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वनाग्नि सुरक्षा के लिए सामूहिक प्रयास जरुरी
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जंगल बचाओ-जीवन बचाओ अभियान में बैठक करती ग्रामीण और मंगल दल की महिलाएं
- फोटो : ALMORA
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अल्मोड़ा। ग्रामीणों और महिला मंगल दलों की सूरी और मटीला में हुई अलग-अलग बैठकों में जंगलों की आग पर प्रभावी नियंत्रण पाने के उपायों पर चर्चा की गई। कोसी नदी के मुख्य रिचार्ज जोन स्याही देवी शीतलाखेत आरक्षित वन क्षेत्र में मौजूद जल स्रोतों और जैव विविधता को बचाने के लिए वर्ष 2003-04 से चले आ रहे जंगल बचाओ-जीवन बचाओ अभियान को जारी रखने का निर्णय लिया गया।
ग्रामोद्योग विकास संस्थान ढैंली के सलाहकार गजेंद्र पाठक ने कहा कि ओण की अनियंत्रित आग गर्मियों में वनाग्नि की घटनाओं का सबसे बड़ा कारण है इसलिए ओण (सूखी खरपतवार और सूखी कंटीली झाड़ियां) जलाने की परंपरा को समयबद्ध और व्यवस्थित करने की जरूरत है। निर्णय लिया गया कि ओण जलाने की कार्रवाई को किसी भी हालत में हर साल वर्ष 31 मार्च तक पूरा कर लिया जाएगा ताकि अप्रैल, मई और जून में जंगलों को आग से सुरक्षित रखा जा सके। ओण जलाने की परंपरा को समयबद्ध करने और जंगलों की आग से जल स्रोतों, जैव विविधता और पारिस्थितिकी तंत्र को हो रहे नुकसान के बारे में जागरूकता पैदा करने के लिए आगामी एक अप्रैल को ओण दिवस मनाने का निर्णय लिया गया। तय किया हुआ कि ओण दिवस पर मटीला के पंचायत घर से सूरी तक जागरूकता रैली निकाली जाएगी। इसमें मटीला, खरकिया, पड्यूला, सूरी, गड़सारी, डोल, बरसीला, पड्यूला, जाला गांवों की महिलाओं, ग्रामीण शामिल होंगे। वहां पर आशा देवी, इंद्रा देवी, भगवती भंडारी, दुर्गा भंडारी, दीपा आर्या, सोनिया बिष्ट, अनीता कनवाल, बबली परिहार आदि थीं।
वनाग्नि सुरक्षा के लिए सामूहिक प्रयास जरुरी
कपकोट (बागेश्वर)। विकास खंड सभागार कपकोट में वनाग्नि सुरक्षा गोष्ठी का आयोजन किया गया। अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने सामूहिक प्रयास से जंगलों को आग से होने वाले नुकसान से बचाने का संकल्प लिया। गोष्ठी की अध्यक्षता ब्लॉक प्रमुख गोविंद सिंह दानू ने की। वहां पर बीडीओ कविंद्र सिंह रावत, नायब तहसीलदार चंद्र प्रकाश, फायर अधिकारी हरी सिंह गुसाईं, एसडीआरएफ प्रभारी हृदयेश सिंह परिहार आदि थे।
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ग्रामोद्योग विकास संस्थान ढैंली के सलाहकार गजेंद्र पाठक ने कहा कि ओण की अनियंत्रित आग गर्मियों में वनाग्नि की घटनाओं का सबसे बड़ा कारण है इसलिए ओण (सूखी खरपतवार और सूखी कंटीली झाड़ियां) जलाने की परंपरा को समयबद्ध और व्यवस्थित करने की जरूरत है। निर्णय लिया गया कि ओण जलाने की कार्रवाई को किसी भी हालत में हर साल वर्ष 31 मार्च तक पूरा कर लिया जाएगा ताकि अप्रैल, मई और जून में जंगलों को आग से सुरक्षित रखा जा सके। ओण जलाने की परंपरा को समयबद्ध करने और जंगलों की आग से जल स्रोतों, जैव विविधता और पारिस्थितिकी तंत्र को हो रहे नुकसान के बारे में जागरूकता पैदा करने के लिए आगामी एक अप्रैल को ओण दिवस मनाने का निर्णय लिया गया। तय किया हुआ कि ओण दिवस पर मटीला के पंचायत घर से सूरी तक जागरूकता रैली निकाली जाएगी। इसमें मटीला, खरकिया, पड्यूला, सूरी, गड़सारी, डोल, बरसीला, पड्यूला, जाला गांवों की महिलाओं, ग्रामीण शामिल होंगे। वहां पर आशा देवी, इंद्रा देवी, भगवती भंडारी, दुर्गा भंडारी, दीपा आर्या, सोनिया बिष्ट, अनीता कनवाल, बबली परिहार आदि थीं।
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वनाग्नि सुरक्षा के लिए सामूहिक प्रयास जरुरी
कपकोट (बागेश्वर)। विकास खंड सभागार कपकोट में वनाग्नि सुरक्षा गोष्ठी का आयोजन किया गया। अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने सामूहिक प्रयास से जंगलों को आग से होने वाले नुकसान से बचाने का संकल्प लिया। गोष्ठी की अध्यक्षता ब्लॉक प्रमुख गोविंद सिंह दानू ने की। वहां पर बीडीओ कविंद्र सिंह रावत, नायब तहसीलदार चंद्र प्रकाश, फायर अधिकारी हरी सिंह गुसाईं, एसडीआरएफ प्रभारी हृदयेश सिंह परिहार आदि थे।

कपकोट के ब्लॉक सभागार में आयोजित वनाग्नि सुरक्षा गोष्ठी में मौजूद लोग। विज्ञप्ति- फोटो : BAGESHWAR
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