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करोड़ों का कच्चा माल फिर भी खड़ा नहीं हो रहा खड़िया उद्योग
भक्त दर्शन पांडेय /अमर उजाला, बागेश्वर।
Updated Sun, 19 Nov 2017 10:05 PM IST
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बागेश्वर में खड़िया खदान।
- फोटो : amar ujala
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औद्योगिक नीति के तहत ए श्रेणी के बागेश्वर जिले में फैक्ट्री लगाने पर लागत में 40 प्रतिशत की छूट की व्यवस्था के बावजूद बड़े उद्योगपति यहां इंडस्ट्री स्थापित करने से कतरा रहे हैं। उद्योगपति नमी का बहाना बनाकर खड़िया से संबंधित उद्योग लगाने के लिए पहाड़ से दूरी बना रहे हैं। यही कारण है कि उद्योग में पिछड़े जिलों के लिए अलग से नीति बनाने के बावजूद पिछले दो सालों में यहां एक भी उद्योग स्थापित नहीं हुआ।
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खड़िया की खदानों की प्रचुरता वाले बागेश्वर जिले में हर साल 150 से 200 करोड़ का कारोबार होता है। यहां से बड़ी मात्रा में खड़िया निकालकर मैदानी क्षेत्रों को भेजी जाती है। इस समय जिले में 70 से अधिक खदानें हैं। इन खदानों से प्रतिवर्ष तीन लाख मीट्रिक टन से अधिक खड़िया निकाली जाती है।
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इस खड़िया को ट्रकों से सीधे मैदानी क्षेत्रों में भेज दिया जाता है। जहां से इसका पाउडर बनाकर टेलकम पाउडर, क्रीम, टूथपेस्ट, डिटरजेंट, साबुन सहित सौंदर्य प्रसाधन बनाने वाली फैक्ट्रियों और पेपर मिलों को सप्लाई किया जाता है। जिस पहाड़ की धरती का सीना चीरकर इतनी बड़ी मात्रा में सफेद सोना निकाला जा रहा है, वहां पर इससे संबंधित एक भी उद्योग लगाने के लिए आज तक कोई पहल नहीं की गई है।
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यहां तक कि सूक्ष्म लघु एवं मध्यम उद्यम विकास नीति 2015 के तहत बागेश्वर जिले को ए श्रेणी में शामिल करने के बाद भी उद्योगपतियों ने कोई रुचि नहीं दिखाई है। जबकि इस नीति के तहत सूक्ष्म उद्योग में 50 लाख का ऋण, लघु उद्योग में 50 लाख से पांच करोड़ का ऋण और मध्यम में पांच करोड़ से 10 करोड़ तक के ऋण का प्रावधान है।
उद्योग स्थापित करने वाले उद्योगपतियों को इंडस्ट्री स्थापित करने पर आई कुल लागत में 40 प्रतिशत की छूट तो मिलेगी ही ब्याज में भी 10 प्रतिशत की छूट दी जाएगी। खड़िया को पाउडर में बदलने का उद्योग भी यहां पर लग जाता तो स्थानीय स्तर पर ही बड़ी संख्या में रोजगार के अवसर पैदा होते।
उद्योग विभाग से मिली जानकारी के अनुसार विभाग की ओर से उद्योगपतियों को इंडस्ट्री लगाने के लिए प्रेरित करने को कई बार पहल की गई। लेकिन, उद्योगपति तर्क देते हैं कि यहां नमी होने के कारण खड़िया को पाउडर में बदलने पर उसके खराब होने की आशंका अधिक है।
उनके अनुसार नमी के कारण खड़िया पाउडर क्रिस्टल में बदल जाता है। ऐसे में यहां से केवल कच्चा माल ही बाहर भेजा जाता है। इस मामले में सरकार की ओर से कोई पहल नहीं होने के कारण करोड़ों का कारोबार भी पलायन रोकने में सहायक नहीं बन सका है।
अधिक घने जंगलों के समीप ही अधिक नमी पाई जाती है। पहाड़ में यदि मुक्तेश्वर को देखा जाए तो वहां पर वातावरण में 66 प्रतिशत नमी है। महाराष्ट्र में 75 प्रतिशत, अहमदाबाद में 55, दिल्ली में 54 और गोवा में नमी का प्रतिशत 76 है। पहाड़ में हर स्थान पर नमी की समस्या नहीं है। जहां पर जंगल कम हैं और धूप आती है वहां पर कम नमी होगी। नमी की समस्या से निपटा जा सकता है।
- डॉ.विपिन चंद्र जोशी, प्रोफेसर, रसायन विज्ञान
- बागेश्वर जिला ए-श्रेणी में शामिल है। 2015 की उद्योग नीति के तहत इकाई स्थापित करने पर 40 प्रतिशत छूट की व्यवस्था की गई है। ब्याज में भी 10 प्रतिशत की सब्सिडी दी जाएगी। खड़िया से संबंधित उद्योग स्थापित करने को लेकर कई बार सुझाव दिए गए। नमी का तर्क देकर खड़िया पाउडर बनाने का उद्योग लगाने से कतराते हैं। उद्योग स्थापित करने को कोई आगे आए तो उद्योग विभाग पूरी मदद करेगा।
- बीसी पाठक, महाप्रबंधक, उद्योग विभाग, बागेश्वर।