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जिले की सड़कों पर खतरा बने हैं चीड़ के जले पेड़
अमर उजाला ब्यूरो बागेश्वर।
Updated Fri, 27 Apr 2018 10:40 PM IST
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बागेश्वर-कांडा रूट में खतरा बने जले चीड़ के पेड़।
- फोटो : अमर उजाला
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बागेश्वर-कांडा रूट में लगी आग से जले दर्जनों चीड़ के पेड़ लोगों के लिए खतरा बने हुए हैं। इन पेड़ों के धराशायी होने की आशंका बनी हुई है। इससे कभी भी गंभीर हादसा हो सकता है लेकिन प्रशासन पेड़ों को हटाने की कार्रवाई नहीं कर रहा।
बागेश्वर-कांडा सड़क चीड़ के जंगल से होकर गुजरती है। इस वन्य क्षेत्र में वन निगम द्वारा चीड़ के पेड़ों से लीसा निकाला जाता है। फायर सीजन में वनों में आग लगने पर लीसे के कारण यह पेड़ भी जल जाते हैं। तेज हवा चलने पर यह जले पेड़ गिरते रहते हैं। वाहन चलते समय पेड़ों के सड़क पर गिरने से हादसा होने का डर रहता है।
बागेश्वर-ताकुला रोड पर भी कई स्थानों पर पेड़ खतरा बने हैं। सामाजिक कार्यकर्ता वीरेंद्र सिंह, राजेंद्र सिंह आदि का कहना है कि चीड़ के भारी-भरकम पेड़ हवा चलते ही हिलने लगते हैं। उन्होंने वन विभाग से जले पेड़ों का छपान कर काटने की मांग की है।
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बागेश्वर-कांडा सड़क चीड़ के जंगल से होकर गुजरती है। इस वन्य क्षेत्र में वन निगम द्वारा चीड़ के पेड़ों से लीसा निकाला जाता है। फायर सीजन में वनों में आग लगने पर लीसे के कारण यह पेड़ भी जल जाते हैं। तेज हवा चलने पर यह जले पेड़ गिरते रहते हैं। वाहन चलते समय पेड़ों के सड़क पर गिरने से हादसा होने का डर रहता है।
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बागेश्वर-ताकुला रोड पर भी कई स्थानों पर पेड़ खतरा बने हैं। सामाजिक कार्यकर्ता वीरेंद्र सिंह, राजेंद्र सिंह आदि का कहना है कि चीड़ के भारी-भरकम पेड़ हवा चलते ही हिलने लगते हैं। उन्होंने वन विभाग से जले पेड़ों का छपान कर काटने की मांग की है।
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