, जबकि काबिज जमीन पर वैधानिक स्वामित्व के अभाव में आवेदन ही कम हो पा रहे हैं। इसके बावजूद अधिकतर नक्शे पास हुए हैं। सबको प्राकृतिक न्याय दिलाने के लिए दोनों पक्षों को सुना जा रहा है। अधिकतर मामले 10-15 सुनवाई में निपट जाते हैं। हर सुनवाई में 15-20 दिन का अंतराल रहता है। नक्शे पास कराने के लिए सिंगल विंडो सिस्टम लागू है। सेवा का अधिकार अधिनियम के तहत 15 दिन में मामले निस्तारित हो रहे हैं। हालांकि यह अवधि संबंधित विभागों की एनओसी समेत जरूरी औपचारिकता पूरी होने के बाद की है। एडीएम ने बताया कि डीडीए से पहले यहां विनियमित क्षेत्र का कानून लागू था। तब 80 आरोपियों का चालान किया गया था उसमें भी 110 मामले लंबित थे। अब वह भी डीडीए की प्रक्रिया में शामिल हो चुके हैं
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अब क्यों उछला मामला
बागेश्वर। मोहल्ला कठायतबाड़ा निवासी पूर्व सैनिक देवकीनंदन भट्ट ने 21 अगस्त को आत्महत्या की। उनके पिता कांतिबल्लभ भट्ट का आरोप है कि दोमंजिला मकान बनाने के लिए उनके पुत्र देवकीनंदन सालभर से परेशान थे। वह विभागीय कार्यालयों के चक्कर लगाते थक चुके थे। अमर उजाला में यह खबर प्रमुखता से छपी थी। खबर की कटिंग सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। इस घटना से चिंतित लोगों ने सरकार से डीडीए के मानकों को सहज बनाने की मांग की है। इसके लिए वह तीन दिनों से सोशल मीडिया पर खूब पोस्ट, लाइक, कमेंट कर रहे हैं।
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लोकसभा चुनाव में जब्त हुआ था देवकीनंदन का लाइसेंसी शस्त्र
बागेश्वर। प्राधिकरण के सचिव राहुल गोयल ने बताया कि जिले में 11 अप्रैल को लोकसभा चुनाव के लिए मतदान हुआ था। इसकी तैयारी के लिए मार्च में सभी लाइसेंस धारकों ने अपने शस्त्र जमा कराए लेकिन देवकीनंदन भट्ट ने नोटिस देने के बावजूद शस्त्र जमा नहीं कराया। इस कारण कोतवाली पुलिस के माध्यम से उनका लाइसेंसी शस्त्र जब्त किया गया था। उनका शस्त्र लाइसेंस भी निलंबित हुआ था। इसलिए उनके दोनों मामले विचाराधीन हैं।
पहले से खराब था देवकीनंदन का स्वास्थ्य
बागेश्वर। प्राधिकरण के सचिव राहुल गोयल ने बताया कि देवकीनंदन भट्ट का स्वास्थ्य पहले से खराब था। उन्होंने 19 अगस्त 2018 को इसकी लिखित जानकारी दी थी। बताया था कि उनका इलाज हल्द्वानी के मानस जनकल्याण सेवा समिति से भी हुआ था। उस समिति में अधिकतर रोगी नशामुक्ति के लिए जाते हैं। परिजनों के मुताबिक दिल्ली तक उनका इलाज कराया गया था।
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शुक्रवार को हुई प्रेसवार्ता में एडीएम ने कहा कि अवैध निर्माण तो तोड़ने ही पड़ेंगे। इसीलिए डीडीए नियमानुसार कार्रवाई कर रहा है। बताया कि कुल 125 नक्शे पास हुए हैं। तय प्रक्रिया पूरी न होने के कारण 93 आवेदन पत्र निरस्त हुए जबकि 29 मामले विचाराधीन हैं। ध्वस्तीकरण के लिए 14 आदेश जारी हुए हैं। इसमें भवन स्वामियों से खुद अतिक्रमण हटाकर माहभर में इसकी सूचना देने को कहा गया है। ऐसा नहीं करने पर प्रशासन के स्तर से अतिक्रमण हटाया जाएगा तो उसका खर्च भी आरोपी से ही वसूला जाएगा।
