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बास्ती वासियों ने सीबीआई जांच और मुआवजे की मांग उठाई
Wed, 19 Dec 2018 11:23 PM IST
Almora desk
अमर उजाला ब्यूरो, बागेश्वर।
अमर उजाला ब्यूरो, बागेश्वर।
Published by: Almora desk
Updated Wed, 19 Dec 2018 11:23 PM IST
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बागेश्वर में डीएम को ज्ञापन देते बास्ती के ग्रामीण।
- फोटो : अमर उजाला
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बास्ती प्रकरण की सीबीआई जांच, मृतकों के परिजनों और प्रभावितों को आश्रितों को मुआवजा नहीं मिलने से ग्रामीणों में रोष है। गुस्साए ग्रामीणों ने बुधवार को डीएम रंजना रजगुरु से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा। उन्होंने मांगें 31 दिसंबर तक पूरी न होने पर देहरादून में सचिवालय का घेराव करने की चेतावनी दी है।
बास्ती की प्रधान दीपा देवी के नेतृत्व में ग्रामीणों ने डीएम से मुलाकात की। ग्रामीणों ने कहा कि 29 नवंबर को बारात का विषाक्त भोजन खाने से बास्ती, सनगाड़ और गडेरा गांव के 300 से अधिक लोग बीमार पड़ गए थे जबकि दो मासूमों और दो महिलाओं की मृत्यु हो गई थी। इस प्रकरण की आज तक सीबीआई जांच शुरू नहीं हो सकी है।
मृतकों के परिजनों और प्रभावितों को मुआवजा भी नहीं दिया गया है। कहा कि प्रदेश की यह पहली और बड़ी घटना का सच सामने लाने के लिए सीबीआई से जांच होनी जरूरी है। ग्रामीणों ने डीएम से मांगें शीघ्र पूरी करवाने की मांग की है।
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ज्ञापन सौंपने वालों में कपकोट के कनिष्ट ब्लाक उप प्रमुख गोकुल पंचपाल, देवेंद्र सिंह महर, मोहन सिंह, दीवान सिंह, हीरा सिंह, सुंदर सिंह, अनिल सिंह, दरबान सिंह, केदार सिंह, फकीर सिंह, हयात सिंह, नंदन सिंह, देव सिंह, हरीश सिंह, मोहन राठौर, मोहन मेहता, सुदर, प्रताप, नरेंद्र, गणेेश सिंह शामिल थे।
समय-समय पर स्वास्थ्य परीक्षण जरूरी
ग्रामीणों ने डीएम को बताया कि विषाक्त भोजन खाने के बाद अस्पताल से घरों को लौटे प्रभावितों की दिनचर्या सामान्य नहीं हो सकी है। प्रभावितों का खान-पान भी सामान्य नहीं हो सका है। प्रभावितों के स्वास्थ्य का समय-समय पर परीक्षण होना जरूरी है।
रोजी-रोटी का भी संकट
ग्रामीणों ने बताया कि प्रभावितों में अधिकतर मजदूरी कर अपना घर चलाने वाले हैं। प्रभावित अपने को अभी तक पूरी तरह स्वस्थ महसूस नहीं कर रहे हैं जिस कारण पंचायत स्तर पर होने वाले विकास कार्य ठप पड़े हैं। गरीब प्रभावितों के पास आय के अन्य कोई साधन नहीं होने से उनके सामने रोजी-रोटी का भी संकट बना हुआ है।
मजिस्ट्रेटी जांच के साथ पुलिस भी कर रही है जांच : डीएम
डीएम रंजना राजगुरु ने बताया कि बास्ती प्रकरण की सीबीआई जांच कराने का मामला शासन स्तर का है जबकि उनके स्तर से मजिस्ट्रेटी जांच के साथ ही पुलिस भी जांच कर रही है। जांच में सभी को सहयोग करना चाहिए। विषाक्त भोजन के सैंपलों की जांच रिपोर्ट अभी नहीं मिली है। मृतकों के परिजनों और प्रभावितों को मुआवजा देने के लिए शासन को पत्र लिखा गया है। जल्द ही शासन कोई निर्णय लेगा। तब तक सभी से धैर्य बनाए रखने की अपील की।
बास्ती में अस्पताल, राइंका सनगाड़ में शिक्षक तैनात करने की मांग
बास्ती के ग्रामीणों ने डीएम को ज्ञापन देकर गांव में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की स्थापना करवाने और राइंका सनगाड़ में शिक्षकों की शीघ्र तैनाती की भी मांग की। ग्रामीणों ने डीएम से कहा कि बास्ती में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की स्थापना होने से इस गांव के अलावा अन्य नजदीकी गांवों के लोगों को स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ मिलेगा।
