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नहीं हो सका स्मार्ट कक्षाओं का संचालन
ब्यूरो/अमर उजाला, बागेश्वर
Updated Sun, 14 Jun 2015 10:56 PM IST
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जिले के सरकारी स्कूलों में स्मार्ट कक्षाएं संचालित करने का सपना अभी तक पूरा नहीं हो सका है। इसके लिए सुविधाओं का अभाव आड़े आ रहा है। पूर्व से चयनित कुछ ही स्कूलों में कभी कभार ऐसी कक्षाओं का संचालन होता है।
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माध्यमिक स्तर की संस्थाओं में कक्षा नौ से 12 तक स्मार्ट क्लास कार्यक्रम अब कुछ ही स्कूलों तक सिमटकर रह गया है। जिला शिक्षा अधिकारी माध्यमिक बीएन सिंह ने बताया कि 2009 में यह कार्यक्रम शुरू हुआ था। इसके लिए माडल के तौर पर जिले में कुछ स्कूलों को चुनकर वहां 100 छात्रों पर एक कंप्यूटर दिया गया।
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इसके साथ की जनरेटर, प्रोजेक्टर, स्क्रीन आदि चीजें दी गई। बागेश्वर में विक्टर मोहन जोशी राजकीय इंटर कालेज, राजकीय बालिका इंटर कालेज, जीआईसी कौसानी सहित एक अन्य स्कूल में यह सुविधा है। यहां छात्र-छात्राओं के साथ ही शिक्षकों के प्रशिक्षण कार्यक्रम भी होते हैं।
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उन्होंने बताया कि जिले के अधिकतर स्कूलों मेें यह कार्यक्रम परवान नहीं चढ़ सका है। कंप्यूटर आदि उपकरण खराब होने पर उनके रखरखाव की व्यवस्था नहीं हो सकी। स्मार्ट कक्षाओं के लिए छात्र-छात्राओं से प्रतिमाह दस रुपए शुल्क लिया जाता है, यह राशि अपर्याप्त होने के कारण रखरखाव, मरम्मत नहीं हो सकी।
अभिभावकों का कहना है कि कई स्थानों पर छोटी समस्याओं को स्थानीय स्तर पर ही हल किया जा सकता था, लेकिन स्थानीय स्तर पर भी प्रबंधन और इच्छा शक्ति का अभाव देखा गया।
स्मार्ट कक्षाओं की व्यवस्था को नियमित रखने के लिए जहां शिक्षकों और प्रधानाचार्यों ने रचि ली, वहां कहीं न कहीं से संसाधन जुटाए गए और आज भी यह सुविधाएं जारी हैं।