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एडीएम ने बताया कि जिले में 14 नवंबर 2017 से डीडीए का कानून लागू हुआ है। तब से डीडीए के कार्यक्षेत्र में भवन बनाने और मकान सुधारने के लिए नक्शे पास कराए जाने हैं। लेकिन, नदी और हाइटेंशन बिजली लाइन से निकटता, कम चौड़े रास्तों के कारण आवेदन निरस्त हो रहे हैं, जबकि काबिज जमीन पर वैधानिक स्वामित्व के अभाव में आवेदन ही कम हो पा रहे हैं। इसके बावजूद अधिकतर नक्शे पास हुए हैं। सबको प्राकृतिक न्याय दिलाने के लिए दोनों पक्षों को सुना जा रहा है। अधिकतर मामले 10-15 सुनवाई में निपट जाते हैं। हर सुनवाई में 15-20 दिन का अंतराल रहता है। नक्शे पास कराने के लिए सिंगल विंडो सिस्टम लागू है। सेवा का अधिकार अधिनियम के तहत 15 दिन में मामले निस्तारित हो रहे हैं। हालांकि यह अवधि संबंधित विभागों की एनओसी समेत जरूरी औपचारिकता पूरी होने के बाद की है। एडीएम ने बताया कि डीडीए से पहले यहां विनियमित क्षेत्र का कानून लागू था। तब 80 आरोपियों का चालान किया गया था उसमें भी 110 मामले लंबित थे। अब वह भी डीडीए की प्रक्रिया में शामिल हो चुके हैं
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अब क्यों उछला मामला
बागेश्वर। मोहल्ला कठायतबाड़ा निवासी पूर्व सैनिक देवकीनंदन भट्ट ने 21 अगस्त को आत्महत्या की। उनके पिता कांतिबल्लभ भट्ट का आरोप है कि दोमंजिला मकान बनाने के लिए उनके पुत्र देवकीनंदन सालभर से परेशान थे। वह विभागीय कार्यालयों के चक्कर लगाते थक चुके थे। अमर उजाला में यह खबर प्रमुखता से छपी थी। खबर की कटिंग सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। इस घटना से चिंतित लोगों ने सरकार से डीडीए के मानकों को सहज बनाने की मांग की है। इसके लिए वह तीन दिनों से सोशल मीडिया पर खूब पोस्ट, लाइक, कमेंट कर रहे हैं।
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लोकसभा चुनाव में जब्त हुआ था देवकीनंदन का लाइसेंसी शस्त्र
बागेश्वर। प्राधिकरण के सचिव राहुल गोयल ने बताया कि जिले में 11 अप्रैल को लोकसभा चुनाव के लिए मतदान हुआ था। इसकी तैयारी के लिए मार्च में सभी लाइसेंस धारकों ने अपने शस्त्र जमा कराए लेकिन देवकीनंदन भट्ट ने नोटिस देने के बावजूद शस्त्र जमा नहीं कराया। इस कारण कोतवाली पुलिस के माध्यम से उनका लाइसेंसी शस्त्र जब्त किया गया था। उनका शस्त्र लाइसेंस भी निलंबित हुआ था। इसलिए उनके दोनों मामले विचाराधीन हैं।
पहले से खराब था देवकीनंदन का स्वास्थ्य
बागेश्वर। प्राधिकरण के सचिव राहुल गोयल ने बताया कि देवकीनंदन भट्ट का स्वास्थ्य पहले से खराब था। उन्होंने 19 अगस्त 2018 को इसकी लिखित जानकारी दी थी। बताया था कि उनका इलाज हल्द्वानी के मानस जनकल्याण सेवा समिति से भी हुआ था। उस समिति में अधिकतर रोगी नशामुक्ति के लिए जाते हैं। परिजनों के मुताबिक दिल्ली तक उनका इलाज कराया गया था।