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चीनी, रूसी, जापानी अपनी भाषा बोलते, हमें हिंदी बोलने में लज्जा क्यों

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Tue, 14 Sep 2021 01:14 AM IST
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Chinese, Russian, Japanese speak their own language, why are we ashamed to speak Hindi?
बागेश्वर के आनंदी एकेडमी में हिंदी हैं हम अभियान के तहत निबंध प्रतियोगिता में हिस्सा लेते विद्य? - फोटो : BAGESHWAR
बागेश्वर। बागेश्वर के आनंदी एकेडमी में अमर उजाला फाउंडेशन के हिंदी हैं हम अभियान के तहत विद्यार्थियों के मध्य हिंदी के महत्व पर निबंध प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। विद्यार्थियों ने हिंदी भाषा के महत्व और हिंदी को कैसे शीर्ष पर पहुंचाएं, इस पर विस्तार से अपनी बात रखी। कक्षा 9 में पढ़ने वाले चंद्र प्रकाश खेतवाल ने हिंदी की महत्ता पर सटीक विचार रखते हुए प्रतियोगिता में पहला स्थान प्राप्त किया। दूसरे स्थान पर कक्षा 9 की पूजा भट्ट रहीं। कक्षा 9 की ही आंचल बजेठा ने तीसरा स्थान प्राप्त किया।
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विद्यालय के प्रबंधक मनमोहन सिंह भाकुनी की मौजूदगी, प्रधानाचार्य गौरव पंत की देखरेख में हुई प्रतियोगिता में पहले स्थान पर रहे चंद्र प्रकाश खेतवाल ने निबंध में लिखा कि भारत में सबसे अधिक बोली जाने वाली हिंदी भाषा है, लेकिन असंख्य लोग हिंदी बोलने में लज्जा महसूस करते हैं। वह समझते हैं कि यदि वह हिंदी बोलेंगे तो उन्हें नीची नजरों से देखा जाएगा। जबकि चीनी, रूसी, जापानी और अन्य देशों के लोग अपनी ही भाषा में बोलते हैं। हमारे देश में अंग्रेजी को खुद की भाषा हिंदी से ज्यादा जरूरी बताया जाता है और कहा जाता है कि आज के समय में हिंदी से कुछ प्राप्त नहीं किया जा सकता।
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प्रतियोगिता में दूसरे स्थान पर रहीं पूजा भट्ट ने लिखा कि आज के दौर में हिंदी कहीं न कहीं अन्य भाषाओं से पिछड़ रही है। हिंदी भाषा को राष्ट्र की समग्र भाषा बनाने के लिए हर किसी को प्रयास करने होंगे। हिंदी को जन्म के बाद से ही बोलना जानते हैं, इसके लिए कोई अलग से अभ्यास की जरूरत नहीं होती। उन्होंने लिखा कि हम फूल हैं चमन के, हिंदी है हम भारतवासियों के लिए बागवान, हिंदी है महान-हिंदी है महान। प्रतियोगिता में तीसरे स्थान पर रहीं आंचल बजेठा ने हिंदी के महत्व पर गहरा प्रकाश डाला। उन्होंने उल्लेख किया कि कबीरदास, तुलसीदास, सुमित्रानंदन पंत, महादेवी वर्मा, हरिवंशराय बच्चन समेत तमाम विद्वानों ने अपनी पूरी जिंदगी हिंदी साहित्य के लिए समर्पित कर दी। सभी भारतवासियों को हिंदी के आंदोलन को शिखर तक पहुंचाना होगा। विद्यालय के प्रबंधक, प्रधानाचार्य और शिक्षिकाओं ने विजयी प्रतिभागियों को पुरस्कार बांटे। परीक्षा को संपन्न कराने में शिक्षक मदन मोहन, शिक्षिका निर्मला फर्त्याल, हिमानी रावत, भावना खेतवाल, योगिता नगरकोटी ने सहयोग किया।
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कोट
अमर उजाला का प्रयास हिंदी के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा, मील का पत्थर साबित होगा।
चंद्र प्रकाश खेतवाल
कोट
हिंदी के उत्थान के लिए चलाया जा रहा अभियान सराहनीय है। इससे भाषा के प्रति लोग जागरूक होंगे
पूजा भट्ट
कोट
हिंदी का महत्व लोगों को समझना होगा। हिंदी को दासता की भाषा अंग्रेजी से ऊपर रखना होगा।
आंचल बजेठा
कोट
हिंदी के प्रचार-प्रसार के लिए अमर उजाला का अभियान बेहद सराहनीय है। किसी भी देश की भाषा उस राष्ट्र की शान होती है।
मनमोहन सिंह भाकुनी प्रबंधक आनंदी एकेडमी बागेश्वर
कोट
अमर उजाला का प्रयास काफी सराहनीय है। अमर उजाला समय-समय पर इस तरह के आयोजन करता रहता है। ऐसे आयोजनों से विद्यार्थियों का भी मार्गदर्शन होता है।
गौरव पंत आनंदी एकेडमी बागेश्वर
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