राइंका सनगाड़ में 110 बच्चे पंजीकृत हैं। कक्षा छह से इंटर तक के बच्चों को पढ़ाने के लिए सिर्फ दो ही शिक्षक तैनात हैं। स्कूल में वरिष्ठ लिपिक और चतुर्थ श्रेणी कर्मियों के पद लंबे समय से खाली हैं। उन्होंने डीएम से विद्यालय में एलटी और प्रवक्ताओं की शीघ्र तैनाती करने की मांग की है।
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बास्ती की प्रधान दीपा देवी के नेतृत्व में ग्रामीणों ने डीएम से मुलाकात की। ग्रामीणों ने कहा कि 29 नवंबर को बारात का विषाक्त भोजन खाने से बास्ती, सनगाड़ और गडेरा गांव के 300 से अधिक लोग बीमार पड़ गए थे जबकि दो मासूमों और दो महिलाओं की मृत्यु हो गई थी। इस प्रकरण की आज तक सीबीआई जांच शुरू नहीं हो सकी है।
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मृतकों के परिजनों और प्रभावितों को मुआवजा भी नहीं दिया गया है। कहा कि प्रदेश की यह पहली और बड़ी घटना का सच सामने लाने के लिए सीबीआई से जांच होनी जरूरी है। ग्रामीणों ने डीएम से मांगें शीघ्र पूरी करवाने की मांग की है।
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ज्ञापन सौंपने वालों में कपकोट के कनिष्ट ब्लाक उप प्रमुख गोकुल पंचपाल, देवेंद्र सिंह महर, मोहन सिंह, दीवान सिंह, हीरा सिंह, सुंदर सिंह, अनिल सिंह, दरबान सिंह, केदार सिंह, फकीर सिंह, हयात सिंह, नंदन सिंह, देव सिंह, हरीश सिंह, मोहन राठौर, मोहन मेहता, सुदर, प्रताप, नरेंद्र, गणेेश सिंह शामिल थे।
समय-समय पर स्वास्थ्य परीक्षण जरूरी
ग्रामीणों ने डीएम को बताया कि विषाक्त भोजन खाने के बाद अस्पताल से घरों को लौटे प्रभावितों की दिनचर्या सामान्य नहीं हो सकी है। प्रभावितों का खान-पान भी सामान्य नहीं हो सका है। प्रभावितों के स्वास्थ्य का समय-समय पर परीक्षण होना जरूरी है।
रोजी-रोटी का भी संकट
ग्रामीणों ने बताया कि प्रभावितों में अधिकतर मजदूरी कर अपना घर चलाने वाले हैं। प्रभावित अपने को अभी तक पूरी तरह स्वस्थ महसूस नहीं कर रहे हैं जिस कारण पंचायत स्तर पर होने वाले विकास कार्य ठप पड़े हैं। गरीब प्रभावितों के पास आय के अन्य कोई साधन नहीं होने से उनके सामने रोजी-रोटी का भी संकट बना हुआ है।
मजिस्ट्रेटी जांच के साथ पुलिस भी कर रही है जांच : डीएम
डीएम रंजना राजगुरु ने बताया कि बास्ती प्रकरण की सीबीआई जांच कराने का मामला शासन स्तर का है जबकि उनके स्तर से मजिस्ट्रेटी जांच के साथ ही पुलिस भी जांच कर रही है। जांच में सभी को सहयोग करना चाहिए। विषाक्त भोजन के सैंपलों की जांच रिपोर्ट अभी नहीं मिली है। मृतकों के परिजनों और प्रभावितों को मुआवजा देने के लिए शासन को पत्र लिखा गया है। जल्द ही शासन कोई निर्णय लेगा। तब तक सभी से धैर्य बनाए रखने की अपील की।
बास्ती में अस्पताल, राइंका सनगाड़ में शिक्षक तैनात करने की मांग
बास्ती के ग्रामीणों ने डीएम को ज्ञापन देकर गांव में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की स्थापना करवाने और राइंका सनगाड़ में शिक्षकों की शीघ्र तैनाती की भी मांग की। ग्रामीणों ने डीएम से कहा कि बास्ती में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की स्थापना होने से इस गांव के अलावा अन्य नजदीकी गांवों के लोगों को स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ मिलेगा।
राइंका सनगाड़ में 110 बच्चे पंजीकृत हैं। कक्षा छह से इंटर तक के बच्चों को पढ़ाने के लिए सिर्फ दो ही शिक्षक तैनात हैं। स्कूल में वरिष्ठ लिपिक और चतुर्थ श्रेणी कर्मियों के पद लंबे समय से खाली हैं। उन्होंने डीएम से विद्यालय में एलटी और प्रवक्ताओं की शीघ्र तैनाती करने की मांग की है।