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स्वच्छ भारत अभियान से रानीखेत बेखबर
ब्यूरो /अमर उजाला, बागेश्वर।
Updated Fri, 06 Nov 2015 10:24 PM IST
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देश में स्वच्छ भारत अभियान में कई कार्यक्रम चल रहे हैं, लेकिन अंग्रेजों की खोज पर्यटन नगरी रानीखेत में स्वच्छ भारत अभियान का कतई असर देखने को नहीं मिल रहा है। छावनी क्षेत्र में पिछले कई दशकों से गंदगी बड़ी समस्या रही है। छावनी परिषद द्वारा नगर में स्थापित कूड़ेदान नियमित सफाई के अभाव में आवारा जानवरों के अड्डे बने हुए हैं।
रानीखेत में सेना और छावनी क्षेत्र में कैंट ने कुल 88 कूड़ेदान स्थापित किए हैं। जिनमें से एक दर्जन कूड़ेदान बाजार में हैं। जबकि गली मोहल्लों में भी कूड़ेदान स्थापित किए गए हैं। कैंट का दावा है कि बाजार क्षेत्र में प्रतिदिन कूड़ेदानों की सफाई होती है, लेकिन नजारा कुछ अलग है। बाजार और इससे लगे कई स्थानों पर कूड़ेदानों की सफाई नहीं होने से इनमें जानवर घुसे रहते हैं। 1869 में जब अंग्रेजों ने पर्यटन नगरी बसाई थी तो साथ ही यहां छावनी परिषद की भी स्थापना की। यहां सफाई के भी उन्होंने पुख्ता इंतजाम किए थे। बरसाती पानी की निकासी के लिए जहां नगर में छह बड़े नाले बनाए थे, वहीं कूड़ा निस्तारण के लिए बैल गाड़ियों और भैंसा गाड़ियों का इस्तेमाल होता था। नगर की छोटी नालियां प्रतिदिन पानी से धोई जाती थीं, तब कैंट में भिस्ती का पद भी होता था, वह मसक से पानी लाकर नालियां धोता था। छावनी परिषद में तब सेनेटरी अफसर हंटर साहब का पद भी होता था, जो स्वयं नगर में शौचालयों और नालों में सफाई का निरीक्षण करते थे, लेकिन वर्तमान में सफाई व्यवस्था चरमरा गई है। कूड़ेदानों के अंदर जानवर घुसे रहते हैं। नियमित सफाई नहीं होने से पर्यटक भी कड़वे अनुभव लेकर लौटते हैं।
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रानीखेत में सेना और छावनी क्षेत्र में कैंट ने कुल 88 कूड़ेदान स्थापित किए हैं। जिनमें से एक दर्जन कूड़ेदान बाजार में हैं। जबकि गली मोहल्लों में भी कूड़ेदान स्थापित किए गए हैं। कैंट का दावा है कि बाजार क्षेत्र में प्रतिदिन कूड़ेदानों की सफाई होती है, लेकिन नजारा कुछ अलग है। बाजार और इससे लगे कई स्थानों पर कूड़ेदानों की सफाई नहीं होने से इनमें जानवर घुसे रहते हैं। 1869 में जब अंग्रेजों ने पर्यटन नगरी बसाई थी तो साथ ही यहां छावनी परिषद की भी स्थापना की। यहां सफाई के भी उन्होंने पुख्ता इंतजाम किए थे। बरसाती पानी की निकासी के लिए जहां नगर में छह बड़े नाले बनाए थे, वहीं कूड़ा निस्तारण के लिए बैल गाड़ियों और भैंसा गाड़ियों का इस्तेमाल होता था। नगर की छोटी नालियां प्रतिदिन पानी से धोई जाती थीं, तब कैंट में भिस्ती का पद भी होता था, वह मसक से पानी लाकर नालियां धोता था। छावनी परिषद में तब सेनेटरी अफसर हंटर साहब का पद भी होता था, जो स्वयं नगर में शौचालयों और नालों में सफाई का निरीक्षण करते थे, लेकिन वर्तमान में सफाई व्यवस्था चरमरा गई है। कूड़ेदानों के अंदर जानवर घुसे रहते हैं। नियमित सफाई नहीं होने से पर्यटक भी कड़वे अनुभव लेकर लौटते हैं।
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